Bihar News: 22 नवंबर से चलेगा पल्स पोलियो अभियान, अफगानिस्तान-पाकिस्तान में वायरस की मौजूदगी से बढ़ी सतर्कता

Bihar News:पोलियो जैसी खतरनाक बीमारी से देश के बच्चों को महफूज रखने के लिए पूर्वी चंपारण जिले में स्वास्थ्य विभाग ने तैयारियां तेज कर दी हैं।

Bihar News: 22 नवंबर से चलेगा पल्स पोलियो अभियान, अफगानिस्ता
22 नवम्बर से पल्स पोलियो अभियान - फोटो : HIMANSHU

MOTIHARI : पोलियो जैसी खतरनाक बीमारी से देश के बच्चों को महफूज रखने के लिए पूर्वी चंपारण जिले में स्वास्थ्य विभाग ने तैयारियां तेज कर दी हैं। आगामी 22 नवंबर 2026 से जिले में पांच दिवसीय पल्स पोलियो अभियान शुरू होगा। इस अभियान के तहत पांच वर्ष तक के 10 लाख 81 हजार 544 बच्चों को पोलियो की खुराक पिलाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि अफगानिस्तान और पाकिस्तान में वाइल्ड पोलियो वायरस की मौजूदगी को देखते हुए किसी भी स्तर पर लापरवाही की गुंजाइश नहीं है। यदि एक भी बच्चा खुराक से महरूम रह गया तो पोलियो मुक्त भारत के संकल्प के सामने चुनौती खड़ी हो सकती है।

अभियान की कामयाबी और बेहतर तैयारी को लेकर जिला स्वास्थ्य समिति के सभागार में प्रशिक्षकों के लिए विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। इसकी अध्यक्षता सिविल सर्जन डॉ. दिलीप कुमार सिंह ने की। प्रशिक्षण में जिले के सभी 27 प्रखंडों और मोतिहारी शहरी क्षेत्र के चिकित्सा पदाधिकारियों एवं प्रशिक्षकों ने हिस्सा लिया। जिला प्रतिरक्षण पदाधिकारी डॉ. शरतचंद्र शर्मा और विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के जिला सर्विलांस मेडिकल ऑफिसर डॉ. मनोज तुमराडा ने अभियान से जुड़े जरूरी दिशा-निर्देश दिए। प्रशिक्षकों को घर-घर टीकाकरण, ट्रांजिट टीम की जिम्मेदारी और निगरानी व्यवस्था की बारीकियों से अवगत कराया गया।

कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे सिविल सर्जन डॉ. दिलीप कुमार सिंह ने कहा कि अफगानिस्तान और पाकिस्तान में वाइल्ड पोलियो वायरस अब भी मौजूद है। ऐसे में भारत को अपनी पोलियो मुक्त स्थिति बरकरार रखने के लिए पूरी एहतियात बरतनी होगी। उन्होंने कहा कि अभियान में घर-घर जाकर बच्चों को खुराक पिलाने वाली टीमों के साथ बस स्टैंड और अन्य सार्वजनिक स्थानों पर तैनात ट्रांजिट टीमों का प्रशिक्षण भी बेहद जरूरी है।उन्होंने स्पष्ट किया कि पांच वर्ष तक का कोई भी बच्चा पोलियो की खुराक से वंचित नहीं रहना चाहिए। स्वास्थ्यकर्मियों को पूरी मुस्तैदी और जिम्मेदारी के साथ अपने दायित्वों का निर्वहन करना होगा। जिला प्रतिरक्षण पदाधिकारी डॉ. शरतचंद्र शर्मा ने अभियान की विस्तृत जानकारी देते हुए बताया कि जिले के 28 क्षेत्रों में कुल 10,81,544 बच्चों को पोलियो की खुराक पिलाने का लक्ष्य रखा गया है। इसके लिए व्यापक इंतजाम किए गए हैं।उन्होंने बताया कि इन टीमों के जरिए घर-घर पहुंचकर बच्चों को पोलियो की खुराक दी जाएगी। वहीं, बस स्टैंड और दूसरे आवाजाही वाले स्थानों पर ट्रांजिट टीमें तैनात रहेंगी, ताकि सफर करने वाले परिवारों के बच्चों को भी अभियान का लाभ मिल सके।

डब्ल्यूएचओ के एसएमओ डॉ. मनोज तुमराडा ने प्रशिक्षण के दौरान माइक्रोप्लान को और बेहतर एवं प्रभावी बनाने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि अभियान की सफलता के लिए टीम के प्रत्येक सदस्य को सही तरीके से प्रशिक्षित करना जरूरी है। डिजिटल माइक्रोप्लान के जरिए हर घर तक पहुंचने और बच्चों का रिकॉर्ड दुरुस्त रखने पर विशेष जोर दिया गया।उन्होंने निर्देश दिया कि घरों का भ्रमण पूरा होने के बाद उनकी सही पहचान के लिए मकानों पर नंबर अंकित किए जाएं। पोलियो की खुराक पीने वाले बच्चों की अंगुली पर निशान लगाना भी अनिवार्य रूप से सुनिश्चित किया जाए। इसके अलावा भ्रमण के दौरान वैक्सीन से बचाव योग्य अन्य बीमारियों के बारे में भी जानकारी जुटाने की हिदायत दी गई।

इस मौके पर गावी के डॉ. धर्मेंद्र, आईडीएसपी के डॉ. राहुल राज, डॉ. सुनील कुमार, डॉ. संजय कुमार, डॉ. राहुल कुमार पाठक सहित विभिन्न स्वास्थ्य अधिकारी और प्रखंड स्तरीय प्रशिक्षक मौजूद रहे। इनके अलावा नरोत्तम कुमार, संजय कुमार, संजीव कुमार और राजेश कुमार समेत अन्य कर्मियों ने भी प्रशिक्षण कार्यक्रम में भाग लिया। स्वास्थ्य विभाग का मुख्य मकसद अभियान के दौरान शत-प्रतिशत लक्षित बच्चों तक पहुंचना है। इसके लिए घर-घर निगरानी, नियमित पर्यवेक्षण और ट्रांजिट टीमों की सक्रियता सुनिश्चित की जा रही है। स्वास्थ्य अधिकारियों ने अभिभावकों से भी अपील की है कि वे अपने पांच वर्ष तक के बच्चों को पोलियो की खुराक जरूर पिलाएं। पोलियो के खिलाफ जंग में एक बच्चे की छूटी हुई खुराक भी पूरे अभियान की मेहनत पर भारी पड़ सकती है। इसलिए संदेश साफ है हर बच्चा जरूरी है, हर खुराक जरूरी है।

रिपोर्ट- हिमांशु कुमार