Bihar News : मोतिहारी में सीओ और कर्मचारी ने गैरमजरूआ सरकारी जमीन का किया दाखिल- खारिज, कागजात सोशल मीडिया में हुआ वायरल
Bihar News : मोतिहारी जिले के पहाड़पुर अंचल में अधिकारियों ने नियम-कानूनों को ताक पर रखकर सरकार की कीमती जमीन का ही दाखिल-खारिज कर दिया। जिससे जिले में हड़कंप मच गया है......पढ़िए आगे
MOTIHARI : बिहार सरकार अंचल कार्यालयों में भ्रष्टाचार पर लगाम लगाने और आम जनता को सुलभ सुविधाएं देने के लिए लगातार भ्रष्ट अधिकारियों पर कार्रवाई कर रही है। इसके बावजूद जमीनी स्तर पर भ्रष्टाचार थमने का नाम नहीं ले रहा है। ताजा मामला मोतिहारी जिले के पहाड़पुर अंचल से सामने आया है, जहां अंचल के बड़े अधिकारियों ने नियम-कानूनों को ताक पर रखकर सरकार की कीमती जमीन का ही दाखिल-खारिज कर दिया। इस बड़े कारनामे से जुड़े सरकारी दस्तावेज अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे हैं, जिसने प्रशासनिक महकमे में हड़कंप मचा दिया है।
सोशल मीडिया पर वायरल ऑनलाइन रिपोर्ट के अनुसार, पूरा मामला पहाड़पुर अंचल के अमवा निजाद मौजा का है। यहाँ खाता संख्या 151, खेसरा (प्लॉट) संख्या 56 और 70 की कुल 27.88 डिसमिल जमीन का अवैध रूप से दाखिल-खारिज कर दिया गया है। वायरल कागजात में बकायदा राजस्व कर्मचारी, राजस्व अधिकारी (RO) और अंचलाधिकारी (CO) की डिजिटल रिपोर्ट और स्वीकृति लगी हुई दिखाई दे रही है। वहीं, इसके साथ ही एक और सरकारी दस्तावेज वायरल हो रहा है, जिसमें स्पष्ट रूप से दर्ज है कि यह खाता संख्या 151 की जमीन पूरी तरह से 'गैरमजरूआ आम' (सरकारी भूमि) है।
इस खुलासे के बाद इंटरनेट और सोशल मीडिया पर स्थानीय लोगों द्वारा अंचल प्रशासन को जमकर ट्रोल किया जा रहा है। आम जनता का कहना है कि जहां एक तरफ आम नागरिकों को अपनी जायज और पुश्तैनी जमीन के दाखिल-खारिज के लिए महीनों अंचल कार्यालय के चक्कर काटने पड़ते हैं और उनके चप्पल तक घिस जाते हैं, वहीं दूसरी तरफ अंचल के अधिकारियों को मनचाहा 'चढ़ावा' (रिश्वत) न मिलने पर जायज आवेदनों को भी बिना वजह रिजेक्ट कर दिया जाता है। इसके विपरीत, मोटी रकम के खेल में सरकारी खजाने की जमीन को भू-माफियाओं के नाम धड़ल्ले से ट्रांसफर कर हाकिम और कर्मचारी मालामाल हो रहे हैं।
क्षेत्र में चर्चा का विषय बने इस मामले ने अंचल के अधिकारियों के हौसलों को उजागर कर दिया है। लोगों का कहना है कि भ्रष्टाचार का यह खेल इतना निराला है कि इन अधिकारियों को न तो विभागीय कार्रवाई का कोई खौफ है और न ही आर्थिक अपराध इकाई (EOU) या निगरानी विभाग का कोई डर। राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के मंत्री से लेकर सचिव तक की तमाम सख्ती और कड़े निर्देशों के बावजूद, अगर अंचल कार्यालय के रक्षक ही भक्षक बनकर सरकारी संपत्ति की खुलेआम 'नीलामी' करने पर बाज नहीं आ रहे हैं, तो आम जनता की सुरक्षा और उनकी जमीनों का क्या हाल होगा।
वर्तमान में इस वायरल हो रहे दस्तावेज ने पहाड़पुर अंचल की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय ग्रामीणों और प्रबुद्ध नागरिकों ने इस पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग तेज कर दी है। लोगों का कहना है कि इस सिंडिकेट में शामिल राजस्व कर्मचारी, आरओ और सीओ की भूमिका की गहनता से जांच की जाए और सरकारी राजस्व व संपत्ति को नुकसान पहुंचाने के आरोप में इन सभी दोषियों पर प्राथमिकी दर्ज कर सख्त कानूनी व दंडात्मक कार्रवाई की जाए ताकि अंचलों में जारी इस खुली लूट पर विराम लग सके।
हिमांशु की रिपोर्ट