Bihar News : फल्गु की कायाकल्प को लेकर स्थानीय लोगों ने की पहल, श्रमदान से होगी नदी की सफाई, चैती छठ से शुरू होगा अभियान

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GAYAJI : विश्व प्रसिद्ध अंतः सलिला और मोक्षदायिनी फल्गु नदी की निर्मलता को अक्षुण्ण बनाए रखने के लिए स्थानीय नागरिकों ने एक ऐतिहासिक पहल की है। 'श्रमदान से फल्गु स्वच्छ बनाओ अभियान' के तहत आगामी 24 मार्च 2026 को लोक आस्था के महापर्व चैती छठ के शुभ अवसर पर इस स्वच्छता अभियान का औपचारिक शुभारंभ किया जाएगा। अभियान के संयोजक प्रो. विजय कुमार मिट्ठू सहित अन्य प्रमुख सदस्यों ने निर्णय लिया है कि नदी के पूर्वी छोर (सलेमपुर से अलीपुर) और पश्चिमी छोर (केंदुई से कंडी) के निवासी मिलकर इस पवित्र कार्य को अंजाम देंगे।

नदी की वर्तमान स्थिति पर चिंता व्यक्त करते हुए प्रो. मिट्ठू और अध्यक्ष महंथ बावन भगवान ने बताया कि फल्गु के उद्गम स्थल से गयाजी शहर तक कई बांधों के निर्माण, अनियंत्रित बालू खनन, नालियों का गंदा पानी गिरने और कचरा डंप किए जाने से नदी का अस्तित्व खतरे में है। पहले की तरह पानी का प्राकृतिक प्रवाह (सोई) न चलने के कारण आबादी वाले क्षेत्रों में झाड़ियां और गंदगी का अंबार लग गया है, जिससे नदी की स्वच्छता पूरी तरह तार-तार हो चुकी है।

इस मुहिम को निरंतर बनाए रखने के लिए आयोजकों ने एक व्यावहारिक योजना तैयार की है। इसके तहत केवल एक दिन की सफाई के बजाय सालों भर प्रत्येक रविवार को छुट्टी के दिन एक से दो घंटे का अनिवार्य श्रमदान करने का संकल्प लिया गया है। अभियान के सदस्यों का मानना है कि यदि स्थानीय लोग नियमित रूप से थोड़ा समय निकालें, तो विश्व प्रसिद्ध इस पौराणिक नदी को सदा के लिए स्वच्छ और सुंदर रखा जा सकता है।

अभियान के विस्तार हेतु गयाजी के दोनों छोरों पर व्यापक जन-जागरण चलाया जाएगा। पश्चिमी तट के विष्णुपद, देव घाट, केंदुई, और रामशीला घाट से लेकर पूर्वी तट के भदेजा, सलेमपुर, पटवा टोली और अलीपुर जैसे दर्जनों मोहल्लों के निवासियों को इस आंदोलन से जोड़ा जा रहा है। महासचिव बैजू प्रसाद और अन्य गणमान्य सदस्यों ने अपील की है कि "श्रमदान महादान" के मंत्र को आत्मसात कर हर नागरिक अपने-अपने मुहल्ले के सामने नदी की सफाई का बीड़ा उठाए।

अंत में, अभियान समिति ने समस्त गयावासियों से नम्र निवेदन किया है कि चैती छठ के पावन दिन वे स्वयं नदी में उतरकर सफाई कार्य का शुभारंभ करें। स्वच्छ फल्गु और स्वच्छ गयाजी के सपने को साकार करने के लिए यह आह्वान किया गया है कि लोग केवल दर्शक न बनें, बल्कि इस पुनीत कार्य में भागीदार बनें। समिति के सदस्यों ने विश्वास जताया है कि सामुदायिक सहयोग से फल्गु एक बार फिर अपने प्राचीन और निर्मल रूप में दिखाई देगी।