कैमूर के लाल ने IIT क्रैक कर जिला और परिवार का बढ़ाया मान, इंजीनियर बन भगवती बदलेगा जलई बाग गांव का इतिहास और परिवार का हालात
कैमूर जिले के सुदूरवर्ती जलई बाग गांव के रहने वाले भगवती कुमार उर्फ गोलू ने आईआईटी (IIT) में चयन पाकर इतिहास रच दिया है। आजादी के बाद से आज तक इस गांव से कोई भी व्यक्ति इंजीनियर नहीं बन सका था....
Kaimoor : "कौन कहता है आसमां में सुराख हो नहीं सकता, एक पत्थर तो तबीयत से उछालो यारों..."। इस प्रसिद्ध कहावत को पूरी तरह चरितार्थ कर दिखाया है कैमूर जिले के अत्यंत सुदूर इलाके में बसे भगवानपुर थाना क्षेत्र के जलई बाग गांव के रहने वाले युवक भगवती कुमार उर्फ गोलू ने। भगवती ने देश की सबसे कठिन परीक्षाओं में से एक आईआईटी (IIT) में चयन पाकर न सिर्फ अपने परिवार का मान बढ़ाया है, बल्कि अपने पूरे गांव का इतिहास बदल दिया है। आजादी के बाद से आज तक इस सुदूरवर्ती गांव से कोई भी व्यक्ति इंजीनियर नहीं बन सका था। भगवती के पहले इंजीनियर बनने की सूचना मिलते ही पूरे गांव में जश्न और खुशी का माहौल है। गांव पहुंचने पर महिलाओं ने आरती उतारी, तिलक लगाया, मिठाई खिलाई और पारंपरिक मांगलिक गीत गाकर इस होनहार लाल का ऐतिहासिक स्वागत किया।
बेटे को इंजिनिय बनाने के लिए पिता दो साल से बेंगलुरु में कर रहे मजदूरी
भगवती कुमार की इस ऐतिहासिक सफलता के पीछे उसके पूरे परिवार का ऐसा त्याग है, जिसे सुन हर किसी की आंखें नम हो जा रही हैं। भगवती के पिता बुटन राम बेंगलुरु की एक प्राइवेट कंपनी में काम करते हैं। बेटे को देश के सबसे बड़े संस्थान में पढ़ाने का खर्च जुटाने के लिए वे पिछले दो साल से घर तक नहीं लौटे और दिन-रात खून-पसीना बहाकर पैसे घर भेजते रहे। जब पिता की कमाई भी कम पड़ने लगी, तो माँ मीना देवी ने जीविका समूह (महिला स्वयं सहायता समूह) से 1.5 लाख रुपये का लोन लिया और बेटे की कोचिंग की फीस भरने के लिए कोटा (राजस्थान) भेजा। माँ आज भी पाई-पाई जोड़कर उस लोन का सूद (ब्याज) भर रही हैं।
बहन श्रीदेवी ने भाई के लिए कुर्बान कर दिया अपना 'मेडिकल' का सपना
इस कामयाबी की सबसे भावुक कर देने वाली कड़ी भगवती की बड़ी बहन श्रीदेवी हैं। श्रीदेवी खुद एक होनहार छात्रा हैं और पटना में रहकर मेडिकल (डॉक्टर बनने) की तैयारी कर रही थीं। लेकिन, घर की भीषण गरीबी और तंगहाली के बीच जब छोटे भाई की पढ़ाई पैसे की कमी के कारण छूटने लगी, तो बहन ने एक पल की भी देरी नहीं की। श्रीदेवी ने भाई के सपने को टूटने से बचाने के लिए खुद की मेडिकल की तैयारी बीच में ही छोड़ दी और पटना से घर लौट आईं, ताकि पूरा परिवार सारा पैसा और ध्यान भगवती को इंजीनियर बनाने में लगा सके। बहन का यह बलिदान आखिरकार रंग लाया और भाई आज आईआईटीयन बन गया।
दादा-दादी की आंखों में आए खुशी के आंसू, बोले- "अब हमारा पोता मिटाएगा घर की गरीबी"
भगवती के आईआईटी में चयन की खबर सुनते ही घर में बुजुर्ग दादा शिव मूरत और दादी लाली देवी की आंखों से खुशी के आंसू छलक पड़े। उन्होंने भावुक होते हुए बताया कि घर में भगवती को सब प्यार से 'गोलू' बुलाते हैं। दादा-दादी ने कहा, "हमारे बेटा-बहू (माता-पिता) ने गोलू को पढ़ाने के लिए दिन-रात एक कर दिया था। आज जब वह पूरे गांव का पहला इंजीनियर बन गया है, तो हमें पूरा भरोसा है कि हमारा पोता अब हमारे घर की इस सदियों पुरानी गरीबी को हमेशा के लिए मिटा देगा।"
सुदूर गांव में न स्कूल, न आंगनबाड़ी; घर के बिगड़े पंखे ठीक करते-करते आया इंजीनियर बनने का सपना
जलई बाग गांव की स्थिति आज भी ऐसी है कि यहाँ न तो कोई स्कूल है और न ही आंगनबाड़ी केंद्र। भगवती ने दूसरे गांव में जाकर अपनी प्रारंभिक शिक्षा पूरी की और फिर जिला मुख्यालय (भभुआ) से आईएससी (इंटरमीडिएट) की परीक्षा पास की। इसके बाद वे तैयारी के लिए पटना और फिर कोटा गए। भगवती ने अपनी प्रेरणा के बारे में बताया कि उन्हें बचपन से ही घर में रखे बिगड़े हुए पंखे और बिजली के सामानों को सुधारने व बनाने का अनोखा शौक था। इसी खेल-खेल वाले शौक से उनके मन में इंजीनियर बनने का सपना जागा। भगवती कहते हैं, "मेरा बचपन का सपना आज आईआईटी में चयन के साथ पूरा हो गया है, अब देश और अपने माता-पिता के संघर्षों का नाम रोशन करना ही मेरा एकमात्र लक्ष्य है।"
देवव्रत की रिपोर्ट