Bihar transport corruption: बिहार की सड़कों पर रिश्वत का राज!पासिंग के नाम पर उगाही का खेल!परिवहन विभाग की काली करतूत से भड़के ड्राइवर,पुलिस ने किसी तरह दबाया मामला
Bihar transport corruption:मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के राजनीतिक प्रभाव वाले क्षेत्र में ही अगर कानून व्यवस्था की आड़ में घूसखोरी का खेल खुलेआम चले, तो फिर व्यवस्था पर सवाल उठना लाजमी है।...
Bihar transport corruption: बिहार में पुलिसिंग और प्रशासनिक सुधारों की बड़ी-बड़ी बातें तो मंचों से गूंजती हैं, मगर हकीकत की जमीन पर तस्वीर कुछ और ही नंगा सच बयान कर रही है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के राजनीतिक प्रभाव वाले क्षेत्र में ही अगर कानून व्यवस्था की आड़ में घूसखोरी का खेल खुलेआम चले, तो फिर व्यवस्था पर सवाल उठना लाजमी है।
ताज़ा मामला मुंगेर जिले का है, जहां तेलिया तालाब के पास उस वक्त माहौल गरमा गया जब ड्राइवरों का सब्र आखिरकार जवाब दे गया। आरोप है कि परिवहन विभाग के कुछ कर्मी पासिंग और वाहन जांच के नाम पर खुलेआम वसूली कर रहे हैं। जो जेब गर्म करे, उसका चालान गायब, और जो विरोध करे, उसके लिए डबल चालान का डंडा यही नया सिस्टम बताया जा रहा है।
ड्राइवरों ने गुस्से में आकर सड़क जाम कर दिया और प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी शुरू कर दी। उनका आरोप था कि एक ही दिन में दो-दो बार चालान काटकर आर्थिक शोषण किया जा रहा है। गरीब और मेहनतकश ड्राइवरों के लिए यह व्यवस्था किसी जुर्माना उद्योग से कम नहीं रह गई है, जहां कानून नहीं बल्कि लेन-देन तय करता है कि कौन चलेगा और कौन फंसेगा।
मौके पर पहुंची पुलिस ने हालात को संभालने की कोशिश की और प्रदर्शनकारियों को समझा-बुझा कर जाम हटवाया। लेकिन सवाल यह है कि जब खुद सिस्टम के भीतर ही काली कमाई का कारोबार पनप रहा हो, तो सिर्फ समझाइश से हालात कैसे सुधरेंगे?
स्थानीय ड्राइवरों का आरोप और भी गंभीर है उनका कहना है कि परिवहन विभाग के कुछ कथित दलाल और अधिकारी मिलकर उगाही गैंग चला रहे हैं, जहां बिना पैसे दिए किसी भी वाहन को बख्शा नहीं जाता। जो विरोध करे,उसे नियमों की आड़ में बार-बार चालान भेजकर मानसिक और आर्थिक रूप से तोड़ने की कोशिश की जाती है।
सबसे बड़ी विडंबना यह है कि इस पूरे मामले पर परिवहन विभाग की ओर से अब तक कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है, जिससे संदेह और गहरा हो गया है।
मुंगेर की सड़कों पर हुआ यह हंगामा केवल एक जाम नहीं था, बल्कि सिस्टम के भीतर जमी उस गंदी परत का खुलासा था, जहां कानून की किताबें धूल फांक रही हैं और रिश्वत की स्याही से नए नियम लिखे जा रहे हैं। अब सवाल जनता पूछ रही है क्या यह व्यवस्था है या फिर खुला लूट तंत्र?
रिपोर्ट- मो. इम्तियाज खान