Valentine Day 2026 : '14 फरवरी प्रेम का नहीं बलिदान का दिन', मुंगेर की महिलाओं ने पेश की देशभक्ति की मिसाल, काले वस्त्र पहन पुलवामा शहीदों को दी श्रद्धांजलि
Valentine Day 2026 : वैलेंटाइन डे के मौके पर मुंगेर में महिलाओं ने देशभक्ति की मिसाल पेश की है. काले वस्त्र पहनकर उन्होंने पुलवामा के शहीदों को श्रद्धांजलि दी.....पढ़िए आगे
MUNGER : मुंगेर के कोणार्क मोड़ इलाके में आज एक अलग ही नजारा देखने को मिला, जहाँ वैलेंटाइन डे के शोर-शराबे के बीच दर्जनों महिलाएँ अपनी सभ्यता और शहीदों के सम्मान में सड़कों पर उतरीं। हाथों में जलती हुई मोमबत्तियाँ और आँखों में राष्ट्रभक्ति का भाव लिए इन महिलाओं ने पुलवामा हमले में शहीद हुए 40 वीर सपूतों को नमन किया। काले वस्त्र धारण कर पहुँची इन महिलाओं ने सामूहिक रूप से एक मिनट का मौन रखकर वीर जवानों की आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की।
आयोजन में शामिल महिलाओं ने विदेशी संस्कृति पर प्रहार करते हुए कहा कि वैलेंटाइन डे भारतीय मिट्टी और सभ्यता की देन नहीं है। उन्होंने जोर देकर कहा कि 14 फरवरी का दिन हमारे लिए केवल प्रेम का नहीं, बल्कि देश के प्रति असीम त्याग, बलिदान और शौर्य का प्रतीक है। महिलाओं ने संदेश दिया कि नई पीढ़ी को अपनी जड़ों और वीर शहीदों के इतिहास को कभी नहीं भूलना चाहिए।
कोणार्क मोड़ का पूरा माहौल उस समय देशभक्ति के रंग में सराबोर हो गया जब महिलाओं ने 'भारत माता की जय' और 'शहीद जवान अमर रहें' के नारे लगाए। मोमबत्तियों की रोशनी में शहीदों को याद करते हुए महिलाओं ने कहा कि जिन सपूतों ने देश की रक्षा के लिए अपने प्राण न्यौछावर कर दिए, उनके प्रति कृतज्ञता प्रकट करना हर नागरिक का परम कर्तव्य है।
मुंगेर की महिलाओं के इस कदम ने समाज में यह कड़ा संदेश दिया है कि असली देशभक्ति अपनी संस्कृति को सहेजने और अपने नायकों के बलिदान का सम्मान करने में है। स्थानीय लोगों ने भी महिलाओं के इस जज्बे की सराहना की और इसे 'शौर्य दिवस' के रूप में मनाने की उनकी पहल का समर्थन किया। यह आयोजन साबित करता है कि मुंगेर की जनता के लिए राष्ट्र सर्वोपरि है।
पूरे कार्यक्रम के दौरान देशभक्ति गीतों और नारों से वातावरण गुंजायमान रहा। महिलाओं ने शपथ ली कि वे हर वर्ष इस दिन को शहीदों की स्मृति में समर्पित करेंगी ताकि आने वाली पीढ़ियां पुलवामा के उन 40 वीरों के सर्वोच्च बलिदान से प्रेरणा ले सकें। इस आयोजन ने मुंगेर में वैलेंटाइन डे के पारंपरिक उत्साह के बीच एक गंभीर और सार्थक चर्चा को जन्म दिया है।
इम्तियाज़ की रिपोर्ट