गोपालगंज में बाढ़ पर बोले शिक्षा मंत्री : गंडक नदी में कई वर्षों की तुलना में इस बार रहा सर्वाधिक जलस्तर, राहत कार्यों में प्रशासन कार्य सराहनिए

गोपालगंज में बाढ़ पर बोले शिक्षा मंत्री : गंडक नदी में कई वर
गोपालगंज में बाढ़ पर बोले शिक्षा मंत्री- फोटो : नमो नारायण मिश्रा

Gopalganj : गांधी जयंती के मौके पर बिहार के शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी शुक्रवार को गोपालगंज पहुंचे, जहां उन्होंने जिले में बाढ़ की स्थिति पर बयान देते हुए बताया कि इस बार गंडक नदी में पानी का बहाव बेहद तीव्र रहा। नेपाल के जलग्रहण क्षेत्रों में हुई भारी बारिश के कारण गंडक नदी का जलस्तर वर्ष 2003, 2017, 2022 और 2024 के रिकॉर्ड को भी पार कर गया, जिससे जिले के निचले हिस्सों पर भारी दबाव बन गया।


सारण तटबंध की सुरक्षा के लिए रात-दिन जुटा रहा प्रशासन और स्थानीय समुदाय

शिक्षा मंत्री ने जानकारी दी कि सारण तटबंध का लगभग 73 किलोमीटर लंबा हिस्सा गोपालगंज जिले में पड़ता है, जिसमें से करीब 40 किलोमीटर का बड़ा भाग अकेले बैकुंठपुर क्षेत्र के अंतर्गत आता है। गंडक के उफान से बैकुंठपुर की आधा दर्जन से अधिक पंचायतें सीधे प्रभावित हुईं, लेकिन स्थानीय निवासियों की एकजुटता और प्रशासनिक सतर्कता से तटबंधों को सुरक्षित रखा जा सका।


डीएम-एसपी समेत वरीय अधिकारियों ने प्रभावित क्षेत्रों में डाला डेरा

बाढ़ की विभीषिका से निपटने के लिए जिला प्रशासन के त्वरित कदमों की तारीफ करते हुए शिक्षा मंत्री ने बताया कि डीएम, एसपी, एसडीओ और एसडीपीओ सहित तमाम बड़े अधिकारी लगातार मौके पर कैंप करते रहे। सदर विधायक सुभाष सिंह और बरौली विधायक मनजीत सिंह ने स्थानीय जनप्रतिनिधियों के साथ मिलकर प्रशासनिक टीमों का सहयोग किया ताकि किसी भी सूरत में तटबंधों पर टूटने का खतरा पैदा न हो।


पीड़ितों के लिए कम्युनिटी किचन और बुनियादी सुविधाओं की मुकम्मल व्यवस्था

प्रभावित क्षेत्रों में चलाए जा रहे राहत अभियानों का जिक्र करते हुए मिथिलेश तिवारी ने कहा कि बाढ़ पीड़ितों के लिए तुरंत कम्युनिटी किचन (सामुदायिक रसोई) की शुरुआत की गई। इसके साथ ही प्रभावित टोलों और शरण स्थलों पर पर्याप्त रोशनी, शुद्ध पेयजल और अन्य आवश्यक सामग्रियों की निरंतर आपूर्ति सुनिश्चित की गई ताकि आम जनमानस को कठिनाइयों का सामना न करना पड़े।


'नदी के साथ जीना सीखें': मंत्री ने आपदा से निपटने के लिए दिया सतर्कता का संदेश

शिक्षा मंत्री ने कहा कि गंडक नदी जहां एक ओर विपदा लाती है, वहीं पूरे क्षेत्र के लिए एक प्राकृतिक वरदान भी है। इसलिए तटीय इलाकों के लोगों को सतर्कता और मजबूती के साथ नदी के प्रवाह को समझते हुए जीवन जीना होगा। उन्होंने जिला प्रशासन की मुस्तैदी और दूरदर्शिता की सराहना करते हुए आश्वस्त किया कि अंतिम प्रभावित व्यक्ति तक राहत सहायता पहुँचाने का कार्य लगातार जारी रहेगा।


नमो नारायण मिश्रा की रिपोर्ट