Aurangabad News : मूर्ति विसर्जन में 'डीजे' बजाने को लेकर जमकर हुआ बवाल, दो गुटों में हुई हिंसक झड़प, आधा दर्जन लोग हुए जख्मी
AURANGABAD : बिहार के औरंगाबाद जिले के जम्होर थाना अंतर्गत करहरा गांव में सरस्वती मूर्ति विसर्जन के दौरान शुरू हुआ विवाद एक बड़े संघर्ष में तब्दील हो गया। डीजे पर एक जाति विशेष से संबंधित 'बबुआन' गाना बजाने को लेकर दो गुटों के बीच हिंसक झड़प हुई, जिसमें दोनों पक्षों से आधा दर्जन से अधिक लोग घायल हो गए हैं। इस घटना के बाद गांव में तनाव का माहौल व्याप्त है और पुलिस मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए कार्रवाई में जुट गई है।
घटना के संबंध में मिली जानकारी के अनुसार, विवाद की शुरुआत सरस्वती पूजा के बाद प्रतिमा विसर्जन के दौरान हुई थी। विसर्जन जुलूस में डीजे पर बज रहे एक गाने को लेकर दूसरे पक्ष के लोगों ने कड़ा विरोध जताया और देखते ही देखते लाठी-डंडे निकल आए। हालांकि, उस समय स्थानीय लोगों के हस्तक्षेप से मामला शांत हो गया और प्रतिमा का विसर्जन संपन्न करा लिया गया, लेकिन मनमुटाव खत्म नहीं हुआ।
बीती शाम यह विवाद दोबारा तब भड़क उठा जब एक पक्ष के युवक गांव के स्कूल के पास पीपल के पेड़ के नीचे बैठे थे। घायल सत्यम कुमार के अनुसार, करीब 15 से 20 की संख्या में आए दूसरे पक्ष के लोगों ने उन पर अचानक हमला बोल दिया। इस हमले में सत्यम कुमार, रिशु कुमार और आनंदित कुमार गंभीर रूप से घायल हो गए, जिन्हें इलाज के लिए तत्काल औरंगाबाद सदर अस्पताल में भर्ती कराया गया है।
पीड़ित पक्ष का दावा है कि दूसरे गुट में भी कई लोग घायल हुए हैं, लेकिन वे सदर अस्पताल के बजाय अन्य जगहों पर इलाज करा रहे हैं, जिसके कारण उनकी आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आ सकी है। मारपीट की इस घटना के बाद दोनों पक्षों के बीच कड़वाहट और बढ़ गई है। पुलिस अस्पताल पहुंचकर घायलों के बयान दर्ज कर रही है ताकि घटना की तह तक जाया जा सके।
जम्होर थानाध्यक्ष ने घटना की पुष्टि करते हुए बताया कि करहरा गांव में मारपीट की सूचना मिलते ही पुलिस सक्रिय हो गई थी। दोनों पक्षों की ओर से प्राथमिकी दर्ज करने के लिए आवेदन दिए गए हैं। पुलिस अधिकारी ने स्पष्ट किया कि मामले की गहनता से जांच की जा रही है और सांप्रदायिक या जातिगत सौहार्द बिगाड़ने की कोशिश करने वालों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल गांव में शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस बल की पैनी नजर है।
दीनानाथ मौआर की रिपोर्ट