गजब है बिहार पुलिस! गाड़ी मालिक रोता रहा, कोर्ट आदेश देता रहा और अफसर गाड़ी 'बेच' कर खा गए

मुजफ्फरपुर में 12 लाख की स्कॉर्पियो 4 लाख में नीलाम करने पर बड़ा घोटाला सामने आया है. हाईकोर्ट के आदेश पर आर्थिक अपराध इकाई (EOU) ने पूर्व उत्पाद अधीक्षक, DSP व थानाध्यक्ष पर FIR दर्ज की है.

गजब है बिहार पुलिस! गाड़ी मालिक रोता रहा, कोर्ट आदेश देता रहा
गजब है बिहार पुलिस! गाड़ी मालिक रोता रहा, कोर्ट आदेश देता रहा और अफसर गाड़ी 'बेच' कर खा गए- फोटो : news 4 nation

बिहार के मुजफ्फरपुर में खाकी के साये में हुए एक बड़े फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ है। आर्थिक अपराध इकाई (EOU) ने हाईकोर्ट के कड़े रुख के बाद पूर्व उत्पाद अधीक्षक, एक डीएसपी और थानाध्यक्ष समेत तीन अधिकारियों पर FIR दर्ज की है। मामला शराबबंदी कानून के तहत जब्त की गई एक कीमती स्कॉर्पियो के अवैध निपटारे से जुड़ा है। पुलिस अधिकारियों पर आरोप है कि उन्होंने पद का दुरुपयोग करते हुए न केवल कोर्ट के आदेशों की अवहेलना की, बल्कि एक सोची-समझी साजिश के तहत वाहन को ठिकाने लगा दिया।

12 लाख की गाड़ी, मात्र 4 लाख में 'सेटल'

इस पूरे घोटाले का सबसे चौंकाने वाला पहलू वाहन की नीलामी में हुआ खेल है। करीब 12 लाख रुपये कीमत की स्कॉर्पियो को अधिकारियों ने मिलीभगत कर महज 4 लाख रुपये में नीलाम कर दिया। वाहन मालिक का आरोप है कि गाड़ी को बेहद कम कीमत पर दिखाकर अपने करीबियों या मिलीभगत वाले लोगों को फायदा पहुँचाया गया। बाजार मूल्य से एक-तिहाई कीमत पर हुई इस नीलामी ने विभाग के भीतर चल रहे भ्रष्टाचार के बड़े सिंडिकेट की पोल खोल दी है।

कोर्ट के आदेश को भी दिखाया ठेंगा

न्यायपालिका के सम्मान को ताक पर रखते हुए इन अधिकारियों ने कोर्ट के स्पष्ट निर्देश के बावजूद गाड़ी को उसके असली मालिक को सुपुर्द नहीं किया। हाईकोर्ट ने वाहन को मुक्त करने का आदेश दिया था, लेकिन अधिकारियों ने प्रक्रिया को जानबूझकर लटकाया और इसी बीच गुपचुप तरीके से उसकी नीलामी कर दी। जब पीड़ित ने दोबारा अदालत का दरवाजा खटखटाया, तब जाकर सच्चाई सामने आई। कोर्ट ने इसे गंभीर न्यायिक अवमानना और धोखाधड़ी मानते हुए EOU को जांच और कार्रवाई का जिम्मा सौंपा।

जांच के घेरे में डीएसपी समेत तीन बड़े अधिकारी

वर्तमान में इस मामले ने प्रशासनिक महकमे में हड़कंप मचा दिया है। प्राथमिकी दर्ज होने के बाद अब इन अधिकारियों की कुर्सी पर खतरा मंडरा रहा है। EOU की जांच में यह पता लगाया जा रहा है कि इस फर्जी नीलामी का असली लाभार्थी कौन है और क्या इसमें अन्य कर्मचारी भी शामिल थे। बिहार में शराबबंदी की आड़ में जब्त वाहनों की नीलामी में धांधली की यह पहली घटना नहीं है, लेकिन डीएसपी स्तर के अधिकारी पर कार्रवाई ने विभाग की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।