Bihar News : कैमूर पुलिस ने अवैध वसूली रैकेट का किया भंडाफोड़, 4 पुलिसकर्मियों सहित 9 को किया गिरफ्तार, मचा हड़कंप
Bihar News : कैमूर पुलिस ने मोहनिया में अवैध वसूली का भंडाफोड़ किया है. इस मामले में पुलिस ने चार पुलिसकर्मियों समेत नौ लोगों को गिरफ्तार किया है......पढ़िए आगे
KAIMUR : बिहार के कैमूर जिले के मोहनिया अनुमंडल से एक बड़ी खबर सामने आ रही है, जहाँ राष्ट्रीय राजमार्ग 19 (NH-19) पर परिवहन विभाग के वाहन जांच केंद्र के पास चल रहे अवैध वसूली के एक बड़े रैकेट का पर्दाफाश हुआ है। अनुमंडल कार्यालय मोहनिया में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान मोहनिया एसडीपीओ गोपाल कृष्णा ने इस पूरे मामले की आधिकारिक जानकारी दी। उन्होंने बताया कि पुलिस ने इस सिंडिकेट के खिलाफ एक बड़ी और सफल कार्रवाई की है।

एसडीपीओ गोपाल कृष्णा ने बताया कि पुलिस को काफी समय से इस इलाके में ट्रकों से अवैध रूप से पैसे वसूले जाने की गुप्त सूचना मिल रही थी। इस सूचना के आधार पर पुलिस अधीक्षक के निर्देशानुसार एक विशेष छापेमारी दल का गठन किया गया। इस विशेष टीम का नेतृत्व डीएसपी ट्रैफिक द्वारा किया गया। टीम ने पूरी योजना के साथ NH-19 पर स्थित परिवहन विभाग के जांच केंद्र के पास बनी दो संदिग्ध झोपड़ियों पर अचानक धावा बोल दिया।

पुलिस की इस त्वरित और औचक छापेमारी के दौरान मौके पर हड़कंप मच गया। टीम ने ट्रकों को रोककर अवैध वसूली करते हुए कुल 9 लोगों को रंगे हाथ गिरफ्तार कर लिया। चौंकाने वाली बात यह है कि गिरफ्तार आरोपियों में बिहार विशेष सशस्त्र पुलिस (BSAP) के 4 जवान शामिल हैं, जिनकी मिलीभगत से यह पूरा खेल चल रहा था। इन जवानों के साथ ही पुलिस ने मौके से अवैध वसूली में सहयोग करने वाले 5 आम नागरिकों को भी दबोच लिया।

पूछताछ के दौरान इस रैकेट के काम करने के तरीके का भी बड़ा खुलासा हुआ है। एसडीपीओ ने बताया कि गिरफ्तार सिविलियन इन पुलिस जवानों के इशारे पर ही सड़कों पर ट्रॉली लगाने और हटाने का काम करते थे, ताकि ट्रकों को रोककर उनसे मोटी रकम वसूली जा सके। पकड़े गए नागरिकों ने कुबूल किया कि वे महीने में करीब 20 से 25 दिन इसी अवैध धंधे में संलिप्त रहते थे और इसके बदले उन्हें प्रतिदिन ₹300 की मजदूरी दी जाती थी।

पुलिस ने इस सफल छापेमारी के दौरान घटनास्थल से कुल ₹57,760 की नकद राशि और 9 मोबाइल फोन जब्त किए हैं। गिरफ्तार आरोपियों से जब पुलिस ने बरामद रुपयों और वसूली के संबंध में कड़ाई से पूछताछ की, तो वे कोई भी संतोषजनक जवाब या वैध कागजात पेश नहीं कर सके। इस मामले में पुलिस ने संबंधित धाराओं में प्राथमिकी दर्ज कर ली है और सभी को न्यायिक हिरासत में भेजने की तैयारी की जा रही है। पुलिस अब इस बिंदु पर भी गहनता से जांच कर रही है कि इस रैकेट के तार परिवहन विभाग या किसी अन्य बड़े अधिकारी से तो नहीं जुड़े हैं।
देवब्रत की रिपोर्ट