Bihar Matriculation Exam 2026: ट्रैफिक जाम में मैट्रिक की पहली पाली छूटी, 5 मिनट के लिए बने कसूरवार, गेट पर फूट-फूटकर रोईं छात्राएँ
Bihar Matriculation Exam 2026: बिहार के पश्चिमी चंपारण जिले की बेतिया में ट्रैफिक जाम ने ऐसा ‘कर्फ्यू’ लगाया कि कई छात्राओं का साल भर का ख्वाब गेट पर ही दम तोड़ गया।
Bihar Matriculation Exam 2026: पश्चिम चंपारण जिले के बेतिया में ट्रैफिक जाम ने इस बार सिर्फ रफ्तार नहीं रोकी, बल्कि कई छात्राओं के भविष्य पर भी ‘ब्रेक’ लगा दिया। मैट्रिक परीक्षा की पहली पाली के दिन शहर की सड़कों पर ऐसा भीषण जाम लगा कि दर्जनों छात्राएँ समय पर परीक्षा केंद्र तक नहीं पहुंच सकीं। नतीजा निर्धारित समय के महज 5 मिनट बाद पहुंचने पर उन्हें गेट से ही लौटा दिया गया।मैट्रिक परीक्षा की पहली पाली देने निकली छात्राएँ शहर की सड़कों पर फंसी रहीं, जहां हर मोड़ पर जाम का ‘नाका’ और हर चौराहे पर सिस्टम की नाकामी दिखी। नतीजा परीक्षा केंद्र पहुँचने में महज पाँच मिनट की देरी और जवाब में ‘नो एंट्री’।
यह दिल दहला देने वाला मंजर आमना उर्दू +2 स्कूल स्थित परीक्षा केंद्र पर देखने को मिला, जहां परीक्षा शुरू होने से ठीक पहले छात्राएँ बदहवास हालत में पहुंचीं। गेट बंद मिला, अंदर दाखिले से इनकार हुआ और बाहर आंसुओं का सैलाब उमड़ पड़ा। रोती-बिलखती छात्राएँ सवाल करती रहीं “हमारा कसूर क्या है?”
छात्राओं का कहना है कि घर से समय पर निकली थीं, लेकिन शहर की सड़कों पर ‘जाम का जाल’ बिछा था। चौक-चौराहों पर गाड़ियाँ रेंगती रहीं, सायरन नहीं, कोई वैकल्पिक व्यवस्था नहीं। जब तक जाम से निकलकर केंद्र पहुंचीं, तब तक घड़ी की सुइयों ने फैसला सुना दिया था। पांच मिनट की देरी को ‘अपराध’ मानते हुए उन्हें परीक्षा से बाहर कर दिया गया।
घटना ने प्रशासनिक व्यवस्था और ट्रैफिक प्रबंधन की पोल खोल दी है। अभिभावकों का आरोप है कि परीक्षा जैसे संवेदनशील मौके पर ट्रैफिक कंट्रोल पूरी तरह फेल रहा। “जब जाम का अंदेशा था तो पुलिस-प्रशासन ने वैकल्पिक रूट, विशेष पास या एस्कॉर्ट की व्यवस्था क्यों नहीं की?” यह सवाल हर जुबान पर है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि बेतिया में जाम कोई नई बात नहीं, लेकिन परीक्षा के दिन यह लापरवाही ‘कसाई की धार’ जैसी साबित हुई। भविष्य की उम्मीदें आंखों के सामने टूटती देख छात्राएँ बेसुध हो गईं।अब अभिभावक दोषियों पर सख्त कार्रवाई, विशेष परीक्षा या वैकल्पिक अवसर की मांग कर रहे हैं। सवाल साफ है क्या ट्रैफिक जाम की सजा छात्राओं को मिलेगी, या सिस्टम अपनी नाकामी कबूल करेगा? डिजिटल दौर में यह मामला महज खबर नहीं, व्यवस्था के कटघरे में खड़ा एक बड़ा चार्जशीट है।
रिपोर्ट- आशीष कुमार