Bihar News : फर्जी निगरानी SP बन सीडीपीओ से शातिर ने की 15 लाख की मांग, 10 मिनट में पैसे न देने पर दी जेल भेजने की धमकी, जाँच में जुटी पुलिस

Bihar News : बिहार में फर्जी निगरानी एसपी बनकर सीडीपीओ से 15 लाख रूपये मांगने का मामला सामने आया है. पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है......पढ़िए आगे

Bihar News : फर्जी निगरानी SP बन सीडीपीओ से शातिर ने की 15 ल
15 लाख रिश्वत की मांग - फोटो : HIMANSHU

MOTIHARI : पूर्वी चंपारण जिले के केसरिया में एक शातिर जालसाज द्वारा फर्जी निगरानी एसपी (ACP) बनकर सीडीपीओ से लाखों रुपये की डिमांड करने का मामला सामने आया है। केसरिया की सीडीपीओ रूपम रानी ने इस संबंध में स्थानीय थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई है। जालसाज ने खुद का नाम हर्षित कुमार बताया और सीडीपीओ को धमकी दी कि यदि उन्होंने 10 मिनट के भीतर 15 लाख रुपये नहीं दिए, तो उन्हें और उनके कार्यालय के कर्मियों को भ्रष्टाचार के मामले में फंसा दिया जाएगा। इस घटना के बाद प्रशासनिक महकमे में हड़कंप मच गया है।

पूरी घटना की शुरुआत 2 जनवरी की सुबह हुई, जब जिला गोपनीय शाखा के लैंडलाइन नंबर से सूचना देकर सीडीपीओ को निगरानी अधिकारी से बात करने को कहा गया। जब सीडीपीओ ने संबंधित नंबर पर संपर्क किया, तो आरोपी ने खुद को निगरानी विभाग का बड़ा अधिकारी बताते हुए डराना शुरू कर दिया। उसने कहा कि 19 दिसंबर को रिश्वत लेते पकड़ी गई महिला पर्यवेक्षिका अम्बालिका कुमारी ने जांच में सीडीपीओ का भी नाम लिया है। आरोपी ने दावा किया कि उसके पास इस संदर्भ में मेल आया है और वह पैसे लेकर इस केस से नाम हटा सकता है।

जालसाज ने दबाव बनाने के लिए सीडीपीओ को व्हाट्सएप कॉल पर बुलाया और महज 10 मिनट के भीतर 15 लाख रुपये की मांग की। उसने धमकी भरे लहजे में कहा कि यदि समय पर पैसे नहीं मिले, तो पूरी परियोजना के कर्मियों पर निगरानी की गाज गिरेगी। हालांकि, सीडीपीओ रूपम रानी ने हिम्मत दिखाई और तत्काल पैसे देने के बजाय मामले की तहकीकात शुरू कर दी। उन्होंने तुरंत निगरानी विभाग के असली अधिकारी डीएसपी विनोद पाण्डेय से संपर्क कर हर्षित कुमार नामक अधिकारी और उसके मोबाइल नंबर का सत्यापन कराया।

निगरानी डीएसपी विनोद पाण्डेय की जांच में यह स्पष्ट हो गया कि विभाग में हर्षित कुमार नाम का कोई अधिकारी नहीं है और यह कॉल पूरी तरह फर्जी है। डीएसपी ने सीडीपीओ को तुरंत प्राथमिकी दर्ज कराने का निर्देश दिया। दिलचस्प बात यह है कि जब सीडीपीओ ने 15 लाख रुपये देने में असमर्थता जताई, तो जालसाज अपनी बातों से पलट गया और सौदेबाजी पर उतर आया। उसने 15 लाख की जगह महज 15 हजार रुपये की मांग करते हुए व्हाट्सएप पर क्यूआर कोड (Scanner) भेज दिया और तत्काल भुगतान करने का दबाव बनाया।

सीडीपीओ रूपम रानी की सूझबूझ से एक बड़ी ठगी और साजिश का पर्दाफाश हो गया है। केसरिया थाना पुलिस ने प्राप्त आवेदन के आधार पर फर्जी एसपी हर्षित कुमार के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर ली है और मामले की तकनीकी जांच शुरू कर दी गई है। पुलिस अब उस मोबाइल नंबर और व्हाट्सएप स्कैनर के जरिए आरोपी तक पहुंचने की कोशिश कर रही है। इस घटना ने यह भी साफ कर दिया है कि ठग अब सरकारी अधिकारियों को भी अपना निशाना बनाने के लिए उच्च पदों का फर्जी इस्तेमाल कर रहे हैं।

हिमांशु की रिपोर्ट