पश्चिम बंगाल की नंदीग्राम और रेजीनगर सीटों पर उपचुनाव की मतगणना शुरू, BJP की प्रतिष्ठा दांव पर
नंदीग्राम और रेजीनगर में मंगलवार को मतदान हुआ था। चुनाव आयोग के आंकड़ों के मुताबिक, नंदीग्राम में 80.89 प्रतिशत और रेजीनगर में 80.08 प्रतिशत मतदाताओं ने अपने मताधिकार का इस्तेमाल किया।
West Bengal Bypoll : पश्चिम बंगाल की नंदीग्राम और रेजीनगर विधानसभा सीटों पर हुए उपचुनाव के लिए शुक्रवार सुबह 8 बजे से मतगणना शुरू हो गई। मई 2026 में राज्य की सत्ता में आने के बाद भारतीय जनता पार्टी (BJP) के लिए यह पहला चुनावी परीक्षण माना जा रहा है। दोनों सीटों पर कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच वोटों की गिनती की जा रही है।
मतगणना केंद्रों पर सबसे पहले पोस्टल बैलेट और इलेक्ट्रॉनिकली ट्रांसमिटेड पोस्टल बैलेट (ETPB) की गिनती शुरू हुई। इसके बाद ईवीएम के वोटों की गणना की जा रही है। दोनों विधानसभा क्षेत्रों में मतगणना के लिए दो-दो हॉल बनाए गए हैं। निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार, कुल 15 राउंड में गिनती पूरी की जानी है। पोस्टल बैलेट और ETPB की गिनती के लिए अलग हॉल निर्धारित किए गए हैं।
दोनों सीटों पर करीब 80 फीसदी मतदान
नंदीग्राम और रेजीनगर में मंगलवार को मतदान हुआ था। चुनाव आयोग के आंकड़ों के मुताबिक, नंदीग्राम में 80.89 प्रतिशत और रेजीनगर में 80.08 प्रतिशत मतदाताओं ने अपने मताधिकार का इस्तेमाल किया। आयोग ने मतदान को मोटे तौर पर शांतिपूर्ण बताया था। हालांकि, विपक्षी दलों ने मतदाताओं को डराने-धमकाने, बूथ स्तर पर अनियमितताओं और अपने मतदान एजेंटों को बूथों से हटाए जाने के आरोप लगाए थे। विपक्ष ने इन शिकायतों के आधार पर दोबारा मतदान कराने की मांग भी की। वहीं, भाजपा ने इन आरोपों को खारिज करते हुए मतदान को शांतिपूर्ण बताया।
रेजीनगर में मतदान के दौरान आम जनता उन्नयन पार्टी (AJUP) के प्रमुख हुमायूं कबीर और पुलिस के बीच टकराव के बाद उनकी गिरफ्तारी भी चर्चा में रही। कबीर के नवदा सीट बरकरार रखने और रेजीनगर सीट छोड़ने के कारण यहां उपचुनाव कराना पड़ा।
भाजपा की सत्ता में आने के बाद पहली चुनावी परीक्षा
पश्चिम बंगाल में 2026 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने 294 में से 207 सीटें जीतकर सरकार बनाई थी। ऐसे में नंदीग्राम और रेजीनगर उपचुनाव के नतीजों से राज्य सरकार की स्थिरता पर कोई सीधा असर नहीं पड़ेगा, लेकिन राजनीतिक रूप से इनकी अहमियत काफी अधिक है।
इन नतीजों पर इसलिए भी नजरें टिकी हैं, क्योंकि राज्य में 15 वर्षों तक सत्ता में रही तृणमूल कांग्रेस (TMC) को हटाकर भाजपा सरकार में आई है। इसके साथ ही तृणमूल कांग्रेस के भीतर गुटबाजी और अन्य राजनीतिक दलों की मौजूदगी के बीच विपक्षी राजनीति की दिशा भी इन चुनावों से स्पष्ट हो सकती है।
नंदीग्राम में भाजपा और विपक्षी दलों के बीच मुकाबला
नंदीग्राम सीट पर मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने 2021 के विधानसभा चुनाव में तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी को हराया था। 2026 के विधानसभा चुनाव में भी उन्होंने यह सीट जीती थी, लेकिन बाद में भवानीपुर सीट अपने पास रखने के कारण नंदीग्राम में उपचुनाव कराना पड़ा।
इस बार भाजपा ने हसीरानी रथ को उम्मीदवार बनाया है। कांग्रेस प्रत्याशी मिलन प्रधान को ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले तृणमूल गुट का समर्थन प्राप्त है, क्योंकि उस गुट के उम्मीदवार ने अपना नाम वापस ले लिया था। वहीं, ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाला प्रतिद्वंद्वी तृणमूल गुट भी चुनाव मैदान में है।
रेजीनगर में बहुकोणीय मुकाबला
रेजीनगर विधानसभा सीट पर भाजपा के सखारव सरकार, ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले तृणमूल गुट के रबीउल आलम चौधरी, दूसरे तृणमूल गुट के सफिउज्जमान शेख, कांग्रेस के मोहम्मद अब्दुल्लाहिल काफ़ी, माकपा के सैयद असद अली और AJUP के उम्मीदवार गुलाम नबी आजाद के बीच मुकाबला है। गुलाम नबी आजाद, पार्टी प्रमुख हुमायूं कबीर के बेटे हैं।
दोनों सीटों के नतीजे पश्चिम बंगाल की राजनीति में भाजपा के प्रभाव और विपक्षी दलों की स्थिति के लिहाज से महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं। अब सभी की निगाहें मतगणना के अंतिम परिणामों पर टिकी हैं।