इंटर की आंसर शीट बनी दिल की डायरी, परीक्षा की कॉपियों में इम्तिहान कम, इश्क का इजहार ज्यादा, एग्जामिनर से पास करने के लिए अजब गजब गुहार

Bihar Love Story in Student Copy: बिहारमें इन दिनों मैट्रिक और इंटर की कॉपियों का मूल्यांकन पूरे जोर-शोर से चल रहा है। कॉपियों में दिल के जज़्बात, मोहब्बत के किस्से, और उम्मीदों की फरियाद भी ठाठ से लिखी मिल रही है।

Exam Answer Sheets Turn Love Diaries
इंटर की आंसर शीट बनी दिल की डायरी- फोटो : X

Bihar Love Story in Student Copy: बिहारमें इन दिनों मैट्रिक और इंटर की कॉपियों का मूल्यांकन पूरे जोर-शोर से चल रहा है। मगर जनाब, इन कॉपियों में सिर्फ सवालों के जवाब नहीं, बल्कि दिल के जज़्बात, मोहब्बत के किस्से, और उम्मीदों की फरियाद भी ठाठ से लिखी मिल रही है। लगता है जैसे इम्तिहान कम और इज़हार-ए-दिल ज्यादा हो रहा हो।

भागलपुर में  हर रोज करीब 600 से ज्यादा एग्जामिनर हजारों कॉपियों की जांच में मशगूल हैं। लेकिन जब ये कॉपियां खुलती हैं तो कभी “सर प्रणाम” की अर्ज़ी मिलती है, तो कहीं “प्लीज-प्लीज पास करा दीजिए” की गुहार। कोई अपने घर की मजबूरी का किस्सा सुना रहा है, तो कोई मोहब्बत के दर्द का हिसाब लगा रहा है। एग्जामिनर भी कभी हैरत में पड़ जाते हैं और कभी मुस्कुरा देते हैं कि भाई, ये परीक्षा की कॉपी है या दिल का इज़हारनामा!

हिंदी में ‘लाभ’ पर निबंध लिखना था, मगर एक होनहार छात्र ने ऐसा फलसफा पेश किया कि बड़े-बड़े अर्थशास्त्री भी सर खुजला लें। उसने लिखा “हम आम का पेड़ लगाते हैं, वो बड़ा होकर आम देता है, यही लाभ है। कुछ आम सड़ जाएं तो हानि हो जाती है। और अगर 10 में कलम खरीदकर 15 में बेच दें, तो वही असली फायदा है।” अब भला बताइए, इतनी मासूमियत पर नंबर मिलें या तालियां?

उधर हिंदी के एक सवाल में पूछा गया कि “बातचीत से क्या होता है?” जवाब होना चाहिए था कि मन प्रसन्न और चित्त हल्का होता है। मगर एक छात्रा ने दिल का दर्द उंडेल दिया “अब उससे बातचीत नहीं होती, जबकि बहुत जरूरत है, क्योंकि वो कानपुर में रहता है।” साथ-साथ उसने जननायक कर्पूरी ठाकुर की तारीफ भी जोड़ दी। अब एग्जामिनर सोच रहे हैं कि यह उत्तर है या प्रेम-पत्र!

एक छात्रा ने तो बाकायदा गुहार लिख डाली “मैंने जो आता था लिख दिया है। सबसे पहले आपको प्रणाम। अगर नंबर कम आए तो घर वाले आगे नहीं पढ़ाएंगे, इसलिए प्लीज-प्लीज पास कर दीजिए मेरे क्यूट मेम और गुड सर।”

और साहब, एक छात्र ने तो कमाल ही कर दिया। चित्रपट की लोकप्रियता पर लता मंगेशकर का जिक्र होना था, लेकिन उसने गयासुद्दीन तुगलक, मिथिला विजय, राजा हरि सिंह और भगत सिंह तक की पूरी दास्तान लिख डाली।

हालांकि नियम सख्त हैं नंबर सिर्फ सही जवाबों पर मिलेंगे, जज़्बातों पर नहीं। मगर इतना तो तय है कि इन कॉपियों ने एग्जामिनरों को यह जरूर याद दिला दिया कि किताबों के सवालों से ज्यादा दिल के सवाल बड़े होते हैं। अब बस फर्क इतना है कि इम्तिहान में अफसाने नहीं, जवाब चाहिए जनाब!