भागलपुर: भोलानाथ फ्लाईओवर के धीमे निर्माण से जनता त्रस्त, 100 मीटर के लिए 2 KM का चक्कर

भागलपुर के भोलानाथ फ्लाईओवर का धीमा निर्माण 2 लाख लोगों के लिए आफत बन गया है। जलजमाव और बंद रास्तों के कारण 100 मीटर की दूरी के लिए 2 किमी का चक्कर लगाना पड़ रहा है। जानें क्या है वर्तमान स्थिति और स्थानीय लोगों की समस्याएं

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फ्लाईओवर के धीमे निर्माण से जनता त्रस्त- फोटो : news 4 nation

बिहार के भागलपुर के भोलानाथ फ्लाईओवर का निर्माण कार्य पिछले दो वर्षों से चल रहा है, लेकिन इसकी कछुआ गति ने शहर की एक बड़ी आबादी को मुसीबत में डाल दिया है। आलम यह है कि महज 100 मीटर की सीधी दूरी तय करने के लिए लोगों को 2 किलोमीटर का लंबा और घुमावदार चक्कर काटना पड़ रहा है। निर्माण कार्य के कारण मुख्य रास्ते बाधित हैं, जिससे मुंदचक, मिरजानहाट और शीतला स्थान जैसे घनी आबादी वाले इलाकों के लोगों का संपर्क शहर के अन्य हिस्सों से बेहद मुश्किल हो गया है।

3 फीट तक जलजमाव और नारकीय जीवन

फ्लाईओवर निर्माण के कारण रेलवे पुल के नीचे जलनिकासी का सिस्टम पूरी तरह ध्वस्त हो चुका है। रेलवे लाइन के पास के रास्तों पर 3 फीट तक नाले का बदबूदार पानी जमा है। इस गंदे पानी और कीचड़ की वजह से न केवल आवागमन बाधित है, बल्कि आसपास रहने वाले लगभग 2 लाख लोगों का जीवन नारकीय हो गया है। सड़कों पर फैली गंदगी और भीषण जलजमाव के कारण पूरे इलाके में दुर्गंध फैली रहती है, जिससे स्थानीय निवासी अपने ही घरों में कैद होने को मजबूर हैं।

जान जोखिम में डालकर सफर और हादसों का डर

हबीबपुर, कचहरी, तिलकामांझी और मायागंज जाने वाले लोग हर दिन अपनी जान जोखिम में डालकर इस गंदे पानी के बीच से गुजरने को मजबूर हैं। टूटी सड़कों और पानी के भीतर छिपे गड्ढों के कारण आए दिन बाइक सवार गिरकर घायल हो रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि वैकल्पिक रास्ते भी जर्जर हालत में हैं, जिससे दुर्घटनाओं का खतरा चौबीसों घंटे बना रहता है। कीचड़ भरी सड़कों पर सफर करना अब किसी अग्निपरीक्षा से कम नहीं रह गया है।

प्रशासन की बेरुखी और स्वास्थ्य पर मंडराता खतरा

निर्माण कार्य में हो रही देरी और जलजमाव ने अब स्वास्थ्य संबंधी चिंताओं को भी बढ़ा दिया है। रुके हुए गंदे पानी के कारण मच्छरों का प्रकोप बढ़ गया है, जिससे क्षेत्र में संक्रमण और बीमारियां फैलने का डर सता रहा है। स्थानीय लोगों में प्रशासन के खिलाफ गहरा आक्रोश है; उनका कहना है कि बुनियादी सुविधाओं के अभाव और खराब सड़कों ने उनके दैनिक कामकाज और व्यापार को पूरी तरह चौपट कर दिया है। जब तक निर्माण की गति नहीं बढ़ती, तब तक भागलपुर की एक बड़ी आबादी इस "शॉर्टकट" के लंबे फेर में फंसी रहेगी।