Bihar News : गया के अजय यादव ने रचा इतिहास, पहले रिक्शा चलाया, फिर सेना में की नौकरी, अब पावरलिफ्टिंग चैंपियनशिप में जीता स्वर्ण पदक

Bihar News : गया के अजय यादव ने रचा इतिहास, पहले रिक्शा चलाय

GAYA : पहले रिक्शा चालक. फिर भारतीय सेना में सिपाही और अब लगातार इंटरनेशनल पावरलिफ्टिंग चैंपियन. सफलता की यह बड़ी गाथा गया के अजय यादव ने लिखी है. अजय यादव ने छात्र जीवन में रिक्शा चलाए. काफी मेहनत कर भारतीय सेना में सिपाही बने. पिछली बार वियतनाम में आयोजित पावरलिफ्टिंग चैंपियनशिप में 82 किलोग्राम भार वर्ग में 260 किलो भार उठाकर स्वर्ण पदक जीता था. वियतनाम में यह स्वर्ण पदक जुलाई 2025 में जीता था और अब उन्होंने इस बार रूस में आयोजित पावरलिफ्टिंग वर्ल्ड चैंपियनशिप में कई देशों को हराकर शानदार प्रदर्शन करते हुए 83 किलोग्राम भार वर्ग में 265 किलो भार उठाकर स्वर्ण पदक जीता है.

तीन दर्जन देश को हराकर जीता स्वर्ण पदक, बने चैंपियन

गया जी के सुदूरवर्ती फतेहपुर प्रखंड के बथान गांव के रहने वाले अजय यादव एक बार फिर चैंपियन बने हैं. अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पावर लिफ्टिंग में अपनी जबरदस्त प्रतिभा दिखाते हुए अजय यादव ने स्वर्ण पदक हासिल कर लिया. इससे पहले वियतनाम में उन्होंने शानदार प्रदर्शन करते हुए पावरलिफ्टिंग में स्वर्ण पदक जीता था. इस बार रूस में फिर से धमाल मचाते हुए कई देशों को पछाङकर चैंपियन बने हैं. अजय यादव ने रूस में हुए फाइनल में ईरान को पराजित कर स्वर्ण पदक हासिल किया.

अजय यादव का संघर्ष रहा सफर

इंटरनेशनल स्तर पर आज अजय यादव पावरलिफ्टिंग के बूते फेमस हो रहे हैं. किंतु उनकी पिछली जिंदगी पर गौर करें, तो वह काफी संघर्षशील रही है. इतनी संघर्षशील कि उस पर ही जीत पाना काफी मुश्किल होता है. किंतु अजय यादव ने हर मुश्किलों को मात देकर अपने आगे के सफर को आसान बनाया और आज पावरलिफ्टिंग क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय नाम हैं. एकदम से साधारण से परिवार से रहे अजय यादव के पिता रामबालक प्रसाद बैलगाड़ी चलाते थे. उनके परिवार की स्थिति काफी दयनीय थी. घर चलाना काफी मुश्किल था. पैसे के कारण अजय की शिक्षा भी प्रभावित हो रही थी. किसी तरह से सरकारी स्कूल में उनकी पढ़ाई पूरी हुई. इस क्रम में छात्र जीवन में अजय यादव को रिक्शा तक चलानी पड़ी, मजदूरी भी की. इस क्रम में उन्होंने संघर्ष के बीच सेना में जान जाने की तैयारी की और फिर आखिरकार 2010 में उनका चयन भारतीय सेना में हुआ. भारतीय सेना में उनका चयन होने के बाद घर की आर्थिक स्थिति बदली. अजय यादव अपने बथान गांव से सटे झारखंड के कोडरमा के झुमरी तिलैया जो कि पर्यटन स्थल भी है, वहां जाकर छात्र जीवन के दौरान रिक्शा चलाया करते थे और अपने घर स्थिति को मजबूती प्रदान करते थे.

ऐसे मिली पावरलिफ्टिंग की राह

अजय यादव सेना में गए. उनकी शुरुआती पोस्टिंग असम में हुई. अजय फिटनेस के लिए काफी मेहनत करते थे. उनके ट्रेनर ने उनकी क्षमता देखकर पावरणलिफ्टिंग के क्षेत्र में मेहनत करने को कहा. पावरलिफ्टिंग के क्षेत्र में उन्होंने मेहनत शुरू की, तो सफलता मिलनी शुरू हो गई. 2016 से पावरलिफ्टिंग में कई तरह की सफलताएं मिली. इस क्रम में अजय यादव ने 2025 में जुलाई महीने में वियतनाम में आयोजित पावरलिफ्टिंग चैंपियनशिप में भाग लिया और 82 किलोग्राम भार वर्ग में 260 किलोग्राम भार उठाकर स्वर्ण पदक जीता. इस चैंपियनशिप में 40 से अधिक देशों के खिलाड़ियों ने भाग लिया. इस चैंपियनशिप का हर मैच नॉकआउट का था. वियतनाम के में हुए चैंपियनशिप में पावरलिफ्टिंग में स्वर्ण पदक हासिल किया. फिलहाल अजय यादव जम्मू कश्मीर में पोस्टेड हैं.

रूस में पावरलिफ्टिंग वर्ल्ड चैंपियनशिप के बने चैंपियन 

वही, अब गया जी के फतेहपुर के अजय ने रूस में आयोजित पावरलिफ्टिंग वर्ल्ड चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक जीता है. इस चैंपियनशिप में 83 किलोग्राम भार वर्ग में 265 किलो भार उठाकर स्वर्ण पदक जीता. फाइनल मुकाबले में उनके सामने ईरान था. ईरान को हराकर अजय ने जीत का परचम लहराया और अपने देश का मान बढ़ाया. पिछले 6 महीने के भीतर अजय ने लगातार दूसरा स्वर्ण पदक जीता है. वही, अजय की जीत की जानकारी के बाद उनके फतेहपुर के बथान गांव में काफी खुशी का माहौल है. बता दें, कि रूस में चार से 7 दिसंबर तक यह चैंपियनशिप चला. अजय ने जबरदस्त प्रतिभा दिखाई और शानदार प्रदर्शन करते हुए फाइनल में जगह बना ली. फाइनल मुकाबले में भारत और ईरान आए. अजय ने 83 किलोग्राम भार वर्ग में 265 किलो किलो भार उठाकर स्वर्ण पदक जीत लिया. इस तरह एक बार फिर से अजय यादव ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का नाम उंचा किया है. अपने देश के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पावरलिफ्टिंग में स्वर्ण पदक जीतना बड़ी बात है. पिछली बार वियतनाम में उन्होंने स्वर्ण पदक जीता था. इस बार रूस में पावरलिफ्टिंग के फाइनल में जीतकर स्वर्ण पदक जीता है. मेरा सपना है, कि मैं देश के लिए इसी तरह से लगातार जीतता रहूं.

गया से मनोज की रिपोर्ट