Bihar Hospital News: 37 करोड़ के मॉडल अस्पताल की पहली बारिश में खुली पोल, फॉल्स सीलिंग उखड़ी, पाइपलाइन से फूटा पानी, निर्माण में हुआ है गड़बड़झाला!
Bihar Hospital News: गोपालगंज में करोड़ों रुपये की लागत से तैयार किए गए मॉडल सदर अस्पताल की मजबूती पहली ही तेज आंधी और बारिश में सवालों के कठघरे में खड़ी हो गई।
Bihar Hospital News: गोपालगंज में करोड़ों रुपये की लागत से तैयार किए गए मॉडल सदर अस्पताल की मजबूती पहली ही तेज आंधी और बारिश में सवालों के कठघरे में खड़ी हो गई। करीब 37 करोड़ रुपये की लागत से बने इस अस्पताल में सोमवार को आई तेज बारिश और आंधी के बाद जो तस्वीरें सामने आईं, उन्होंने निर्माण कार्य की गुणवत्ता, निगरानी व्यवस्था और सरकारी परियोजनाओं की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अस्पताल के मुख्य प्रवेश द्वार की फॉल्स सीलिंग कई जगहों से उखड़ गई और उसके हिस्से नीचे लटकने लगे, जबकि फायर फाइटिंग सिस्टम की पाइपलाइन से तेज़ी से पानी का रिसाव शुरू हो गया।
गनीमत यह रही कि जिस वक्त यह घटना हुई, उस समय प्रवेश द्वार के नीचे कोई मरीज, उसके परिजन या अस्पताल कर्मी मौजूद नहीं था। वरना यह लापरवाही किसी बड़े हादसे का सबब बन सकती थी। अस्पताल में अचानक मची अफरा-तफरी के बीच लोगों ने पूरे घटनाक्रम का वीडियो और तस्वीरें सोशल मीडिया पर साझा कीं, जिसके बाद मामला चर्चा का विषय बन गया।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि जिस अस्पताल को आधुनिक स्वास्थ्य सुविधाओं और मजबूत बुनियादी ढांचे का प्रतीक बताया गया था, उसकी हालत पहली ही तेज बारिश में क्यों बिगड़ गई? मुख्य गेट की फॉल्स सीलिंग का उखड़ना और सुरक्षा के लिए लगाए गए फायर फाइटिंग सिस्टम का खुद ही पानी उगलना, निर्माण कार्य में संभावित खामियों और कथित गड़बड़झाले की ओर इशारा कर रहा है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि भवन का यह हाल अभी से है, तो आने वाले दिनों में मरीजों और स्वास्थ्यकर्मियों की सुरक्षा पर बड़ा खतरा मंडरा सकता है। लोगों का आरोप है कि करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद निर्माण की गुणवत्ता अपेक्षित स्तर की नहीं दिख रही है। ऐसे में यह जानना जरूरी है कि निर्माण कार्य के दौरान गुणवत्ता की निगरानी किस स्तर पर हुई और क्या तय मानकों का पूरी तरह पालन किया गया था।
घटना के बाद लोगों ने पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच की मांग तेज कर दी है। नागरिकों का कहना है कि यदि जांच में निर्माण कार्य में लापरवाही, अनियमितता या किसी प्रकार की मिलीभगत सामने आती है तो संबंधित निर्माण एजेंसी और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जानी चाहिए। साथ ही पूरे अस्पताल भवन का सुरक्षा ऑडिट कराकर सभी तकनीकी खामियों को तत्काल दूर किया जाए, ताकि भविष्य में किसी बड़े हादसे से बचा जा सके।फिलहाल इस घटना में किसी के घायल होने की सूचना नहीं है, लेकिन इसने सरकारी निर्माण कार्यों की गुणवत्ता पर गंभीर बहस छेड़ दी है। अब सबकी निगाहें प्रशासन और संबंधित विभाग पर टिकी हैं कि वह इस मामले की निष्पक्ष जांच कर सच्चाई सामने लाता है या फिर यह मामला भी फाइलों में दफ्न होकर रह जाएगा।
रिपोर्ट-नमो नारायण मिश्रा