ढोल-नगाड़ों की थाप पर विदा होंगी माँ सरस्वती, खरीक के युवाओं ने पेश की सांस्कृतिक एकता की मिसाल

खरीक बाजार में 'महारानी' के दर्शन को उमड़ा जनसैलाब! साह च्वाइस क्लब द्वारा स्थापित माँ सरस्वती की भव्य प्रतिमा बनी आकर्षण का केंद्र। भक्ति गीतों और जयकारों से गूंजा पूरा इलाका।

ढोल-नगाड़ों की थाप पर विदा होंगी माँ सरस्वती, खरीक के युवाओं

Bhagalpur - भागलपुर जिले के खरीक बाजार में इन दिनों आस्था का अनूठा संगम देखने को मिल रहा है। 'साह च्वाइस क्लब' के तत्वावधान में कार्तिक स्थान पर स्थापित माँ सरस्वती की विशाल और भव्य प्रतिमा (खरीक की महारानी) ने श्रद्धालुओं का मन मोह लिया है। दर्शन के लिए न केवल स्थानीय बल्कि दूर-दराज के क्षेत्रों से भी हजारों लोग पहुंच रहे हैं, जिससे पूरे बाजार क्षेत्र में उत्सव जैसा माहौल बना हुआ है। 

जयकारों से गूंजा आकाश, विसर्जन की तैयारियां शुरू

पूजा पंडाल से लेकर पूरे रास्ते तक वातावरण ढोल-नगाड़ों और माँ के जयकारों से गुंजायमान है। श्रद्धालु भक्ति गीतों पर झूमते नजर आ रहे हैं। माँ सरस्वती की इस अलौकिक प्रतिमा का विसर्जन जुलूस बेहद भव्य होने वाला है, जो चैती दुर्गा मंदिर और बड़ी काली मंदिर से होते हुए विश्वकर्मा चौक पहुंचेगा और अंत में कलबलिया धार में प्रतिमा विसर्जित की जाएगी। 

प्रशासनिक सतर्कता और सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम

भीड़ को देखते हुए स्थानीय प्रशासन और पुलिस पूरी तरह मुस्तैद है। विसर्जन मार्ग पर सुरक्षा और यातायात व्यवस्था के लिए विशेष इंतजाम किए गए हैं ताकि श्रद्धालुओं को किसी परेशानी का सामना न करना पड़े। पुलिस बल की तैनाती के साथ-साथ वीडियोग्राफी के जरिए भी जुलूस की निगरानी की योजना है। 

युवाओं की टोली ने आयोजन को बनाया भव्य

इस सफल और अनुशासित आयोजन के पीछे युवाओं की टीम का बड़ा हाथ है। आयोजन को भव्य रूप देने में परशुराम कुमार, सोनू कुमार, सौरभ सुमन, अंकित कुमार, रवि कुमार एवं साहिल कुमार जैसे सक्रिय सदस्यों की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। स्थानीय बुजुर्गों ने युवाओं के इस प्रयास की सराहना करते हुए इसे सांस्कृतिक विरासत को संजोने वाला कदम बताया है। 

सामाजिक एकता का प्रतीक बना महोत्सव

खरीक बाजार का यह आयोजन केवल धार्मिक अनुष्ठान तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह सामाजिक एकता का भी प्रतीक बन गया है। विभिन्न समुदायों के लोग इस उत्सव में शामिल होकर भाईचारे का संदेश दे रहे हैं। विसर्जन जुलूस के दौरान जगह-जगह स्वागत और सेवा शिविरों की भी तैयारी की गई है।