Uttar Pradesh MLC Election: यूपी MLC चुनाव में महासंग्राम! 11 सीटों पर सत्ता की प्रतिष्ठा दांव पर, योगी-अखिलेश की सियासी ताकत की परीक्षा

Uttar Pradesh MLC Election: उत्तर प्रदेश में विधान परिषद की 11 सीटों के लिए मतदान शुरू होते ही सियासी सरगर्मी तेज हो गई है।...

Uttar Pradesh MLC Election
: उत्तर प्रदेश में विधान परिषद की 11 सीटों के लिए मतदान शुरू- फोटो : X

Uttar Pradesh MLC Election: उत्तर प्रदेश में विधान परिषद की 11 सीटों के लिए मतदान शुरू होते ही सियासी सरगर्मी तेज हो गई है। विधानसभा चुनाव से पहले हो रहे इन चुनावों को प्रदेश की राजनीति में बेहद अहम माना जा रहा है। भले ही मुकाबला विधान परिषद की 11 सीटों तक सीमित हो, लेकिन भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और समाजवादी पार्टी (सपा) के लिए इसके राजनीतिक मायने काफी व्यापक हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भाजपा के चुनावी अभियान की कमान संभाली है, जबकि सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव भी पार्टी के पक्ष में माहौल बनाने में जुटे रहे हैं। ऐसे में यह चुनाव दोनों दलों की रणनीति, संगठनात्मक ताकत और राजनीतिक प्रभाव की परीक्षा के रूप में देखा जा रहा है।

11 सीटें, 152 प्रत्याशी और 14.18 लाख मतदाता

उत्तर प्रदेश में खंड स्नातक निर्वाचन क्षेत्र की पांच और खंड शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र की छह सीटों पर मतदान हो रहा है। कुल 14.18 लाख मतदाता 152 प्रत्याशियों के राजनीतिक भविष्य का फैसला करेंगे। चुनाव आयोग ने शांतिपूर्ण और निष्पक्ष मतदान सुनिश्चित करने के लिए 11 प्रेक्षकों की तैनाती की है।खंड स्नातक निर्वाचन क्षेत्र की पांच सीटों में लखनऊ, आगरा, मेरठ, वाराणसी और इलाहाबाद-झांसी शामिल हैं। वहीं, खंड शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र की छह सीटों में लखनऊ, आगरा, मेरठ, वाराणसी, बरेली-मुरादाबाद और गोरखपुर-फैजाबाद शामिल हैं।

योगी ने संभाली भाजपा की कमान, सपा भी मैदान में

इन चुनावों को लेकर भाजपा और सपा के बीच राजनीतिक खींचतान लगातार चर्चा में रही है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भाजपा के प्रचार अभियान में सक्रिय भूमिका निभाई और कई जनसभाओं के जरिए पार्टी के पक्ष में समर्थन जुटाने की कोशिश की। वहीं, भाजपा और सपा की ओर से चुनावी तैयारियों में मंत्रियों, सांसदों और विधायकों की सक्रियता भी देखने को मिली।

राजनीतिक बयानबाजी के बीच सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने अधिकारियों को लेकर कड़ी टिप्पणी की और उन्हें जेल जाने की तैयारी रखने की चेतावनी दी। इस बयान ने चुनावी माहौल में राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप को और तेज कर दिया। हालांकि, मतदान का वास्तविक असर क्या होगा, यह परिणाम सामने आने के बाद ही स्पष्ट होगा।

72 जिलों में मतदान, तीन जिलों में पहले हो चुका है चुनाव

प्रदेश के कुल 75 जिलों में से 72 जिलों में मतदान कराया जा रहा है। कानपुर नगर, कानपुर देहात और उन्नाव में पहले ही चुनाव संपन्न हो चुका है। मतदान व्यवस्था के मद्देनजर संबंधित 72 जिलों में कक्षा 12वीं तक के स्कूल बंद रखे जाने की जानकारी दी गई है।चुनाव आयोग की ओर से मतदान प्रक्रिया को व्यवस्थित रखने और मतदाताओं की पहचान सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक निर्देश जारी किए गए हैं।

पहचान पत्र नहीं है तो इन दस्तावेजों से कर सकेंगे पहचान

जिन मतदाताओं के पास फोटोयुक्त मतदाता पहचान पत्र उपलब्ध नहीं है, उन्हें पहचान सत्यापन के लिए निर्धारित वैकल्पिक दस्तावेजों में से किसी एक का मूल प्रमाण प्रस्तुत करना होगा। इनमें आधार कार्ड, ड्राइविंग लाइसेंस, पासपोर्ट, पैन कार्ड और विश्वविद्यालय द्वारा जारी डिग्री या डिप्लोमा का मूल प्रमाणपत्र शामिल हैं। अन्य मान्य दस्तावेजों का इस्तेमाल भी निर्वाचन आयोग के निर्धारित नियमों के अनुसार किया जा सकता है।

27 अक्टूबर को मतगणना, नतीजों पर टिकी निगाहें

निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार, 27 अक्टूबर को मतगणना होगी और उसी दिन परिणाम घोषित किए जाने हैं। इन चुनावों के नतीजे विधान परिषद में दलों की स्थिति के लिहाज से महत्वपूर्ण होंगे। साथ ही, विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा और सपा के राजनीतिक दावों को लेकर भी चर्चा तेज हो सकती है।फिलहाल, 11 सीटों का यह मुकाबला प्रदेश की सियासत में अहम स्थान रखता है। लेकिन इसे किसी दल की विधानसभा चुनाव में जीत या हार का सीधा संकेत मानना जल्दबाजी होगी। मतदाताओं का फैसला और मतगणना के नतीजे ही इस चुनाव की वास्तविक तस्वीर सामने लाएंगे।