Bihar News : मुंगेर पुलिस के सिपाही अमृत कुमार ने बीपीएससी में लहराया परचम, 350 वीं रैंक लाकर बना अधिकारी
मुंगेर पुलिस के एक जांबाज सिपाही ने यह साबित कर दिया है कि अगर इरादे मजबूत हों, तो ड्यूटी की थकान भी सफलता का रास्ता नहीं रोक सकती। बीपीएससी परीक्षा पास कर वह अधिकारी बन गया है.....पढ़िए आगे
MUNGER : "दिन में वर्दी, रात में किताबें; एक हाथ में कानून व्यवस्था की जिम्मेदारी, तो दूसरे हाथ में सपनों की उड़ान।" मुंगेर पुलिस के एक जांबाज सिपाही ने यह साबित कर दिया है कि अगर इरादे मजबूत हों, तो ड्यूटी की थकान भी सफलता का रास्ता नहीं रोक सकती। मुंगेर डीआईजी कार्यालय की गोपनीय शाखा में तैनात सिपाही अमृत कुमार ने 70वीं बीपीएससी (BPSC) परीक्षा में शानदार सफलता हासिल की है। उन्होंने ओबीसी (OBC) श्रेणी में 350वीं रैंक प्राप्त कर न केवल पुलिस महकमे का मान बढ़ाया है, बल्कि उनकी यह कहानी अब हजारों युवाओं के लिए प्रेरणा बन गई है।
कठिन ड्यूटी के बीच सेल्फ स्टडी से पाई सफलता
खाकी वर्दी में अपने कर्तव्यों का निर्वहन करते हुए अमृत कुमार ने अपने प्रशासनिक अधिकारी बनने के सपने को कभी मरने नहीं दिया। दिनभर पुलिस की व्यस्त और तनावभरी ड्यूटी निभाने के बाद, जब अधिकांश लोग आराम की तलाश करते हैं, तब अमृत किताबों के साथ अपने भविष्य को गढ़ने में जुट जाते थे। सीमित समय, लगातार बदलती ड्यूटी के घंटों और मानसिक दबाव के बावजूद, उन्होंने बिना किसी कोचिंग के, विशुद्ध रूप से 'सेल्फ स्टडी' के दम पर बिहार की इस सबसे प्रतिष्ठित और कठिन परीक्षा में सफलता का परचम लहराया।
साधारण किसान परिवार से तय किया सफलता का सफर
अमृत कुमार मूल रूप से सहरसा जिले के कहरा प्रखंड स्थित बरियाही गांव के रहने वाले हैं और एक साधारण किसान परिवार से ताल्लुक रखते हैं। उनके पिता सुरेंद्र प्रसाद यादव ने सीमित संसाधनों और आर्थिक तंगहाली के बावजूद बेटे की पढ़ाई-लिखाई में कभी कोई कमी नहीं आने दी। अमृत वर्ष 2013 में बिहार पुलिस में सिपाही के पद पर बहाल हुए थे। उनकी पहली पोस्टिंग गया जिला बल में हुई थी, जिसके बाद उन्होंने शेखपुरा में भी अपनी सेवाएं दीं और वर्तमान में वे मुंगेर प्रक्षेत्र डीआईजी कार्यालय में कार्यरत हैं। आज उनकी इस ऐतिहासिक सफलता से उनका पूरा परिवार, पैतृक गांव और पूरा पुलिस विभाग गौरवान्वित महसूस कर रहा है।
सफलता में पत्नी का रहा अहम योगदान
अपनी इस अविश्वसनीय कामयाबी पर बात करते हुए अमृत कुमार ने बताया कि ड्यूटी के बाद उन्हें जितना भी समय मिलता था, वे उसका पूरा उपयोग पढ़ाई में करते थे। राह कठिन जरूर थी, लेकिन उनका लक्ष्य बिल्कुल तय था। अमृत ने अपनी सफलता का एक बड़ा श्रेय अपनी पत्नी को दिया, जो खुद भी बिहार पुलिस में सिपाही के पद पर तैनात हैं। उन्होंने भावुक होते हुए कहा कि तीन बच्चों की जिम्मेदारी अकेले संभालना और उन्हें पढ़ाई के लिए शांत माहौल व समय देना, पत्नी के इसी त्याग और सहयोग के कारण ही वे आज इस मुकाम पर पहुंच पाए हैं। उन्होंने युवाओं को संदेश देते हुए कहा कि परिस्थितियां कैसी भी हों, अगर निरंतर मेहनत और खुद पर भरोसा हो तो सफलता जरूर मिलती है।
सहकर्मियों और डीआईजी ने दी बधाई, बनी मिसाल
अमृत के साथ काम करने वाले साथी सिपाहियों ने खुशी जाहिर करते हुए कहा कि यह सिर्फ एक परीक्षा पास करने की कहानी नहीं है, बल्कि यह संघर्ष, कड़े अनुशासन और अटूट आत्मविश्वास की जीती-जाती मिसाल है। वहीं मुंगेर रेंज के डीआईजी राकेश कुमार ने अमृत कुमार की पीठ थपथपाते हुए कहा कि अगर मन में सच्ची लगन हो, तो इंसान नौकरी करते हुए और खुद से पढ़ाई करके भी सर्वोच्च सफलता पा सकता है, जिसका जीवंत उदाहरण अमृत हैं। अब अमृत की यह उपलब्धि देश-प्रदेश के उन हजारों युवाओं के लिए एक नजीर बन गई है, जो सरकारी नौकरी में रहते हुए अपने बड़े सपनों को पूरा करने की जद्दोजहद में जुटे हैं।
इम्तियाज़ की रिपोर्ट