Bihar News: मुझे मम्मी पापा से मतलब नहीं...प्रेमी के साथ भागी प्रेमिका ने मंदिर में रचाई शादी, वीडियो जारी कर मांगी मदद
Bihar News: एक बार फिर प्रेमी जोड़े अपने घर से फरार हो गए और मंदिर में शादी रचा ली। जिसके बाद वीडियो जारी कर कहा कि मुझे मम्मी पापा से मतलब नहीं है...पढ़िए आगे...

Bihar News: बिहार के जमुई जिले से एक प्रेम कहानी सुर्खियों में है। जहां प्यार के लिए एक प्रेमी युगल ने समाज की बेड़ियों को तोड़ते हुए मंदिर में शादी रचा ली। परिवार की रजामंदी न मिलने पर प्रेमी-प्रेमिका ने घर से भागकर शादी कर ली और इसका वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो में लड़की कह रही है कि वो अपनी मर्जी से भागी है और उसको किसी से मतलब नहीं है। अपने पापा मम्मी से भी मतलब नहीं है।
मंदिर में रचाई शादी
दरअसल, मामला जमुई जिले के गिद्धौर प्रखंड अंतर्गत रतनपुर गांव का है। यहां के रहने वाले मंटू साह के पुत्र विपिन कुमार साह (21) ने अपनी प्रेमिका सहनसा कुमारी से घर से भाग कर शादी कर ली है। सहनसा हरनारायणपुर के चौरा गांव निवासी अशोक यादव की पुत्री हैं। दोनों ने मंदिर में अंतरजातीय विवाह किया। जिसका परिवार ने विरोध किया था। परिजनों की असहमति और जातिगत भेदभाव से परेशान होकर दोनों ने मंदिर में सात फेरे लिए और एक-दूसरे को जीवन साथी बना लिया। शादी के दौरान का वीडियो अब सोशल मीडिया पर वायरल हो चुका है। जिसमें देखा जा सकता है कि विपिन अपनी प्रेमिका की मांग में सिंदूर भर रहे हैं।
समाज के खिलाफ उठाया कदम
बताया जा रहा है कि विपिन और सहनसा काफी लंबे समय से प्रेम-प्रसंग में थे लेकिन उनके परिजन इस रिश्ते के खिलाफ थे। जातिगत भेदभाव के चलते परिवार शादी के लिए तैयार नहीं हुआ। जिससे तंग आकर प्रेमी युगल ने घर से भागकर मंदिर में शादी कर ली। वायरल वीडियो में दोनों ने साफ तौर पर कहा कि उन्होंने अपनी मर्जी से शादी की है और इसमें परिजनों की कोई भूमिका नहीं है। अब इस साहसिक प्रेम विवाह की चर्चा पूरे इलाके में हो रही है और सोशल मीडिया पर भी लोग अपनी-अपनी प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं।
सोशल मीडिया पर मिल रही प्रतिक्रियाएं
वीडियो पर लोगों की प्रतिक्रियाएं मिलीजुली हैं। कई लोग जहां इस कदम को साहसी और प्रेम की सच्ची मिसाल बता रहे हैं। वहीं कुछ लोग सामाजिक मान्यताओं के उल्लंघन को लेकर सवाल भी उठा रहे हैं। लेकिन प्रेमी युगल के इस फैसले ने एक बार फिर यह दिखा दिया है कि जब बात सच्चे प्यार की हो तो समाज की दीवारें भी कमजोर पड़ जाती हैं। यह घटना एक बार फिर साबित करती है कि इश्क न जात देखता है, न धर्म, और जब दिलों का मेल हो, तो राहें खुद-ब-खुद बन जाती हैं।