Rahul Gandhi: अमित शाह मानहानि केस में राहुल गांधी तलब, आठ साल पुराने बयान पर फिर गरमाई राजनीति, इस दिन कोर्ट में पेश होंगे लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष
Rahul Gandhi: सांसद-विधायक मामलों की विशेष अदालत ने कांग्रेस सांसद और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से जुड़े मानहानि मामले में तलब किया है।
Rahul Gandhi:एक बार फिर सियासत और अदालत की दहलीज़ पर टकराव की ख़बर सामने आई है। सांसद-विधायक मामलों की विशेष अदालत ने कांग्रेस सांसद और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से जुड़े मानहानि मामले में तलब किया है। उत्तर प्रदेश के सुल्तानपुर की अदालत ने राहुल गांधी को 19 जनवरी को पेश होकर गवाही देने का आदेश दिया है। यह मामला न सिर्फ़ क़ानूनी है, बल्कि पूरी तरह सियासी रंग में डूबा हुआ है, जिसकी गूंज दिल्ली से लेकर राज्यों तक सुनाई दे रही है।
यह मुकदमा करीब आठ साल पुराना है, जिसकी जड़ें कर्नाटक विधानसभा चुनाव 2018 के प्रचार में दिए गए राहुल गांधी के उस बयान से जुड़ी हैं, जिसे भाजपा ने अमित शाह के ख़िलाफ़ आपत्तिजनक और मानहानिकारक करार दिया था। भाजपा नेता विजय मिश्रा ने अक्टूबर 2018 में सुल्तानपुर की अदालत में यह मामला दर्ज कराया था। वादी का दावा है कि राहुल गांधी के बयान से न सिर्फ़ अमित शाह की छवि धूमिल हुई, बल्कि भाजपा कार्यकर्ताओं और समर्थकों की भावनाएं भी आहत हुईं।
मंगलवार को इस मामले की सुनवाई करीब 40 मिनट तक चली। सुनवाई के दौरान वादी पक्ष के गवाह राम चंद्र दुबे से जिरह पूरी हो गई। राहुल गांधी की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता काशी प्रसाद शुक्ला ने अदालत को बताया कि जिरह समाप्त हो चुकी है। वहीं वादी पक्ष के वकील संतोष कुमार पांडे ने भी पुष्टि की कि गवाह का बयान पूरा हो गया है। इसके बाद अदालत ने अगली सुनवाई और राहुल गांधी की पेशी के लिए 19 जनवरी की तारीख तय कर दी।
इस केस की अदालती यात्रा भी कम दिलचस्प नहीं रही है। दिसंबर 2023 में राहुल गांधी के पेश न होने पर अदालत ने उनके खिलाफ वारंट जारी किया था। इसके बाद 20 फरवरी 2024 को राहुल गांधी ने अदालत में आत्मसमर्पण किया, जहां उन्हें 25 हजार रुपये के दो मुचलकों पर ज़मानत मिली। 26 जुलाई 2024 को उन्होंने अपना बयान दर्ज कराते हुए खुद को बेगुनाह बताया और पूरे मामले को राजनीतिक साज़िश करार दिया।
राहुल गांधी के बयान के बाद अदालत ने वादी पक्ष को सबूत पेश करने का निर्देश दिया, जिसके तहत अब तक दो गवाहों की प्रक्रिया लगभग पूरी हो चुकी है। अब सवाल यह है कि क्या यह मामला सिर्फ़ क़ानूनी दायरे में सिमटेगा या फिर आने वाले दिनों में यह भाजपा बनाम कांग्रेस की सियासी जंग का नया हथियार बनेगा? सुल्तानपुर की अदालत से उठी यह आवाज़ एक बार फिर राष्ट्रीय राजनीति में हलचल पैदा करने को तैयार दिख रही है।