कटिहार में विकास के दावों पर सवाल, करोड़ों की लागत से बन रहे दो पुल वर्षों से अधूरे, ग्रामीणों में नाराजगी

कटिहार जिले के प्राणपुर विधानसभा क्षेत्र में करोड़ों रुपये की लागत से शुरू हुई दो पुल परियोजनाएं वर्षों बाद भी अधूरी पड़ी हैं।

Two PMGSY Bridges in Katihar Remain Incomplete for Years
विकास के दावों पर सवाल- फोटो : reporter

Bihar News:  बिहार सरकार जहां सड़क और पुल निर्माण को विकास की बड़ी उपलब्धि के तौर पर पेश कर रही है, वहीं कटिहार जिले के प्राणपुर विधानसभा क्षेत्र में करोड़ों रुपये की लागत से शुरू हुई दो पुल परियोजनाएं वर्षों बाद भी अधूरी पड़ी हैं। निर्माण कार्य समय पर पूरा नहीं होने से हजारों ग्रामीणों को रोजाना आवागमन में भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि चुनाव के समय निर्माण कार्य में तेजी दिखाई जाती है, लेकिन चुनाव समाप्त होते ही काम ठप पड़ जाता है।

प्राणपुर विधानसभा क्षेत्र के मादानशाही स्थित घोघरा नदी पर प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत पुल निर्माण का कार्य शुरू किया गया था। ग्रामीणों के अनुसार, इस परियोजना पर करीब 16 करोड़ रुपये की लागत से वर्ष 2025 तक काम पूरा होना था, लेकिन निर्धारित समय बीत जाने के बावजूद पुल का निर्माण अब तक अधूरा है। लोगों का कहना है कि पुल नहीं बनने से उन्हें लंबा चक्कर लगाकर आवागमन करना पड़ता है, जिससे समय और पैसे दोनों की अतिरिक्त बर्बादी होती है।

ग्रामीणों का आरोप है कि उन्होंने कई बार संबंधित अधिकारियों से शिकायत की, लेकिन इसके बावजूद निर्माण कार्य में अपेक्षित गति नहीं आई। उनका कहना है कि अधूरे पुल के कारण छात्रों, किसानों, मरीजों और दैनिक यात्रियों को सबसे अधिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।

इसी तरह प्राणपुर के बिसारे गांव में भी प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत लगभग 3 करोड़ रुपये की लागत से पुल निर्माण का कार्य वर्ष 2021 में शुरू हुआ था। इस पुल का उद्देश्य प्राणपुर और मनिहारी विधानसभा क्षेत्रों को जोड़ना था तथा इसे 2022 तक पूरा किया जाना था। हालांकि, वर्षों बीत जाने के बाद भी यह परियोजना अधूरी पड़ी है। स्थानीय लोगों का कहना है कि अधूरा पुल अब विकास का प्रतीक नहीं, बल्कि सरकारी लापरवाही का उदाहरण बन गया है और लोगों का इसके जल्द पूरा होने से भरोसा भी टूटने लगा है।

मामले पर कटिहार के जिलाधिकारी आशुतोष द्विवेदी ने कहा कि ग्रामीण कार्य विभाग (RWD) की सभी परियोजनाओं की नियमित समीक्षा की जाती है। उन्होंने आश्वासन दिया कि दोनों पुलों की प्रगति की विशेष समीक्षा कराई जाएगी। यदि निर्माण एजेंसी संतोषजनक तरीके से कार्य करती नहीं पाई गई तो उसके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। जरूरत पड़ने पर नया टेंडर जारी कर निर्माण कार्य को पूरा कराया जाएगा।

ग्रामीणों का कहना है कि उन्हें आश्वासनों से अधिक अब पुलों के समय पर निर्माण का इंतजार है। उनका मानना है कि परियोजनाएं पूरी होने के बाद ही क्षेत्र के हजारों लोगों को आवागमन की समस्या से राहत मिल सकेगी और विकास के दावे जमीनी स्तर पर दिखाई देंगे।

रिपोर्ट- श्याम कुमार सिंह