CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका, SIR और 13 करोड़ वोटरों के नाम हटाने की जांच की मांग

याचिका में विशेष गहन पुनरीक्षण यानी Special Intensive Revision (SIR) से जुड़े कथित तौर पर बिना अन्य दो चुनाव आयुक्तों की सहमति लिए गए फैसलों को चुनौती दी गई है।

CEC Gyanesh Kumar
CEC Gyanesh Kumar- फोटो : news4nation

CEC Gyanesh Kumar: मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर की गई है। याचिका में विशेष गहन पुनरीक्षण यानी Special Intensive Revision (SIR) से जुड़े कथित तौर पर बिना अन्य दो चुनाव आयुक्तों की सहमति लिए गए फैसलों को चुनौती दी गई है। याचिका में ऐसे फैसलों, दिशानिर्देशों और सॉफ्टवेयर में किए गए बदलावों को असंवैधानिक और शून्य घोषित करने की मांग की गई है।


यह याचिका अधिवक्ता शैलेंद्र मणि त्रिपाठी ने अधिवक्ता चांद कुरैशी के माध्यम से दायर की है। याचिकाकर्ता ने मांग की है कि CEC ज्ञानेश कुमार द्वारा अन्य दो चुनाव आयुक्तों सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी की सहमति के बिना लिए गए कथित फैसलों को अवैध घोषित किया जाए। साथ ही मूल Form-6 को बहाल करने की भी मांग की गई है।


13 करोड़ वोटरों के नाम हटाने की जांच की मांग

याचिका में SIR प्रक्रिया के दौरान मतदाता सूची से करीब 13 करोड़ नाम हटाए जाने के मामले की SIT से जांच कराने की मांग भी की गई है। याचिकाकर्ता ने इस पूरी प्रक्रिया में लिए गए फैसलों और मतदाता पंजीकरण से जुड़े बदलावों की जांच की मांग की है।


Indian Express की रिपोर्ट के बाद दायर हुई याचिका

यह याचिका The Indian Express की 23 सितंबर की रिपोर्ट के कुछ दिनों बाद दाखिल की गई है। रिपोर्ट में दावा किया गया था कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में कम से कम 14 मौकों पर चुनाव आयोग के फैसलों और आदेशों को लेकर लिखित आपत्तियां दर्ज की थीं। इनमें नए मतदाताओं के पंजीकरण, मतदाता नाम हटाने और बहाल करने तथा चुनावी डेटा और सॉफ्टवेयर से जुड़े मुद्दे शामिल थे।


रिपोर्ट के मुताबिक, दोनों चुनाव आयुक्तों ने Form-6 में किए गए बदलावों पर भी आपत्ति जताई थी। उनका कहना था कि नए मतदाताओं के फॉर्म में SIR से जुड़े सवाल जोड़े गए थे और इसे लेकर उन्होंने बदलाव को कथित तौर पर अनधिकृत और अवैध बताया था। अब सुप्रीम कोर्ट में दाखिल याचिका में इन्हीं आरोपों के आधार पर CEC और चुनाव आयोग से जुड़े फैसलों की वैधानिकता की जांच तथा कथित मतदाता विलोपन की स्वतंत्र जांच की मांग की गई है।