Bihar News : कटिहार में गंगा-कोसी का कहर, तीनघरिया में बंबू रोल और फ्लड फाइटिंग हुआ फेल, ग्रामीणों ने NH-31 और रेल जाम करने की दी चेतावनी

Bihar News : कटिहार कुर्सेला के तीनघरिया गांव में कटाव रुकने का नाम नहीं ले रहा। बंबू रोल और फ्लड फाइटिंग का काम भी फेल हो गया।

Bihar News : कटिहार में गंगा-कोसी का कहर, तीनघरिया में बंबू
नहीं रुक रहा कटाव - फोटो : SHYAM

KATIHAR : बिहार के कटिहार जिले अंतर्गत कुर्सेला प्रखंड का तीनघरिया गांव गंगा और कोसी नदी के भीषण कटाव की चपेट में है। गांव को बचाने के लिए जल संसाधन विभाग और प्रशासन द्वारा किए गए बंबू रोलिंग तथा फ्लड फाइटिंग के तमाम सुरक्षात्मक उपाय गंगा की तेज धार में पूरी तरह विफल साबित हुए हैं। जितने भी बोरे और बांस-बल्ले नदी में डाले गए थे, वे सब नदी में विलीन हो गए। इस प्रशासनिक विफलता के बाद ग्रामीणों में दहशत का माहौल चरम पर है और लोग पलायन करने को मजबूर हो रहे हैं।

कटावरोधी कार्य फेल होने के बाद आक्रोशित ग्रामीणों का सब्र अब पूरी तरह टूट चुका है। स्थानीय निवासियों का सीधा आरोप है कि विभागीय अधिकारियों और ठेकेदारों की मिलीभगत से कागजों पर तो करोड़ों रुपये के फ्लड फाइटिंग कार्य दिखाए जा रहे हैं, लेकिन जमीनी हकीकत शून्य है। ग्रामीणों का कहना है कि सिर्फ बालू भरे बोरे डालकर खानापूर्ति की जा रही है, जो उफनती नदी की तेज धाराओं के सामने एक मिनट भी नहीं टिक पा रहे हैं।

प्रशासन और सरकार की उदासीनता से नाराज ग्रामीणों ने अब उग्र आंदोलन की चेतावनी दी है। गांव के लोगों ने स्पष्ट लहजे में कहा है कि सरकार या तो तुरंत 'बोल्डर पिचिंग' (बड़ा पत्थर डालकर कटाव रोकना) कराकर गांव को बचाए, अन्यथा वे राष्ट्रीय राजमार्ग (NH-31) और रेलवे ट्रैक को अनिश्चितकाल के लिए जाम करने को मजबूर होंगे। ग्रामीणों का आरोप है कि चुनाव और आपदा के समय नेता केवल दौरा कर फोटो खिंचवाने आते हैं, लेकिन समस्या के स्थायी समाधान यानी 'एंटी-इरोजन' प्रोजेक्ट पर कोई ठोस पहल नहीं की जा रही।

विभागीय नाकामी और बेघर होने के डर से पीड़ित ग्रामीणों ने एकजुट होकर सरकार और स्थानीय प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। इस दौरान कई बुजुर्ग और महिलाएं रो-रोकर तथा गीतों के माध्यम से अपनी व्यथा सुनाते नजर आए। पूरे गांव में मातम और आक्रोश का मिला-जुला माहौल बना हुआ है, क्योंकि कटाव की रफ्तार यदि ऐसी ही रही तो आने वाले कुछ ही दिनों में तीनघरिया गांव का अस्तित्व पूरी तरह नक्शे से मिट सकता है।

उधर, ग्रामीणों के आक्रोश और लगातार हो रहे कटाव की सूचना के बाद प्रशासनिक महकमे में हड़कंप मच गया है। हालांकि, ग्रामीण अब किसी भी अस्थाई आश्वासन को मानने को तैयार नहीं हैं और मौके पर पक्के बोल्डर से कटावरोधी कार्य शुरू कराने की मांग पर अड़े हुए हैं। देखना होगा कि प्रशासन इस संभावित जनआंदोलन और मानवीय त्रासदी को रोकने के लिए कितनी जल्द ठोस कदम उठाता है।

श्याम की रिपोर्ट