मणिकर्णिका घाट पर रीडेवलपमेंट कार्रवाई पर भड़के लोग, धार्मिक विरासत को नुकसान पहुंचाने का आरोप

Varanasi Manikarnika Ghat
Varanasi Manikarnika Ghat - फोटो : news4nation

Manikarnika Ghat  : बनारस के प्रसिद्ध मणिकर्णिका घाट पर चल रही तोड़फोड़ और रीडेवलपमेंट की कार्रवाई को लेकर स्थानीय लोगों ने विरोध प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों का आरोप था कि विकास के नाम पर शहर की ऐतिहासिक और धार्मिक विरासत को नुकसान पहुंचाया जा रहा है। हालांकि, जिला प्रशासन ने इन आरोपों को सिरे से खारिज किया है।


मणिकर्णिका घाट हिंदू धर्म के सबसे प्राचीन और पवित्र श्मशान घाटों में से एक माना जाता है। मान्यता है कि यहां अंतिम संस्कार होने से मोक्ष की प्राप्ति होती है। इसी वजह से यह घाट देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं के लिए गहरे धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व रखता है।विरोध प्रदर्शन में मुख्य रूप से पाल समाज समिति के सदस्य और अन्य स्थानीय लोग शामिल रहे। समिति के एक सदस्य महेंद्र पाल ने आरोप लगाया कि रीडेवलपमेंट की आड़ में घाट के मूल स्वरूप के साथ छेड़छाड़ की जा रही है और बनारस की विरासत को खत्म किया जा रहा है।


वहीं जिला प्रशासन का कहना है कि विरोध रीडेवलपमेंट कार्य को लेकर फैली गलतफहमी के कारण हुआ। मौके पर पहुंचे उप-जिलाधिकारी (SDM) आलोक वर्मा ने बताया कि हालात का जायजा लिया गया है और प्रथम दृष्टया ऐसा प्रतीत होता है कि कुछ बाहरी तत्वों के कारण विवाद बढ़ा। उन्होंने कहा कि घाट पर रहने वाले स्थानीय लोग कार्य का विरोध नहीं कर रहे हैं और निर्माण कार्य उनकी मौजूदगी में ही किया जा रहा है। मामले की जांच के लिए एसीपी भी मौके पर मौजूद रहे।


जिला मजिस्ट्रेट सत्येंद्र कुमार ने स्पष्ट किया कि मणिकर्णिका घाट पर चल रहा कार्य विकास योजना के तहत है और किसी भी मंदिर को न तो तोड़ा गया है और न ही कोई नुकसान पहुंचाया गया है। उन्होंने बताया कि पहले चरण में घाट की सीढ़ियों का निर्माण किया जा रहा है। खुदाई के दौरान मिली मूर्तियों और कलाकृतियों को सुरक्षित रख लिया गया है और निर्माण कार्य पूरा होने के बाद उन्हें पुनः स्थापित किया जाएगा। प्रशासन ने भरोसा दिलाया है कि रीडेवलपमेंट के दौरान घाट की धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान को पूरी तरह सुरक्षित रखा जाएगा।