Bihar EOU Action:शराब जब्ती और फर्जी नीलामी मामले में दारोगा गिरफ्तार,ऑपरेटर और किरानी पहले ही जा चुके हैं जेल

शराब जब्ती के बाद फर्जीवाड़े के जरिए गाड़ी की नीलामी करने के मामले में तत्कालीन अनुसंधानकर्ता दारोगा राजेन्द्र राम गिरफ्तार। इससे पहले ऑपरेटर और किरानी भी हो चुके हैं गिरफ्तार। हाईकोर्ट के आदेश पर आर्थिक अपराध इकाई (EOU) की लगातार बड़ी कार्रवाई।

EOU arrests SI in Gopalganj vehicle auction case
गोपालगंज स्कॉर्पियो नीलामी घोटाले में EOU का ताबड़तोड़ एक्शन तत्कालीन IO SI राजेन्द्र राम गिरफ्तार - फोटो : news 4 nation AI

बिहार में आर्थिक अपराध इकाई (EOU) का ताबड़तोड़ एक्शन लगातार जारी है। गोपालगंज जिले में शराब जब्ती के बाद स्कॉर्पियो की पहचान छिपाने और फर्जीवाड़े के जरिए उसे नीलाम करने के मामले में EOU ने तत्कालीन अनुसंधानकर्ता दारोगा राजेन्द्र राम को गिरफ्तार कर लिया है। गिरफ्तारी के बाद आरोपी दारोगा को न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है, जिससे इस चर्चित नीलामी घोटाले में पुलिस महकमे के भीतर हड़कंप मच गया है।   


शराब जब्ती के बाद कागजों में हेरफेर और फर्जी रजिस्ट्रेशन का खेल

यह पूरा मामला 19 जून 2020 का है, जब गोपालगंज के सिधवलिया थाना पुलिस ने 340 लीटर अवैध शराब के साथ एक स्कॉर्पियो वाहन को जब्त किया था। जांच के दौरान कागजों में इस जब्त गाड़ी का रजिस्ट्रेशन नंबर BR06PD9070 दर्ज किया गया था। हालांकि, जब गाड़ी के वास्तविक इंजन नंबर और चेसिस नंबर की जांच की गई, तो उसका असली और सही नंबर JH01CJ7840 पाया गया था। 


हाईकोर्ट पहुंचे पीड़ित वाहन मालिक, फर्जी नीलामी का फुटा भांडा

इस पूरे फर्जीवाड़े का खुलासा तब हुआ जब गाड़ी के असल मालिक राधेश्याम सिंह ने पटना हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। उन्होंने याचिका दायर कर गंभीर आरोप लगाया कि उनकी झारखंड से चोरी हुई स्कॉर्पियो (JH01CJ7840) को पुलिस और संबंधित अधिकारियों ने जानबूझकर गलत नंबर (BR06PD9070) दर्शाया और नियमों को ताक पर रखकर नीलाम कर दिया। इस कारनामे के कारण वाहन मालिक को अपना पक्ष रखने या गाड़ी वापस पाने का कोई मौका तक नहीं दिया गया।  


पटना हाईकोर्ट के कड़े आदेश के बाद EOU ने दर्ज की FIR

मामले की गंभीरता को देखते हुए पटना हाईकोर्ट ने 4 नवंबर 2025 को कड़ा आदेश जारी किया, जिसके आलोक में आर्थिक अपराध थाना में औपचारिक प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू की गई। EOU की तफ्तीश में सामने आया कि सरकारी प्रक्रिया का खुलेआम उल्लंघन कर कागजात में हेरफेर किया गया था, ताकि वाहन को औने-पौने दामों में नीलाम किया जा सके।  


ऑपरेटर और किरानी के बाद अब दारोगा पर कसा शिकंजा

जांच को आगे बढ़ाते हुए EOU ने इस घोटाले में शामिल ऑपरेटर और किरानी को पहले ही गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। अब मामले में अनुसंधानकर्ता की लापरवाही, साक्ष्यों को छिपाने और फर्जी दस्तावेज (कूटरचना) तैयार करने के आरोप में दारोगा राजेन्द्र राम को भी गिरफ्तार कर लिया गया है। EOU की इस सख्त कार्रवाई से साफ है कि सरकारी तंत्र का दुरुपयोग करने वाले किसी भी अधिकारी को बख्शा नहीं जाएगा। 

धीरज पराशर की रिपोर्ट