Bihar Simaria River Front: गंगा में बह गया 115 करोड़! सिमरिया रिवर फ्रंट में दरार- धंसाव ने खोली निर्माण गुणवत्ता की पोल

Bihar Simaria River Front: हरिद्वार की हर की पौड़ी की तर्ज पर विकसित किया गया बेगूसराय का सिमरिया रिवर फ्रंट गंगा का जलस्तर बढ़ते ही सवालों के घेरे में आ गया है।

Simaria River Front Damage
सिमरिया रिवर फ्रंट में दरार-धंसाव - फोटो : reporter

Bihar Simaria River Front: हरिद्वार की हर की पौड़ी की तर्ज पर विकसित किया गया बेगूसराय का सिमरिया रिवर फ्रंट गंगा का जलस्तर बढ़ते ही सवालों के घेरे में आ गया है। करीब 550 मीटर लंबे रिवर फ्रंट की सीढ़ियों और किनारे के कुछ हिस्सों में टूट-फूट व धंसाव की तस्वीरें सामने आने के बाद निर्माण की गुणवत्ता और डिजाइन को लेकर चर्चा तेज हो गई है। स्थानीय लोगों ने पूरे मामले की तकनीकी जांच की मांग उठाई है।

सिमरिया गंगा घाट को आधुनिक और आकर्षक स्वरूप देने के लिए वर्ष 2023 में परियोजना शुरू की गई थी। इसके तहत सीढ़ियों के अलावा चेंजिंग रूम, आरती स्थल, शेड, शौचालय समेत श्रद्धालुओं के लिए कई सुविधाएं विकसित की गईं। उस वक्त घाट को हरिद्वार की हर की पौड़ी से भी बेहतर बनाने का दावा किया गया था।

अब गंगा का जलस्तर बढ़ने के बाद सीढ़ियों और किनारे के हिस्सों में आई क्षति ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। मसलन, क्या निर्माण के दौरान गंगा के जलस्तर में होने वाले मौसमी उतार-चढ़ाव और कटाव को पर्याप्त रूप से ध्यान में रखा गया था? क्या इस्तेमाल की गई निर्माण सामग्री और डिजाइन निर्धारित तकनीकी मानकों के अनुरूप थे? या फिर धंसाव की वजह सामान्य बाढ़ और नदी का कटाव है?

वर्ष 2025 में बिहार विधानसभा में दी गई जानकारी के अनुसार, सिमरिया रिवर फ्रंट परियोजना पर 137.56 करोड़ रुपये खर्च होने की बात सामने आई थी। परियोजना के दूसरे चरण का काम भी प्रस्तावित है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि करोड़ों की परियोजना के क्षतिग्रस्त हिस्सों की विशेषज्ञों से जांच कराई जानी चाहिए। तकनीकी परीक्षण से ही स्पष्ट हो सकेगा कि नुकसान के पीछे जलस्तर में वृद्धि, नदी का कटाव, डिजाइन की खामी या निर्माण गुणवत्ता से जुड़ा कोई कारण है।फिलहाल सिमरिया रिवर फ्रंट की तस्वीरों ने एक बड़ा सवाल जरूर खड़ा कर दिया है—क्या गंगा के बदलते मिजाज के मुताबिक इस परियोजना की इंजीनियरिंग और निर्माण पर्याप्त मजबूत थी?

रिपोर्ट- प्रियदर्शन शर्मा