बेजुबानों के लिए शुरू हुई 'फूड प्वाइंट' योजना पड़ी ठप, सिस्टम की लापरवाही ने योजना को बनाया 'शोपीस'

मुंगेर के तारापुर नगर पंचायत में आवारा कुत्तों के लिए शुरू की गई 'डॉग फूड प्वाइंट' योजना लापरवाही की भेंट चढ़ गई है। सफाई और देखरेख के अभाव में प्रोजेक्ट विफल। पढ़ें पूरी रिपोर्ट।

बेजुबानों के लिए शुरू हुई 'फूड प्वाइंट' योजना पड़ी ठप, सिस्टम

Munger - मुंगेर जिले के तारापुर नगर पंचायत ने आवारा कुत्तों को भूख से बचाने के लिए करीब पांच महीने पहले एक "पायलट प्रोजेक्ट" शुरू किया था। इसके तहत शहर के प्रमुख चौराहों पर 'डॉग फूड प्वाइंट' बनाए गए थे। शुरुआत में इसे एक क्रांतिकारी कदम माना गया, लेकिन आज प्रशासनिक उदासीनता के कारण यह योजना पूरी तरह ठप पड़ गई है। लोहे के स्टैंड और खाली बर्तन अब केवल सरकारी लापरवाही का शोपीस बनकर रह गए हैं।

धोनी और फैजलीगंज में डॉग फूड स्टैंड की बदहाली

नगर पंचायत ने धोनी और फैजलीगंज जैसे व्यस्त इलाकों में विशेष बैनर और बर्तनों के साथ फूड प्वाइंट स्थापित किए थे। नगर प्रशासन ने स्थानीय नागरिकों से अपील की थी कि वे अपने घरों का बचा हुआ ताजा भोजन कचरे में फेंकने के बजाय इन बर्तनों में डालें। शुरुआती एक हफ्ते तक तो चहल-पहल दिखी, लेकिन समय बीतने के साथ ही न तो प्रशासन ने बर्तनों की सफाई की और न ही जनता ने इसमें रुचि दिखाई।

सफाई और मॉनिटरिंग के अभाव में बढ़ी गंदगी


योजना के फ्लॉप होने का सबसे बड़ा कारण इन केंद्रों पर गंदगी का अंबार होना है। स्थानीय लोगों का कहना है कि प्रशासन ने उन जगहों का चुनाव किया, जहां पहले से ही कूड़ा फेंका जाता है। नियमित सफाई न होने के कारण बर्तनों में धूल और कीचड़ जमा हो गया है। स्थानीय निवासी संगम कुमारी और गणेश राम के अनुसार, गंदे बर्तनों में खाना डालना बीमारियों को न्योता देना है, इसलिए लोग अब यहां खाना डालने से कतराते हैं।

जन-जागरूकता और मैनेजमेंट की कमी

किसी भी सार्वजनिक योजना की सफलता जन-भागीदारी पर निर्भर करती है। तारापुर नगर पंचायत ने स्टैंड तो लगा दिए, लेकिन लोगों को प्रेरित करने के लिए कोई बड़ा जागरूकता अभियान नहीं चलाया। राजकुमार जैसे स्थानीय निवासियों का तर्क है कि अगर प्रशासन इन केंद्रों की सुरक्षा और सफाई सुनिश्चित करता, तो आज कुत्तों को भोजन के लिए भटकना नहीं पड़ता। अब लोग इन फूड पॉइंट्स के बजाय अपने घरों के बाहर ही कुत्तों को खाना देना पसंद कर रहे हैं।

क्या फिर से शुरू होगी यह योजना?

तारापुर का यह 'डॉग फूड प्वाइंट' प्रोजेक्ट इस बात का प्रमाण है कि बिना बेहतर प्रबंधन और देखरेख के अच्छी से अच्छी योजना भी दम तोड़ देती है। फिलहाल, ये खाली स्टैंड नगर पंचायत की कार्यप्रणाली पर सवालिया निशान लगा रहे हैं। क्या प्रशासन इस ओर दोबारा ध्यान देकर बेजुबानों के लिए इस व्यवस्था को दुरुस्त करेगा, या यह योजना हमेशा के लिए फाइलों में दफन हो जाएगी?

report - md. imtiyaz khan