Bihar News : वाल्मीकिनगर सांसद सुनील कुमार ने अमित शाह से की मुलाकात, सुस्ता विवाद और भोजपुरी को संवैधानिक दर्जे समेत कई मांगों पर हुई चर्चा

Bihar News : वाल्मीकिनगर सांसद सुनील कुमार ने अमित शाह से की

BAGAHA : पश्चिम चंपारण के वाल्मीकिनगर से जदयू सांसद सुनील कुमार ने बुधवार को देश की राजधानी दिल्ली में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से शिष्टाचार मुलाकात की। इस उच्च स्तरीय बैठक के दौरान सांसद ने अपने संसदीय क्षेत्र की ज्वलंत समस्याओं और लंबे समय से लंबित मांगों को प्रमुखता से गृह मंत्री के समक्ष रखा। सांसद ने बताया कि गृह मंत्री ने सभी विषयों को अत्यंत ध्यानपूर्वक सुना और सकारात्मक कार्रवाई का ठोस आश्वासन दिया है।

मुलाकात के दौरान सांसद सुनील कुमार ने भारत-नेपाल सीमा पर स्थित रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण 'सुस्ता' गांव का मुद्दा उठाया। उन्होंने गृह मंत्री को अवगत कराया कि पश्चिम चंपारण जिले के पास स्थित इस विवादित क्षेत्र पर नेपाल द्वारा अतिक्रमण के प्रयास किए जा रहे हैं। सांसद ने इस सीमा विवाद के स्थायी समाधान और भारतीय क्षेत्र की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की, जिसे गृह मंत्री ने गंभीरता से लिया है।

सांसद की मांगों की सूची में सांस्कृतिक और ऐतिहासिक अस्मिता के मुद्दे भी शीर्ष पर रहे। उन्होंने करोड़ों लोगों की जनभावनाओं का सम्मान करते हुए भोजपुरी भाषा को संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल करने की जोरदार वकालत की। इसके अतिरिक्त, उन्होंने महान मौर्य सम्राट अशोक की जयंती के अवसर पर देश भर में 'राष्ट्रीय अवकाश' घोषित करने की भी मांग रखी, ताकि आने वाली पीढ़ियां महान शासक के योगदान से प्रेरणा ले सकें।

संसदीय क्षेत्र के विकास पर चर्चा करते हुए सुनील कुमार ने वाल्मीकिनगर लोकसभा के अंतर्गत आने वाले दुर्गम 'दोन' क्षेत्र की समस्याओं पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि आदिवासी बहुल इस क्षेत्र में आज भी बुनियादी सुविधाओं का अभाव है, जिसके लिए विशेष पैकेज और ध्यान की आवश्यकता है। साथ ही, उन्होंने बगहा के कैलाश नगर में रेलवे की जमीन पर बसे नदी कटाव पीड़ितों की समस्याओं के स्थायी निदान की ओर भी मंत्री का ध्यान आकृष्ट कराया।

उल्लेखनीय है कि इन समस्याओं को लेकर दोनों क्षेत्रों के जनप्रतिनिधियों और समाजसेवियों का एक संयुक्त प्रतिनिधिमंडल बिहार विधानसभा चुनाव के उपरांत गृह मंत्री से मिला था। उसी कड़ी को आगे बढ़ाते हुए सांसद ने पुनः इन विषयों पर पैरवी की है। यदि इन मांगों पर केंद्र सरकार द्वारा शीघ्र अमल किया जाता है, तो चंपारण के सीमावर्ती क्षेत्रों और आदिवासी समाज के जीवन स्तर में बड़ा बदलाव आने की उम्मीद है। 

आशीष की रिपोर्ट