Bihar News : बक्सर में ट्रैफिक नियमों पर सख्ती के बीच DTO के आदेश पर उठे सवाल, क्या नियम ताक पर रखकर होगी जाँच?
Bihar News : बक्सर में ट्रैफिक नियमों के सख्ती के बीच DTO के आदेश पर सवाल खड़े हो गए हैं. सवाल है की नियमों को ताक पर रखकर वाहनों की जांच होगी.....पढ़िए आगे
BUXAR : जिले में यातायात व्यवस्था को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से जिला परिवहन पदाधिकारी (DTO) राज कुमार प्रसाद ने एक नया संशोधित आदेश जारी किया है। इस आदेश के तहत 13 फरवरी से 28 फरवरी 2026 तक शहर के विभिन्न चौक-चौराहों पर हेलमेट और सीट बेल्ट की सघन जाँच के लिए विशेष अभियान चलाया जाएगा। इसके लिए प्रशासन ने महिला प्रवर्तन अवर निरीक्षकों की तैनाती की है, जिनमें सत्यवंती कुमारी (ज्योति चौक), अनुपमा कुमारी (गोलम्बर), शालिनी कुमारी (मठिया मोड़) और नेहा कुमारी (सिंडिकेट) शामिल हैं।
ट्रैफिक नियमों के साथ-साथ जिले में ओवरलोडिंग वाहनों के खिलाफ भी मोर्चा खोला गया है। पिछले एक माह में NH-922 और वीर कुँवर सिंह सेतु पर ओवरलोडिंग वाहनों के बढ़ते दबाव और शहर में लगने वाले जाम को देखते हुए परिवहन चेकपोस्ट और गोलम्बर पर विशेष निगरानी का निर्णय लिया गया है। इसके लिए चलन्त दस्ता सिपाहियों को रात 8 बजे से सुबह 4 बजे तक दो अलग-अलग पालियों में तैनात किया गया है, जिन्हें मोटरयान निरीक्षकों के साथ समन्वय कर कार्रवाई करने का निर्देश है।
प्रशासनिक स्तर पर पारदर्शिता के लिए सभी अधिकारियों को प्रतिदिन शाम 5:00 बजे तक व्हाट्सएप ग्रुप पर रिपोर्ट भेजने का निर्देश दिया गया है। हालाँकि, DTO के इन आदेशों ने अब कानूनी विवाद को जन्म दे दिया है। सवाल उठाया जा रहा है कि आदेश के अनुसार अब BMS (चलन्त दस्ता सिपाही) वाहनों की ओवरलोडिंग की जाँच करेंगे, जबकि ESI (प्रवर्तन अवर निरीक्षक) केवल दुपहिया वाहनों के हेलमेट की जाँच करेंगे।
परिवहन विभाग के इस फैसले पर 'मोटरयान अधिनियम' (MV Act) के हवाले से गंभीर सवालिया निशान खड़े किए गए हैं। नियम के अनुसार, बिना डबल स्टार (सब-इंस्पेक्टर रैंक से नीचे) का कोई भी अधिकारी ओवरलोडिंग जैसे मामलों की जाँच करने के लिए अधिकृत नहीं है। ऐसे में सिपाहियों (BMS) को ओवरलोडिंग की जाँच का जिम्मा सौंपना सीधे तौर पर कानूनी प्रोटोकॉल का उल्लंघन माना जा रहा है।
इसके अतिरिक्त, मोटरयान अधिनियम यह भी स्पष्ट करता है कि कोई भी व्यक्ति सिविल ड्रेस (सादे कपड़ों) में वाहनों की चेकिंग नहीं कर सकता है। स्थानीय स्तर पर उठ रहे इन सवालों ने जिला परिवहन पदाधिकारी के आदेश की वैधानिकता पर चर्चा छेड़ दी है। अब देखना यह होगा कि विभाग इन कानूनी अड़चनों के बीच सड़क सुरक्षा और जाम से मुक्ति दिलाने के अपने लक्ष्य को कैसे हासिल करता है।
धीरज की रिपोर्ट