Ayurveda Day: आयुर्वेद दिवस पर मुंगेर के देशी चिकित्सालय की बदहाली उजागर,जीवनशैली और संतुलित स्वास्थ्य का विज्ञान है आयुर्वेद - डॉ. रामानंद पाण्डेय

आयुर्वेद दिवस पर दयानंद आयुर्वेदिक कॉलेज, सीवान के सचिव डॉ. रामानंद पाण्डेय ने आयुर्वेद के महत्व पर प्रकाश डाला।तो मुंगेर में सरकारी दावों की जमीनी हकीकत भी सामने आ गई है।

Ayurveda Day: आयुर्वेद दिवस पर मुंगेर के देशी चिकित्सालय की
आयुर्वेद जीवनशैली और संतुलित स्वास्थ्य का विज्ञान - डॉ. रामानंद पाण्डेय- फोटो : reporter

Ayurveda Day: आज आयुर्वेद दिवस पर देशभर में आयुर्वेद और देशी चिकित्सा पद्धति को बढ़ावा देने के दावे होंगे। बेहतर इलाज और आयुर्वेद को मजबूत करने की बातें भी होंगी। आयुर्वेद दिवस पर दयानंद आयुर्वेदिक कॉलेज, सीवान के सचिव डॉ. रामानंद पाण्डेय ने आयुर्वेद के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि आयुर्वेद दुनिया की प्राचीन और प्रमाणिक चिकित्सा प्रणालियों में से एक है, जो बीमारी के लक्षणों के साथ उसके मूल कारणों पर भी ध्यान केंद्रित करती है। आयुर्वेद का प्रमुख उद्देश्य शरीर में वात, पित्त और कफ यानी त्रिदोष का संतुलन बनाए रखना है।  डॉ. रामानंद पाण्डेय ने  बताया कि यह शारीरिक स्वास्थ्य के साथ मानसिक और आत्मिक संतुलन पर भी जोर देता है। प्राकृतिक जड़ी-बूटियों, संतुलित आहार और उचित जीवनशैली के जरिए स्वस्थ रहने की सीख आयुर्वेद देता है। ऋतुचर्या और नियमित दिनचर्या अपनाकर कई बीमारियों से बचाव किया जा सकता है।

तो वहीं मुंगेर में सरकारी दावों की जमीनी हकीकत सामने  है। मॉडल सदर अस्पताल के पीछे वर्षों से जर्जर भवन में संचालित देशी चिकित्सालय खुद सरकारी सुविधाओं का मोहताज बना हुआ है।छोटी केला बाड़ी स्थित किराये के जर्जर भवन के महज तीन कमरों में आयुर्वेद, होम्योपैथिक और यूनानी चिकित्सा की व्यवस्था संचालित है। अस्पताल में रोजाना करीब 30 से 40 मरीज इलाज की उम्मीद लेकर पहुंचते हैं। यहां करीब 20 तरह की दवाएं उपलब्ध कराए जाने की व्यवस्था है, लेकिन विडंबना यह है कि पिछले करीब दो महीने से अस्पताल में एक भी दवा उपलब्ध नहीं है।

डॉक्टर मरीजों को जांच और चिकित्सकीय सलाह तो दे रहे हैं, लेकिन दवा के लिए उन्हें बाजार का रुख करना पड़ रहा है। इसका सबसे ज्यादा असर आर्थिक रूप से कमजोर मरीजों पर पड़ रहा है। चिकित्सकों के मुताबिक, दवाओं की खरीद के लिए राशि मिलने का इंतजार है। राशि उपलब्ध होने के बाद दवाओं की व्यवस्था किए जाने की बात कही जा रही है।

समस्या सिर्फ दवाओं तक सीमित नहीं है। अस्पताल के चिकित्सक और अन्य कर्मियों को भी करीब चार महीने से वेतन नहीं मिला है। ऐसे में इलाज की व्यवस्था संभाल रहे कर्मी खुद आर्थिक परेशानी से जूझ रहे हैं।देशी चिकित्सा प्रभारी डॉ. अनुज कुमार के मुताबिक अस्पताल के लिए अलग भवन की मांग विभाग से की गई है। जर्जर भवन में लंबे समय से चिकित्सक और कर्मचारी काम कर रहे हैं।

आयुर्वेद दिवस पर जब देशी चिकित्सा को नई ऊंचाई देने के दावे होंगे, तब मुंगेर का यह अस्पताल सरकारी व्यवस्था की हकीकत सामने रखेगा। सवाल यही है कि जब अस्पताल के पास पर्याप्त दवा, भवन और संसाधन ही नहीं होंगे, तो आयुर्वेद को मजबूत करने का सरकारी संकल्प जमीन पर कैसे उतरेगा?

रिपोर्ट-मो. इम्तियाज खान