दिव्यांगों का हक अधर में: 2022 से गोदाम में धूल फांक रही हैं दर्जनों नई ट्राई साइकिलें, सांसद ने दिए जांच के आदेश
Gopalganj : केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी 'एडिप' (ADIP) योजना के तहत दिव्यांगजनों को आत्मनिर्भर बनाने और उनके आवागमन को सुगम करने के उद्देश्य से खरीदी गई 23 नई ट्राई साइकिलें पिछले कई वर्षों से विभागीय लापरवाही की भेंट चढ़ी हुई हैं। यह चौंकाने वाला मामला गोपालगंज के सदर प्रखंड कार्यालय का है, जहां वर्ष 2022 से ही सभागार की ऊपरी मंजिल पर ये नई ट्राई साइकिलें वितरण के अभाव में पड़ी-पड़ी जंग खा रही हैं।
विभागीय उदासीनता के कारण नहीं हो सका वितरण
बताया जाता है कि वर्ष 2022 में आयोजित एक वितरण कार्यक्रम के दौरान कुछ चिन्हित लाभार्थी किन्हीं कारणों से मौके पर नहीं पहुंच सके थे। इसके बाद बची हुई इन ट्राई साइकिलों को सुरक्षित रखने के नाम पर ब्लॉक परिसर के एक कमरे में बंद कर दिया गया। लेकिन बेहद खेदजनक बात यह है कि उसके बाद विभागीय अधिकारियों ने इन बची हुई ट्राई साइकिलों को दोबारा जरूरतमंदों तक पहुंचाने की दिशा में कोई ठोस पहल नहीं की। नतीजा यह हुआ कि लाखों रुपये की सरकारी संपत्ति वर्षों से कबाड़ में तब्दील हो रही है।
सांसद डॉ. आलोक कुमार सुमन ने जताई कड़ी नाराजगी
इस गंभीर मामले की जानकारी मिलने पर स्थानीय सांसद डॉ. आलोक कुमार सुमन ने कड़ी नाराजगी व्यक्त की है। सांसद ने बताया कि अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने अब तक चार बार बड़े पैमाने पर दिव्यांगजनों के बीच ट्राई साइकिल और अन्य सहायक उपकरणों का वितरण कराया है। उन्होंने कहा कि हाल ही में उन्हें सूचना मिली कि पूर्व के वितरण कार्यक्रमों से बची हुई कई ट्राई साइकिलें गोपालगंज और फुलवरिया प्रखंड कार्यालयों में वर्षों से लावारिस हालत में पड़ी हैं और खराब हो चुकी हैं।
दोषी अधिकारियों पर होगी सख्त कार्रवाई, डीएम करेंगे जांच
सांसद डॉ. आलोक कुमार सुमन ने इस पूरे मामले को भारत सरकार के धन की खुली बर्बादी और दिव्यांग लाभार्थियों के अधिकारों का हनन बताया है। उन्होंने कहा कि इस घोर लापरवाही की जिला पदाधिकारी (डीएम) के स्तर से गहन जांच कराई जाएगी। जांच में जो भी सरकारी अधिकारी या कर्मचारी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ सख्त दंडात्मक कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
कब मिलेगा दिव्यांगों को उनका हक?
सदर प्रखंड कार्यालय में बंद इन गाड़ियों की सुध लेने वाला कोई नहीं है, जबकि जिले में आज भी सैकड़ों ऐसे जरूरतमंद दिव्यांग हैं जो एक-एक ट्राई साइकिल के लिए कलेक्ट्रेट और प्रखंड कार्यालयों के चक्कर काट रहे हैं। अब देखना बेहद दिलचस्प होगा कि माननीय सांसद के कड़े रुख और प्रशासनिक जांच के बाद जिम्मेदार अधिकारियों पर क्या गाज गिरती है और वर्षों से जंग खा रही ये ट्राई साइकिलें आखिर कब तक असली हकदारों तक पहुंच पाती हैं।
नमो नारायण मिश्रा की रिपोर्ट