दरभंगा के लिए बड़ी खबर: रैयाम चीनी मिल शुरू करने की कवायद तेज, डीपीआर तैयार करने का आदेश जारी
दरभंगा की रैयाम सहकारी चीनी मिल को दोबारा शुरू करने के लिए बिहार सरकार ने डीपीआर तैयार करने का आदेश दिया है। जानें सात निश्चय-3 के तहत कैसे होगा इस मिल का कायाकल्प।
Darbhanga - बिहार सरकार के 'सात निश्चय-3' के 'समृद्ध उद्योग-सशक्त बिहार' अभियान के अंतर्गत दरभंगा जिले की बंद पड़ी रैयाम सहकारी चीनी मिल को पुनर्जीवित करने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। सहकारिता विभाग ने इस दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए मिल की स्थापना के लिए विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) तैयार करने का कार्यादेश (Work Order) जारी कर दिया है। इस फैसले से मिथिलांचल के किसानों और स्थानीय युवाओं में रोजगार की नई उम्मीद जगी है।
राष्ट्रीय सहकारी शक्कर कारखाना संघ के साथ हुआ समझौता
रैयाम चीनी मिल की स्थापना को लेकर राज्य सरकार के सहकारिता विभाग और 'राष्ट्रीय सहकारी शक्कर कारखाना संघ लिमिटेड' (NFCSF), नई दिल्ली के बीच 23 फरवरी 2026 को एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए थे। इसी समझौते के आलोक में संघ ने मिल की स्थापना के लिए एक 'संभाव्यता प्रतिवेदन' (Feasibility Report) तैयार कर विभाग को सौंपा था, जिसे अब सरकार ने आधिकारिक अनुमोदन प्रदान कर दिया है।
तकनीकी और वित्तीय पहलुओं का होगा गहरा आकलन
जारी किए गए कार्यादेश के अनुसार, NFCSF अब रैयाम परियोजना की डीपीआर तैयार करेगा। इस रिपोर्ट में चीनी मिल की स्थापना से जुड़े तकनीकी, वित्तीय, वाणिज्यिक और क्रियान्वयन संबंधी सभी महत्वपूर्ण पहलुओं का बारीकी से आकलन किया जाएगा। इसी रिपोर्ट के आधार पर तय होगा कि मिल की क्षमता क्या होगी और इसे धरातल पर उतारने के लिए कितना निवेश और समय लगेगा।
सकरी चीनी मिल के लिए भी उम्मीदें बरकरार
रैयाम के साथ-साथ सकरी चीनी मिल को लेकर भी सकारात्मक संकेत मिले हैं। सहकारिता विभाग ने स्पष्ट किया है कि जैसे ही सकरी चीनी मिल के लिए संभाव्यता प्रतिवेदन प्राप्त होगा, वहां भी डीपीआर तैयार करने का कार्यादेश तत्काल प्रभाव से निर्गत कर दिया जाएगा। सरकार का लक्ष्य इन बंद पड़ी इकाइयों को सहकारी मॉडल पर चलाकर राज्य में चीनी उत्पादन को बढ़ावा देना है।
किसानों की आय और औद्योगिक विकास पर जोर
चीनी मिल शुरू होने से दरभंगा और आसपास के जिलों के गन्ना किसानों को उनकी फसल का उचित दाम मिलेगा और बिचौलियों पर निर्भरता खत्म होगी। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह परियोजना समय पर पूरी होती है, तो यह उत्तर बिहार के औद्योगिक परिदृश्य को बदलने में मील का पत्थर साबित होगी।