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हाईकोर्ट के आदेश पर दरगाह में हिन्दू भक्तों ने की महाशिवरात्रि की पूजा, कहा - दोनों समुदायों के लिए स्थान का ऐतिहासिक महत्व

हाईकोर्ट के आदेश पर ऐतिहासिक महत्व रखनेवाले लाडल मशक दरगाह में महाशिवरात्रि के मौके पर शिवलिंग की पूजा की गई। इस दौरान किसी भी घटना को लेकर सुरक्षा के पूरे प्रबंध किए गए थे। ताकि सामाजिक सौहार्द को बिगाड़ने की कोशिश नाकाम हो सके।

हाईकोर्ट के आदेश पर दरगाह में हिन्दू भक्तों ने की महाशिवरात्रि की पूजा, कहा - दोनों समुदायों के लिए स्थान का ऐतिहासिक महत्व

N4N DESK - कर्नाटक हाई कोर्ट के आदेश के बाद महाशिवरात्रि के अवसर पर बुधवार को कलबुर्गी जिले के लाडले मशक दरगाह स्थित राघव चैतन्य शिवलिंग की पूजा-अर्चा की गयी। कडगंची मठ के वीरभद्र शिवाचार्य स्वामी की अगुवाई में 10 श्रद्धालुओं ने शिवलिंग की विधिवत पूजा-अर्चना की। यह दरगाह जिले के अलंद तालुका मुख्यालय के बाहरी इलाके में है।  इस दौरान शिवभक्तों में गजब का उत्साह था।  इस दौरान मंदिर के आसपास कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के इंतजाम किये गए थे

कर्नाटक का है मामला

बता दें कि दरगाह में शिवलिंग की पूजा करने का यह मामला कर्नाटक का है। जहां हाईकोर्ट ने लाडल माशक दरगाह में शिवलिंग पर हिंदू श्रद्धालुओं को पूजा अर्चना करने की अनुमति दी थी। कोर्ट ने कहा था कि यह यह स्थल हिंदू और मुस्लिम दोनों समुदायों के लिए ऐतिहासिक महत्व रखता है। 

इससे पहले उच्च न्यायालय ने कहा था कि हिंदू श्रद्धालुओं को महाशिवरात्रि पर 2 बजे से 6 बजे तक शिवलिंग पर पूजा करने की अनुमति दी जाएगी, जबकि मुस्लिम समुदाय के सदस्य उर्स से संबंधित अनुष्ठान सुबह 8 बजे से दोपहर 12 बजे तक करेंगे। अदालत ने इन निर्धारित समय सीमाओं का सख्ती से पालन करने की बात कही है ताकि सामुदायिक सद्भाव बनी रहे। इसके अलावा, अधिकारियों को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया है कि पूजा के दौरान स्थल में कोई अनधिकृत परिवर्तन न किए जाएं।

लंबे समय से दोनों समुदाय के लोग करते थे पूजा

लाडल माशक दरगाह, जो 14वीं शताब्दी के सूफी संत से जुड़ी हुई है, में राघव चैतन्य शिवलिंग भी स्थित है, जो 15वीं शताब्दी के हिंदू संत से जुड़ा हुआ है। ऐतिहासिक रूप से यह स्थल साम्प्रदायिक सद्भाव का प्रतीक रहा है। यहां दोनों धार्मिक समुदाय पूजा अर्चना करते रहे है। हालांकि, 2022 में धार्मिक अधिकारों को लेकर विवादों के कारण तनाव उत्पन्न हुआ था, जिसके परिणामस्वरूप साम्प्रदायिक अशांति फैल गई थी।


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