Bihar Education Department: शिक्षा विभाग में वेतन घोटाले से हड़कंप, दो कर्मचारियों पर FIR

Bihar Education Department: पूर्वी चंपारण जिले के मोतिहारी स्थित शिक्षा विभाग में करीब 60.57 लाख रुपये के कथित वेतन घोटाले का मामला सामने आने से महकमे में हड़कंप मच गया है।

Motihari Education Dept Faces Rs 60.57 Lakh Salary Scam Prob
शिक्षा विभाग में वेतन घोटाले से हड़कंप- फोटो : reporter

Bihar Education Department: पूर्वी चंपारण जिले के मोतिहारी स्थित शिक्षा विभाग में करीब 60.57 लाख रुपये के कथित वेतन घोटाले का मामला सामने आने से महकमे में हड़कंप मच गया है। आरोप है कि मानव संसाधन प्रबंधन प्रणाली  में छेड़छाड़ कर सरकारी वेतन की राशि रिश्तेदारों के खातों में ट्रांसफर की गई। मामले में जिला शिक्षा पदाधिकारी  की ओर से नगर थाना में प्राथमिकी दर्ज कराई गई है। पुलिस ने दो कर्मचारियों के खिलाफ मामला दर्ज कर आगे की जांच शुरू कर दी है।

HRMS में छेड़छाड़ कर रिश्तेदारों के खातों में भेजी गई रकम

विभागीय शिकायत के मुताबिक, इस मामले में डीपीओ स्थापना कार्यालय के डाटा ऑपरेटर अमन कुमार और छौड़ादानो के शिक्षक मोहम्मद इमादुद्दीन शाबिर का नाम सामने आया है। बताया गया है कि शिक्षक प्रतिनियुक्ति पर कार्यरत थे।आरोप है कि दोनों ने कथित तौर पर HRMS प्रणाली में गड़बड़ी कर जून 2024 से सितंबर 2026 के बीच वेतन की राशि अपनी पत्नी, पिता और बहन के नाम पर ट्रांसफर कराई। इस तरह सरकारी खजाने से 60,57,158 रुपये की कथित अनियमित निकासी का मामला सामने आया है।जिला शिक्षा पदाधिकारी की ओर से नगर थाना में शिकायत दर्ज कराने के बाद पुलिस मामले की छानबीन में जुट गई है। हालांकि, आरोपों की अंतिम पुष्टि जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगी।

दो साल तक कैसे चलता रहा वेतन भुगतान में कथित फर्जीवाड़ा?

इस मामले ने शिक्षा विभाग की वेतन भुगतान व्यवस्था और निगरानी तंत्र पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। विभाग में वेतन भुगतान की प्रक्रिया में मेकर, चेकर, आहरण एवं संवितरण पदाधिकारी (DDO), प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी  और स्थापना शाखा के अधिकारियों की अलग-अलग जिम्मेदारियां होती हैं। जिला शिक्षा पदाधिकारी भी विभागीय निगरानी की अहम कड़ी होते हैं।ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि HRMS में वेतन भुगतान की प्रविष्टियों में गड़बड़ी हुई, तो नियमित सत्यापन और भुगतान अनुमोदन के दौरान इसका पता क्यों नहीं चला? क्या भुगतान से जुड़े रिकॉर्ड की समय-समय पर जांच की गई थी? किन स्तरों पर भुगतान को मंजूरी मिली? इन सवालों का जवाब जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।

क्या केवल दो कर्मचारियों तक सीमित है मामला?

घटना सामने आने के बाद विभागीय व्यवस्था में जवाबदेही तय करने की मांग उठ रही है। स्थानीय स्तर पर यह चर्चा भी है कि कुछ शिक्षकों द्वारा नियोजित शिक्षक और विशिष्ट शिक्षक, दोनों श्रेणियों के नाम पर वेतन लेने की कथित अनियमितता हुई हो सकती है।हालांकि, इस संबंध में फिलहाल कोई पुष्ट आंकड़ा या आधिकारिक जांच निष्कर्ष सामने नहीं आया है। इसलिए इन दावों की स्वतंत्र जांच जरूरी है। यदि ऐसी शिकायतों में तथ्य मिलते हैं, तो संबंधित भुगतान रिकॉर्ड, नियुक्ति विवरण और सेवा अभिलेखों का मिलान किया जाना चाहिए।

पुलिस जांच से खुलेगा सरकारी राशि का पूरा हिसाब

नगर थाना पुलिस प्राथमिकी दर्ज होने के बाद मामले में आगे की कार्रवाई कर रही है। जांच में HRMS लॉग, वेतन भुगतान के बिल, बैंक खातों में हुए ट्रांसफर, अनुमोदन रिकॉर्ड और संबंधित अधिकारियों की भूमिका महत्वपूर्ण होगी।मोतिहारी शिक्षा विभाग का यह मामला केवल कथित वित्तीय अनियमितता तक सीमित नहीं है, बल्कि सरकारी राशि के भुगतान और उसकी निगरानी की व्यवस्था पर भी सवाल उठाता है। अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि जांच में रकम के हस्तांतरण का पूरा ब्योरा सामने आता है या नहीं और भुगतान प्रक्रिया में किसी अन्य स्तर पर लापरवाही अथवा संलिप्तता की पुष्टि होती है या नहीं।निष्पक्ष जांच और दस्तावेजों की गहन पड़ताल से ही सरकारी खजाने को हुए वास्तविक नुकसान तथा जिम्मेदार व्यक्तियों की भूमिका निर्धारित की जा सकेगी।

रिपोर्ट- हिमांशु कुमार