LNMU के कर्मचारियों ने खोला मोर्चा: 15 अप्रैल तक काली पट्टी बांधकर करेंगे विरोध, 17 को विवि मुख्यालय पर 'हल्ला बोल'
दरभंगा के LNMU में शिक्षकेतर कर्मचारियों ने लंबित मांगों को लेकर 15 अप्रैल तक काली पट्टी बांधकर विरोध शुरू कर दिया है। मांगें पूरी न होने पर 17 अप्रैल को विवि मुख्यालय का घेराव किया जाएगा।
Darbhanga - : ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय (LNMU) के अंगीभूत कॉलेजों में कार्यरत शिक्षकेतर कर्मचारियों ने अपनी लंबित मांगों को लेकर विश्वविद्यालय प्रशासन के खिलाफ आर-पार की जंग का ऐलान कर दिया है। बुधवार, 10 अप्रैल से कर्मचारियों का चरणबद्ध आंदोलन शुरू हो गया है। आंदोलन के पहले दिन कर्मचारियों ने बांह पर काली पट्टी बांधकर काम किया और प्रशासन की उदासीनता के प्रति अपना आक्रोश व्यक्त किया।
प्रशासन के टालमटोल रवैये से कर्मचारियों में भारी आक्रोश
कर्मचारी संघ के जिला महामंत्री हर्षवर्धन कुमार सिंह ने बताया कि विश्वविद्यालय प्रशासन पिछले काफी समय से कर्मचारियों की जायज मांगों पर टालमटोल कर रहा है। बार-बार आश्वासन मिलने के बाद भी समस्याओं का समाधान नहीं होने से कर्मचारियों का धैर्य जवाब दे गया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जब तक उनकी 15 सूत्री मांगें, जिनमें प्रमोशन प्राप्त कर्मियों का भत्ता और अन्य वित्तीय लाभ शामिल हैं, पूरी नहीं होतीं, यह आंदोलन थमेगा नहीं।
'पोल खोल हल्ला बोल' से बढ़ेगी आंदोलन की तपिश
आंदोलन की रूपरेखा साझा करते हुए कर्मचारियों ने बताया कि 15 अप्रैल तक सभी कॉलेजों में काली पट्टी बांधकर विरोध जताया जाएगा। इसके बाद 17 अप्रैल को आंदोलन का दूसरा और अधिक आक्रामक चरण शुरू होगा, जिसमें विश्वविद्यालय मुख्यालय पर "पोल खोल हल्ला बोल" कार्यक्रम के तहत बड़ा प्रदर्शन किया जाएगा। कर्मचारियों का कहना है कि प्रशासन की कुंभकर्णी नींद तोड़ने के लिए अब सड़कों पर उतरना ही एकमात्र रास्ता बचा है।
मई में 'कलमबंद हड़ताल' और अनिश्चितकालीन प्रदर्शन की चेतावनी
यदि 17 अप्रैल के प्रदर्शन के बाद भी प्रशासन नहीं चेता, तो संघ ने तीसरे चरण में 6 और 7 मई को कॉलेजों में पूर्ण रूप से 'कलमबंद हड़ताल' करने का निर्णय लिया है। इसके बावजूद मांगें नहीं मानी गईं, तो 20 मई को विश्वविद्यालय मुख्यालय पर विशाल आक्रोश प्रदर्शन किया जाएगा और उसी दिन से अनिश्चितकालीन हड़ताल की तिथि घोषित कर दी जाएगी।
प्राचार्य ने भी माना—जायज हैं कर्मचारियों की मांगें
कुमार सिंह कॉलेज के प्राचार्य शंभू कुमार यादव ने भी कर्मचारियों के आंदोलन पर अपनी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि कर्मचारियों के पत्र के माध्यम से जानकारी मिली है कि वे काली पट्टी बांधकर कार्य कर रहे हैं। प्राचार्य ने माना कि विश्वविद्यालय को कर्मचारियों की मांगों पर जल्द और सकारात्मक संज्ञान लेना चाहिए ताकि शैक्षणिक और प्रशासनिक कार्य बाधित न हों। उन्होंने उम्मीद जताई कि आंदोलन उग्र होने से पहले ही विवि प्रशासन कोई ठोस समाधान निकाल लेगा।
आंदोलन की मुख्य मांगें और रणनीतियां
आंदोलन में शामिल अनुपम कुमार झा ने बताया कि प्रमोशन प्राप्त कर्मियों के भत्ते का भुगतान उनकी प्रमुख मांगों में से एक है। इसके अलावा 15 अन्य मांगों को लेकर भी संघ अड़ा हुआ है। आंदोलन को सफल बनाने के लिए जिले के सभी अंगीभूत कॉलेजों के शिक्षकेतर कर्मचारी एकजुट हो गए हैं, जिससे विश्वविद्यालय की कामकाज व्यवस्था पर बड़ा असर पड़ने की संभावना है।
प्रशासनिक कार्यों पर पड़ सकता है व्यापक असर
फिलहाल कर्मचारी काली पट्टी बांधकर काम कर रहे हैं, जिससे कॉलेज का कामकाज पूरी तरह ठप तो नहीं हुआ है, लेकिन कर्मचारियों का मानसिक विरोध स्पष्ट दिख रहा है। यदि यह विरोध कलमबंद हड़ताल में बदलता है, तो परीक्षा फॉर्म भरने, नामांकन प्रक्रिया और अन्य कार्यालयी कार्यों में छात्रों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है।
Report - varun thakur