NEET विवाद में घिरे धर्मेंद्र प्रधान पर मोदी का भरोसा क्यों कायम? इस्तीफे की मांग के बीच सरकार की सियासी रणनीति क्या है?क्या है मोदी का मास्टर प्लान? पढ़िए...

NEET UG Paper Leak: सियासी गलियारों में सबसे बड़ा सवाल यही गूंज रहा है कि आखिर शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान पर कोई सीधी कार्रवाई क्यों नहीं कर रहे?

Why PM Modi Is Backing Dharmendra Pradhan Amid NEET Row know
धर्मेंद्र प्रधान पर मोदी का भरोसा क्यों कायम? - फोटो : social Media

NEET UG Paper Leak:  NEET पेपर लीक विवाद को लेकर विपक्ष के हमले, छात्रों के आंदोलन और सड़क से संसद तक जारी सियासी घमासान के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने NDA संसदीय दल की बैठक मंगल मिलन में दोषियों पर कड़ा शिकंजा कसने की बात कही। लेकिन सियासी गलियारों में सबसे बड़ा सवाल यही गूंज रहा है कि आखिर शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान पर कोई सीधी कार्रवाई क्यों नहीं कर रहे?

विपक्ष लगातार धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग कर रहा है, लेकिन मोदी सरकार ने फिलहाल इस मांग को तवज्जो नहीं दी है। सरकार का रुख साफ है कि वह किसी आंदोलन, प्रदर्शन या राजनीतिक दबाव के आगे झुकने का संदेश नहीं देना चाहती। सत्ता पक्ष का मानना है कि यदि मंत्री का इस्तीफा लिया गया तो विपक्ष इसे सरकार की गलती की कबूलनामा और प्रशासनिक नाकामी की मुहर के तौर पर पेश करेगा।

सियासी जानकारों के मुताबिक, मोदी सरकार की रणनीति डैमेज कंट्रोल के साथ नैरेटिव कंट्रोल करने की है। सरकार यह दिखाना चाहती है कि समस्या सिस्टम में है, जिसे दुरुस्त किया जा रहा है, न कि किसी एक व्यक्ति को हटाकर मामला खत्म किया जा सकता है। यही वजह है कि NEET मामले में जांच एजेंसियों को सक्रिय किया गया, दोबारा परीक्षा कराई गई और NTA में बड़े स्तर पर बदलाव की कवायद शुरू की गई।

धर्मेंद्र प्रधान सिर्फ शिक्षा मंत्री नहीं, बल्कि भाजपा के लंबे समय से भरोसेमंद संगठनकर्ता माने जाते हैं। वह आरएसएस पृष्ठभूमि से जुड़े रहे हैं और संगठन से लेकर सरकार तक उनकी मजबूत पकड़ रही है। ओडिशा में भाजपा के विस्तार और सत्ता तक पहुंचने की रणनीति में भी उनकी अहम भूमिका रही है।1998 में भाजपा से जुड़े धर्मेंद्र प्रधान ने 2000 में पहला चुनाव जीता। 2004 से वह राष्ट्रीय राजनीति में सक्रिय हुए और 2014 में नरेंद्र मोदी सरकार बनने के बाद से लगातार केंद्रीय मंत्रिमंडल का हिस्सा रहे हैं।2016 में प्रधानमंत्री मोदी की महत्वाकांक्षी प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना की जिम्मेदारी भी पेट्रोलियम मंत्री रहते हुए धर्मेंद्र प्रधान ने संभाली थी। इस योजना को भाजपा सरकार की बड़ी राजनीतिक उपलब्धियों में गिना जाता है।भाजपा के रणनीतिकारों का मानना है कि विपक्ष और छात्र संगठनों के आंदोलन के आगे झुककर मंत्री हटाने से गलत संदेश जा सकता है। सरकार यह संकेत नहीं देना चाहती कि सड़क के दबाव से फैसले बदलते हैं।

सियासी इतिहास में मोदी सरकार का रिकॉर्ड भी यही बताता है कि मंत्रियों के इस्तीफे आसानी से नहीं लिए गए। विपक्ष के दबाव के बावजूद कई मौकों पर सरकार ने अपने मंत्रियों का बचाव किया है।हालांकि, चर्चा यह भी है कि आने वाले समय में मंत्रिमंडल या संगठन में फेरबदल हो सकता है। ऐसे में संभावनाएं जताई जा रही हैं कि धर्मेंद्र प्रधान को शिक्षा मंत्रालय से हटाकर कोई दूसरी जिम्मेदारी दी जा सकती है या उन्हें संगठन में बड़ी भूमिका मिल सकती है।

विपक्ष लगातार सरकार पर निशाना साध रहा है। शिवसेना (UBT) नेता प्रियंका चतुर्वेदी ने पीएम मोदी के संबोधन पर सवाल उठाते हुए कहा कि प्रधानमंत्री ने युवाओं की उपलब्धियों का जिक्र किया, लेकिन NEET विवाद से प्रभावित छात्रों की पीड़ा पर बात नहीं की।

फिलहाल सियासत की बिसात पर मोदी सरकार धर्मेंद्र प्रधान के बचाव में खड़ी दिखाई दे रही है। सरकार की रणनीति है कि आंदोलन को राजनीतिक दबाव में बदलने से पहले व्यवस्था सुधार का संदेश मजबूत किया जाए। अब देखना होगा कि आने वाले दिनों में यह रणनीति सरकार के लिए कवच साबित होती है या विपक्ष इसे बड़ा सियासी हथियार बना लेता है।