बिहार में नौकरी छोड़कर "सियासी मैदान" में उतरे दूसरे आईपीएस अधिकारी को बीजेपी ने दिया झटका, एक ने डीजीपी तो दूसरे ने एसपी पद से किया रिजाइन, नहीं मिला टिकट

PATNA : बिहार में बीजेपी ने दूसरे आपीएस अधिकारी को झटका दे दिया है। हम बात कर रहे हैं बक्सर लोकसभा सीट की। जहाँ कभी तत्कालीन आईपीएस अधिकारी गुप्तेश्वर पाण्डेय ने लोकसभा चुनाव लड़ने के लिए नौकरी से वीआरएस ले लिया था। तब गुप्तेश्वर पाण्डेय ने 2009 में वीआरएस लिया था और उस समय भी उनके लोकसभा चुनाव लड़ने की चर्चाएं तेज थीं। कहा जाता है कि गुप्तेश्वर पांडेबिहार की बक्सर लोकसभा सीट से बीजेपी के टिकट पर चुनाव लड़ना चाहते थे। 

गुप्तेश्वर पांडे को उम्मीद थी कि बक्सर से बीजेपी के तत्कालीन सांसद लालमुनि चौबे को पार्टी दोबारा से प्रत्याशी नहीं बनाएगी। ऐसे में वह पुलिस की नौकरी से इस्तीफा देकर सियासी गोटियां सेट करने लगे थे। लेकिन भाजपा ने उन्हें टिकट नहीं दिया और वे वापस नौकरी में चले गए। इसके बाद 1987 बैच के आईपीएस ऑफिसर गुप्तेश्वर पांडे को जनवरी 2019 में बिहार का डीजीपी बनाया गया। 

बतौर डीजीपी उनका कार्यकाल 28 फरवरी 2021 तक था, लेकिन उन्होंने अपना कार्यकाल पूरा होने से पहले वीआरएस ले लिया। उन्होंने 2020 में होनेवाले विधानसभा चुनाव में बक्सर सीट से चुनाव लड़ने की इच्छा जताई थी। इसके लिए गुप्तेश्वर पाण्डेय जदयू में शामिल हो गए थे। लेकिन जब चुनाव का समय आया तो बक्सर की सीट भाजपा के कोटे में चली गयी और पार्टी ने परशुराम चतुर्वेदी का अपना बना दिया। 

इसके बाद बारी आती है असम कैडर के आईपीएस अधिकारी आनंद मिश्रा की। बक्सर संसदीय क्षेत्र से चुनाव लड़ने का मन बना चुके आनंद मिश्रा को भी बड़ा झटका लगा है। दरअसल आनंद मिश्रा ने बक्सर से चुनाव लड़ने के लिए आईपीएस की नौकरी छोड़ दी। उन्हें विश्वास था की केन्द्रीय मंत्री अश्विनी चौबे का टिकट कटने की स्थिति में टिकट मिलेगा। लेकिन एन वक्त पर बीजेपी ने उन्हें झटका दे दिया। पार्टी ने गोपालगंज के रहनेवाले मिथिलेश तिवारी को टिकट थमा दिया है। लेकिन अब तैयारी में जुटे आनन्द मिश्रा का कहना है की जनता की इच्छा होगी तो वे जरुर चुनाव लड़ेंगे।