औरंगाबाद अग्निकांड: पीड़ित परिवारों के बीच पहुँचे जीतन राम मांझी, जमीन बंदोबस्ती और आवास का दिया निर्देश
औरंगाबाद अग्निकांड: केंद्रीय मंत्री जीतनराम मांझी ने पीड़ित परिवारों से मुलाकात कर घटना की जानकारी लिया तथा सभी पीड़ितों को शांति बनाए रखने का अपील भी किया है।
AURANGABAD : औरंगाबाद जिले के सलैया थाना क्षेत्र अंतर्गत पूरन बिगहा गांव में बीते बुधवार को लगी भीषण आग ने भारी तबाही मचाई थी। इस हादसे में 22 महादलित परिवारों के घर जलकर पूरी तरह खाक हो गए, जिससे उनके पास अब सिर छिपाने की जगह भी नहीं बची है। हालांकि, घटना के बाद से ही जिला प्रशासन द्वारा राहत सामग्री और सहायता पहुंचाई जा रही है, लेकिन परिवारों के भविष्य पर अनिश्चितता के बादल मंडरा रहे हैं।
केंद्रीय मंत्री ने किया प्रभावित क्षेत्र का दौरा
अग्निकांड की सूचना मिलते ही भारत सरकार के केंद्रीय मंत्री, 'हम' पार्टी के सुप्रीमो और बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी पूरन बिगहा पहुँचे। उन्होंने सभी पीड़ित परिवारों से मुलाकात कर घटना की विस्तृत जानकारी ली और उन्हें ढांढस बंधाया। मांझी ने पीड़ितों से शांति बनाए रखने की अपील करते हुए वादा किया कि सरकार उन्हें हर संभव सहायता और सरकारी योजनाओं का लाभ सुनिश्चित कराएगी।
DM को निर्देश: 5 डिसमिल जमीन और आवास की व्यवस्था
समीक्षा के दौरान केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी ने औरंगाबाद की जिलाधिकारी (DM) अभिलाषा शर्मा को कड़े निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि पीड़ित परिवारों के लिए 5-5 डिसमिल जमीन का बंदोबस्त किया जाए ताकि उनके स्थायी आवास बनवाए जा सकें। साथ ही, उन्होंने पूरे गांव को बुनियादी भौतिक सुविधाओं (सड़क, बिजली, पानी) से लैस करने का भी निर्देश दिया, ताकि महादलित बस्ती का कायाकल्प हो सके।
रैयती जमीन का पेंच और ग्रामीणों का दावा
दौरे के दौरान एक विवादित मामला भी सामने आया। स्थानीय लोगों का दावा है कि जिस जमीन पर ये परिवार रह रहे हैं, वह सर्वे खतियान में रैयती (निजी) दर्ज है। बताया गया कि जमीन के मालिक ने इसे किसी अन्य को बेच दिया है और खरीदार लगातार जमीन खाली करने का दबाव बना रहा है। वहीं, पीड़ित परिवारों का कहना है कि वे यहाँ दशकों से रह रहे हैं और उनके पास जाने के लिए कोई दूसरी जगह नहीं है। अब प्रशासन के सामने चुनौती है कि वह रैयती जमीन का निपटारा कैसे करती है।
वादा पूरा न होने पर उग्र आंदोलन की चेतावनी
पीड़ित परिवारों ने जीतन राम मांझी के वादों पर भरोसा तो जताया है, लेकिन साथ ही चेतावनी भी दी है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि जिला प्रशासन ने मंत्री के निर्देशों पर तत्काल अमल नहीं किया, तो वे उग्र आंदोलन को विवश होंगे। उन्होंने स्पष्ट किया कि मांगों को लेकर वे फोर-लेन सड़क जाम करेंगे और इसकी जानकारी फोन के माध्यम से सीधे मांझी जी को देंगे। ग्रामीणों ने संकल्प लिया है कि जब तक ठोस निर्णय नहीं होता, उनका संघर्ष जारी रहेगा।
दीनानाथ मौआर की रिपोर्ट