DTO कार्यालय में शराब बरामदगी पर बवाल, पूर्व विधायक ने पुलिस और सरकार को घेरा

Bihar News : बक्सर में सरकारी दफ्तर से शराब मिलने के बाद मामला गरम हो गया है। बक्सर सदर के पूर्व विधायक संजय कुमार तिवारी ने सीधे तौर पर पुलिस प्रशासन की कार्यशैली और राज्य में लागू शराबबंदी कानून की निष्पक्षता पर सवाल खड़े किए है...

DTO कार्यालय में शराब बरामदगी पर बवाल, पूर्व विधायक ने पुलिस
DTO कार्यालय में शराब बरामदगी पर पूर्व विधायक मुन्ना तिवारी ने पुलिस को घेरा- फोटो : संदीप वर्मा

Buxar : बक्सर जिला परिवहन कार्यालय (DTO) परिसर से भारी मात्रा में शराब की खाली और भरी बोतलों की बरामदगी का मामला अब तूल पकड़ता जा रहा है। बक्सर सदर के पूर्व विधायक संजय कुमार तिवारी उर्फ मुन्ना तिवारी ने शुक्रवार को एक प्रेस वार्ता आयोजित कर इस मुद्दे को राजनीतिक और कानूनी रूप से गरमा दिया है। उन्होंने सीधे तौर पर पुलिस प्रशासन की कार्यशैली और राज्य में लागू शराबबंदी कानून की निष्पक्षता पर सवाल खड़े किए हैं। पूर्व विधायक ने आरोप लगाया कि सरकारी दफ्तरों में शराब का मिलना मुख्यमंत्री की 'जीरो टॉलरेंस' नीति पर करारा प्रहार है।


प्रेस वार्ता के दौरान ही मुन्ना तिवारी ने बक्सर पुलिस अधीक्षक (SP) को फोन कर इस मामले में हुई कार्रवाई की प्रगति जाननी चाही। जब उन्होंने एफआईआर की कॉपी मांगी, तो एसपी की ओर से "ऑनलाइन चेक कर लीजिए" जैसा रूखा जवाब मिला। इसके बाद जब विधायक ने साक्ष्यों की सुरक्षा के लिए संबंधित कमरे को अब तक सील नहीं किए जाने पर सवाल उठाया, तो एसपी का कहना था कि "ऐसा कोई प्रावधान नहीं है।" इस बयान ने राजनीतिक गलियारों में खलबली मचा दी है, क्योंकि आम जनता के लिए कानून के प्रावधान काफी सख्त माने जाते हैं।


मुन्ना तिवारी ने तीखा हमला बोलते हुए कहा कि बिहार में शराबबंदी कानून का दोहरा चेहरा सामने आ रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि यदि किसी आम नागरिक के घर या दुकान से शराब बरामद होती, तो प्रशासन तत्काल गिरफ्तारी और संपत्ति की सीलिंग कर देता, लेकिन सरकारी कार्यालय में शराब मिलने के बावजूद नरमी बरती जा रही है। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या सरकारी कार्यालयों और अधिकारियों के लिए कानून की किताबें अलग हैं? उनके अनुसार, इस मामले में एफआईआर सार्वजनिक करने में देरी और सीसीटीवी फुटेज को कब्जे में न लेना मामले की लीपापोती की कोशिश की ओर इशारा करता है।


पूर्व विधायक ने आशंका जताई कि जिस कमरे से शराब बरामद हुई है, उसे सील न करने से साक्ष्यों के साथ छेड़छाड़ की जा सकती है। उन्होंने इस पूरे प्रकरण को लेकर मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी को  एक पत्र भी लिखा है, जिसमें पूरे मामले की उच्चस्तरीय और निष्पक्ष जांच की मांग की गई है। पत्र में उन्होंने स्पष्ट किया है कि सरकारी दफ्तर में शराब की बरामदगी केवल एक विभागीय लापरवाही नहीं, बल्कि शराबबंदी कानून की खुली अवहेलना है। उन्होंने मांग की है कि जांच में दोषी पाए जाने वाले अधिकारियों एवं कर्मियों पर ऐसी कार्रवाई हो जो मिसाल बने।


बक्सर DTO कार्यालय के इस मामले ने जिले की राजनीति में उबाल ला दिया है। विपक्ष इसे शराबबंदी कानून की "चयनात्मक कार्रवाई" करार दे रहा है, जहां रसूखदारों और सरकारी विभागों को छूट मिलने का आरोप है। अब सबकी नजरें सरकार के अगले कदम पर टिकी हैं कि क्या मुख्यमंत्री अपनी सबसे बड़ी सामाजिक मुहिम की विश्वसनीयता बचाने के लिए कड़े फैसले लेते हैं या नहीं। फिलहाल, पुलिस प्रशासन जांच जारी होने की बात कह रहा है, लेकिन पारदर्शिता के अभाव में सवाल और गहराते जा रहे हैं।


संदीप वर्मा की रिपोर्ट