मुंगेर के प्रसिद्ध ऋषिकुंड मलमास मेले में संवेदक की मनमानी: तय दर से अधिक अवैध वसूली से दुकानदार और श्रद्धालु परेशान

मुंगेर जिले के प्रसिद्ध ऋषिकुंड मलमास मेला में संवेदक द्वारा अवैध वसूली का मामला सामने आया है। मेले में पहुंचे दुकानदारों और श्रद्धालुओं ने संवेदक पर पार्किंग और दुकान आवंटन के नाम पर तय सरकारी दर से अधिक किराया वसूलने का आरोप लगाया है...

मुंगेर के प्रसिद्ध ऋषिकुंड मलमास मेले में संवेदक की मनमानी:
मुंगेर के प्रसिद्ध ऋषिकुंड मलमास मेले में संवेदक की मनमानी से दुकानदार परेशान- फोटो : इम्तियाज खान

Munger : जिले के सुप्रसिद्ध एवं ऐतिहासिक ऋषिकुंड में एक महीने तक चलने वाला पवित्र मलमास मेला अब अपने अंतिम पड़ाव पर पहुंच चुका है। अंतिम समय में भी रोजाना हजारों की संख्या में श्रद्धालु गर्म जल के कुंड में आस्था की डुबकी लगाने और पूजा-अर्चना करने मेले में पहुंच रहे हैं। लेकिन इस धार्मिक मेले की रौनक के बीच अब संवेदक (ठेकेदार) द्वारा की जा रही अवैध वसूली और मनमाने किराए का एक बड़ा मामला सामने आया है। इस अव्यवस्था के कारण मेले में आए श्रद्धालुओं और दूर-दराज से पहुंचे दुकानदारों में गहरा आक्रोश व्याप्त है।


टेंडर की शर्तों को ताक पर रखकर संवेदक कर रहा मनमानी

मुंगेर जिला प्रशासन की ओर से ऋषिकुंड मलमास मेले में सुचारू व्यवस्था बनाए रखने के लिए टेंडर (निविदा) के माध्यम से संवेदक को पार्किंग और दुकान आवंटन की जिम्मेदारी सौंपी गई है। लेकिन धरातल पर संवेदक द्वारा टेंडर के नियमों और शर्तों को खुलेआम ताक पर रखा जा रहा है। मेले में दुकान लगाने पहुंचे कई दुकानदारों ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि उनसे तय सरकारी शुल्क से कहीं अधिक किराया वसूला जा रहा है, जिससे उनकी लागत और आर्थिक बोझ काफी बढ़ गया है।


वाहन पड़ाव के नाम पर भी श्रद्धालुओं की जेब पर डाका

दुकानदारों के साथ-साथ मेले में आने वाले आम श्रद्धालुओं को भी संवेदक की इस मनमानी का शिकार होना पड़ रहा है। श्रद्धालुओं का कहना है कि वाहन पड़ाव (पार्किंग) के नाम पर भी संवेदक के कारिंदों द्वारा मनमाने तरीके से मोटी रकम वसूली जा रही है। नियमानुसार पार्किंग की दरें बोर्ड पर प्रदर्शित होनी चाहिए, लेकिन ऐसा न करके अवैध रूप से पर्चियां काटी जा रही हैं। बाहर से आने वाले भोले-भले श्रद्धालुओं को डरा-धमकाकर उनसे तय राशि से दोगुना-तिगुना पैसा लिया जा रहा है।


विरोध करने पर बहस और दबाव बनाने का आरोप

पीड़ित दुकानदारों का कहना है कि हर साल जिला प्रशासन की ओर से दुकानों और वाहनों के लिए एक पारदर्शी दर तय की जाती है, ताकि किसी का शोषण न हो। लेकिन इस बार संवेदक के लोग खुलेआम तानाशाही पर उतारू हैं और मनमाफिक राशि की मांग कर रहे हैं। यदि कोई स्थानीय दुकानदार या जागरूक श्रद्धालु इस मनमानी का विरोध करता है, तो संवेदक के कारिंदे उनके साथ तीखी बहस करते हैं और मेले से दुकान हटाने या वाहन जब्त करने का अनुचित दबाव बनाने लगते हैं।


जिला प्रशासन से त्वरित कार्रवाई और राहत की मांग

इस जघन्य मनमानी और अवैध वसूली को लेकर पूरे मेला परिसर में असंतोष की स्थिति बनी हुई है। श्रद्धालुओं और स्थानीय दुकानदारों ने मुंगेर जिला प्रशासन और वरीय अधिकारियों से इस मामले में तुरंत हस्तक्षेप करने की गुहार लगाई है। उनकी मांग है कि मेले में चल रही इस लूट-खसोट पर अविलंब रोक लगाई जाए ताकि ऋषिकुंड आने वाले लोगों को किसी परेशानी का सामना न करना पड़े। अब देखना यह होगा कि जिला प्रशासन इस मामले को संज्ञान में लेकर दोषी संवेदक पर क्या कार्रवाई करता है।


इम्तियाज खान की रिपोर्ट