Bihar Police: मौत के मुहाने से वापसी, विक्रमशिला सेतु पर गंगा में छलांग से पहले बिहार पुलिस ने बचाई जान, मासूम को सीने से लगाकर जवान ने खुदकुशी से रोक दिया

Bihar Police: भागलपुर में विक्रमशिला सेतु उस वक्त सनसनी का गवाह बना, जब एक महिला अपने मासूम बच्चे के साथ गंगा की अथाह धाराओं में कूदकर ज़िंदगी खत्म करने की तैयारी में खड़ी थी।..

Pulled Back from Death Bihar Police Save Child at Vikramshil
मौत के मुहाने से वापसी- फोटो : reporter

Bihar Police: भागलपुर में विक्रमशिला सेतु उस वक्त सनसनी का गवाह बना, जब एक महिला अपने मासूम बच्चे के साथ गंगा की अथाह धाराओं में कूदकर ज़िंदगी खत्म करने की तैयारी में खड़ी थी। चेहरे पर मायूसी, आंखों में बेबसी और कदमों में हिचक मौत और जीवन के बीच बस एक पल का फासला था। लेकिन किस्मत को कुछ और मंज़ूर था। ठीक उसी वक्त डायल 112 की गाड़ी वहां से गुज़री और एक बड़ा हादसा टल गया।

बताया जा रहा है कि भागलपुर से नवगछिया की ओर गश्त पर निकले डायल 112 के सब इंस्पेक्टर सिकंदर पासवान की नजर पुल की रेलिंग के पास खड़ी महिला पर पड़ी। शक गहराया तो गाड़ी रोकी गई। पास जाकर देखा गया तो महिला मासूम बच्चे को गोद में लिए कांप रही थी और गंगा की ओर झुक रही थी। हालात की नज़ाकत समझते ही सिकंदर पासवान ने बिना देरी किए बच्चे को अपने सीने से लगा लिया मानो मौत के हाथ से ज़िंदगी छीन ली हो।

इसके बाद पुल पर एक भावुक और दिल दहला देने वाला मंजर बना। हाथ जोड़कर, टूटती आवाज़ में जवान ने महिला से इल्तिजा की “ज़िंदगी से हार मत मानो, मुश्किलें आती हैं, मगर लड़कर निकला जाता है।” उस पल कानून नहीं, इंसानियत बोल रही थी। कुछ ही देर में महिला की आंखों से आंसू बहने लगे और उसने आत्मघाती कदम से पीछे हटने का फैसला किया।

घटना की जानकारी मिलते ही स्थानीय पुलिस भी मौके पर पहुंची। महिला को सुरक्षित हिरासत में लेकर काउंसलिंग की व्यवस्था की गई, ताकि उसके भीतर जमा दर्द और दबाव की तह तक पहुंचा जा सके। शुरुआती बातचीत में सामने आया कि घरेलू और आर्थिक परेशानियों ने उसे इस कगार तक पहुंचा दिया था। हालांकि पुलिस पूरे मामले की तफ्तीश कर रही है।

इस पूरी घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। लोग डायल 112 के जवान की जांबाजी और संवेदनशीलता की जमकर तारीफ कर रहे हैं। विक्रमशिला सेतु, जो अक्सर हादसों और खुदकुशी की खबरों में आता रहा है, आज वहां उम्मीद की एक नई कहानी लिखी गई।

यह घटना बताती है कि वर्दी सिर्फ कानून का डर नहीं, बल्कि ज़रूरत पड़ने पर रहमत और राहत भी बन सकती है। एक सही वक्त पर लिया गया फैसला, एक मासूम की जिंदगी और एक मां की सांसें बचा सकता है।

रिपोर्ट - अंजनी कुमार कश्यप