मधुबनी मेडिकल कॉलेज का 'निकाह फरमान' निकला फर्जी! कॉलेज ने किया खंडन, साइबर सेल में शिकायत दर्ज
मेडिकल कॉलेज से जुड़े कथित सर्कुलर में दावा किया जा रहा है कि रमजान के दौरान युवक-युवती के साथ खड़े होने पर रोक और उल्लंघन पर निकाह कराने जैसी सख्त चेतावनी दी गई है, हालांकि कॉलेज प्रशासन ने इस सर्कुलर को पूरी तरह से फर्जी बताया है.
बिहार के मधुबनी मेडिकल कॉलेज के नाम से सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा एक कथित 'निकाह फरमान' पूरी तरह से फर्जी पाया गया है। वायरल हो रहे इस पत्र में दावा किया गया था कि रमजान के दौरान यदि कोई छात्र और छात्रा एक साथ खड़े पाए जाते हैं, तो कॉलेज प्रशासन तुरंत उनका निकाह (शादी) करा देगा। इस खबर के फैलते ही सोशल मीडिया पर हड़कंप मच गया और लोग कॉलेज प्रशासन की आलोचना करने लगे, लेकिन जल्द ही कॉलेज ने सामने आकर स्थिति स्पष्ट कर दी।
क्या था वायरल सर्कुलर में चौंकाने वाला दावा?

वायरल सामग्री में कॉलेज के लेटरहेड, मुहर और हस्ताक्षर का इस्तेमाल कर यह भ्रम फैलाया गया कि रमजान के पाक महीने में युवक-युवतियों का साथ दिखना प्रतिबंधित है। पत्र में यहाँ तक लिखा गया था कि पकड़े जाने पर न केवल निकाह कराया जाएगा, बल्कि 'वलीमा' (दावत) का खर्च भी उसी जोड़े को उठाना होगा। इस कथित सख्त और अजीबोगरीब 'नैतिक निगरानी' वाले संदेश ने इंटरनेट पर तीखी बहस छेड़ दी, जिसे कॉलेज ने दुर्भावनापूर्ण साजिश करार दिया है।
कॉलेज प्रशासन की कार्रवाई और साइबर सेल में शिकायत
विवाद बढ़ता देख मधुबनी मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने आधिकारिक तौर पर इस सर्कुलर का खंडन किया है। प्रशासन ने स्पष्ट रूप से कहा कि महाविद्यालय द्वारा ऐसा कोई भी पत्र जारी नहीं किया गया है और न ही ऐसी कोई नीति कॉलेज में लागू है। संस्थान की छवि को नुकसान पहुँचाने के उद्देश्य से किए गए इस कृत्य के खिलाफ कॉलेज ने साइबर सेल में शिकायत दर्ज कराई है। अधिकारियों ने आश्वासन दिया है कि फर्जी पत्र वायरल करने वालों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

राजनीतिक गलियारों में हलचल और विशेषज्ञों की राय
सर्कुलर के वायरल होते ही यह मुद्दा राजनीतिक चर्चा का केंद्र भी बन गया। विपक्षी दलों ने इसे व्यक्तिगत स्वतंत्रता पर हमला बताते हुए सवाल उठाए, वहीं कुछ नेताओं ने बिना सत्यापन के ऐसी खबरों पर प्रतिक्रिया देने से बचने की सलाह दी। विशेषज्ञों का कहना है कि यह घटना इस बात का प्रमाण है कि सोशल मीडिया के दौर में किसी भी दस्तावेज की प्रामाणिकता की जांच करना कितना आवश्यक है, क्योंकि एक फर्जी पत्र भी समाज में वैमनस्य और तनाव पैदा कर सकता है।
अनुशासन बनाम व्यक्तिगत स्वतंत्रता की नई बहस
भले ही यह पत्र फर्जी साबित हो चुका है, लेकिन इसने शिक्षण संस्थानों में अनुशासन, व्यक्तिगत स्वतंत्रता और सोशल मीडिया की भूमिका जैसे गंभीर विषयों पर नई बहस छेड़ दी है। कॉलेज प्रशासन अब यह सुनिश्चित करने में जुटा है कि छात्रों के बीच सुरक्षा और विश्वास का माहौल बना रहे। फिलहाल, साइबर सेल इस बात की जांच कर रही है कि इस पत्र का स्रोत क्या था और इसे सबसे पहले किसने और किस इरादे से प्रसारित किया।