Munger Historical Clock: मुंगेर किले की ऐतिहासिक घंटा-घड़ी लंबे समय से बंद, मरम्मत की उठी मांग

Munger Historical Clock: मुंगेर किले के मुख्य द्वार पर लगी ऐतिहासिक घंटा-घड़ी लंबे समय से बंद है। स्थानीय लोग इसकी मरम्मत और संरक्षण की मांग कर रहे हैं। जानें क्या है पूरा मामला।

Munger Historical Clock

Munger Historical Clock: मुंगेर किले के मुख्य द्वार पर लगी पुरानी घंटा-घड़ी वर्षों से शहर के इतिहास और पहचान का हिस्सा रही है। कभी इसकी घंटी की आवाज और घड़ी की चलती सुइयां लोगों को समय का अहसास कराती थीं। आज इस ऐतिहासिक घड़ी की सुइयां थम चुकी हैं।


स्थानीय लोगों के लिए यह घड़ी सिर्फ लोहे और मशीनों से बना एक ढांचा नहीं है। यह मुंगेर के पुराने दौर और शहर की ऐतिहासिक पहचान की याद दिलाती है। घड़ी के बंद होने के बाद अब इसकी देखभाल को लेकर सवाल उठ रहे हैं।


किले के मुख्य द्वार पर बनी है ऐतिहासिक पहचान


मुंगेर किला शहर की पुरानी पहचान से जुड़ा हुआ है। किले के मुख्य द्वार पर लगी यह घंटा-घड़ी भी लंबे समय से लोगों के आकर्षण का केंद्र रही है। पुराने समय में घड़ी की घंटी और उसकी सुइयां लोगों को समय की जानकारी देती थीं। समय के साथ तकनीक और जीवनशैली बदल गई, लेकिन इस घड़ी का ऐतिहासिक महत्व आज भी बना हुआ है। स्थानीय लोगों का कहना है कि ऐसी धरोहरें शहर के इतिहास को नई पीढ़ी से जोड़ती हैं। इसलिए इनकी मरम्मत और देखभाल सिर्फ एक मशीन को ठीक करने का काम नहीं है, बल्कि विरासत को बचाए रखने से जुड़ा मामला है।


अधिकारियों के परिसर में भी नहीं हो सकी देखभाल


मुंगेर किले के परिसर में जिले के कई वरिष्ठ अधिकारियों के आवास और कार्यालय भी हैं। इसके बावजूद मुख्य द्वार पर लगी इस पुरानी घड़ी की हालत लंबे समय से लोगों के बीच चर्चा का विषय बनी हुई है। स्थानीय लोगों का सवाल है कि जब किले का परिसर प्रशासन की नजर में रहता है, तो यहां लगी ऐतिहासिक घड़ी की नियमित देखभाल क्यों नहीं हो सकी। लोगों का कहना है कि किसी ऐतिहासिक जगह को सिर्फ संरक्षित घोषित करना काफी नहीं है। उसके रखरखाव और मरम्मत की भी नियमित व्यवस्था होनी चाहिए, ताकि आने वाली पीढ़ियां उस विरासत को देख और उसके इतिहास को समझ सकें।


घड़ी को दिखवाया जाएगा- मेयर


मुंगेर की मेयर कुमकुम देवी ने कहा है कि ऐतिहासिक घड़ी को दिखवाया जाएगा। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि घड़ी में ज्यादा छेड़छाड़ नहीं की जा सकती। अब लोगों की नजर इस बात पर है कि घड़ी की तकनीकी स्थिति की जांच के बाद इसे ठीक करने के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं।


कब फिर चलेगी मुंगेर की यह घड़ी?


मुंगेर की इस पुरानी घंटा-घड़ी को लेकर अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि इसकी सुइयां दोबारा कब चलेंगी। क्या इसकी मरम्मत कर इसे पुराने स्वरूप में फिर से चालू किया जाएगा या यह सिर्फ किले के मुख्य द्वार पर एक पुरानी निशानी बनकर रह जाएगी? मुंगेर के लोगों के लिए यह घड़ी केवल समय बताने वाली मशीन नहीं है। यह शहर के पुराने दौर और उसकी विरासत से जुड़ी याद है। इसलिए इसकी सुइयों का रुकना लोगों के लिए सिर्फ घड़ी बंद होने की बात नहीं, बल्कि ऐतिहासिक धरोहरों की देखभाल को लेकर एक सवाल भी है।

मुंगेर से इम्तियाज की रिपोर्ट