Bihar news: यूनिवर्सिटी के बाबुओं की बेशर्मी और भ्रष्टाचार का नंगा नाच, इंसाफ बिका है या इंसानियत मरी है! पढ़िए, 80 फिसदी दिव्यांग बेटी की लाचारी की कहानी

Bihar news: अव्यवस्था की दीवारों ने बेटी के रास्ते में ऐसे कांटे बिछाए हैं कि इंसानियत भी रो पड़े।...

Disabled Student Alleges Bribe Harassment at Muzaffarpur BRB
सिस्टम पर सवाल- फोटो : reporter

Bihar news:  मुजफ्फरपुर के बीआरबीए यूनिवर्सिटी की चौखट पर आज शिक्षा नहीं, बल्कि व्यवस्था की अर्थी सजी है। यह महज एक खबर नहीं, बल्कि उन तमाम दावों के सीने पर खंजर है जो बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ और समावेशी विकास का राग अलापते हैं। क्या एक गरीब, बेसहारा और 80 फीसदी दिव्यांग बेटी होना इस देश में सबसे बड़ा गुनाह बन गया है? मुजफ्फरपुर के बीआरबीए यूनिवर्सिटी से आई यह कहानी कलेजा चीर देने वाली है, जो बताती है कि कैसे हमारी सरकारी व्यवस्था और संवेदनहीन प्रशासन मिलकर एक होनहार बेटी के सपनों का गला घोंट रहे हैं।

बात मुजफ्फरपुर जिले के करजा थाना क्षेत्र के बड़कागांव बसंतपुर की रहने वाली जुझारू छात्रा आशना खातून की है। जिंदगी ने जिसके कदमों की रफ्तार छीन ली थी, उसने अपने हौसले और कड़ी मेहनत के बल पर तमाम बाधाओं को चीरते हुए बीए  की डिग्री हासिल की। ऑनलाइन पोर्टल पर उसकी सफलता की गवाही चमक रही है साफ दर्ज है कि उसकी डिग्री बन चुकी है। लेकिन कागजों पर बनी वह डिग्री, यूनिवर्सिटी के तहखानों में बैठी भेड़ियों जैसी व्यवस्था के बीच कैद होकर रह गई है।

अव्यवस्था की दीवारों ने इस बेटी के रास्ते में ऐसे कांटे बिछाए हैं कि इंसानियत भी रो पड़े। यूनिवर्सिटी का डिग्री ऑफिस दूसरी मंजिल पर है। विडंबना देखिए कि शिक्षा के इन मंदिरों में दिव्यांगों के लिए न तो कोई रैंप है और न ही लिफ्ट। जिस देश में तकनीक और चांद पर पहुंचने की बातें होती हैं, वहां एक 80 फीसदी दिव्यांग छात्रा अपनी डिग्री पाने के लिए लाचारी की सीढ़ियां चढ़ने में असमर्थ है। यूनिवर्सिटी के पत्थर दिल अधिकारियों को इस बेटी की आह सुनाई नहीं देती। उसे रोज मीलों का सफर तय कराकर सिर्फ इसलिए बुलाया जाता है ताकि उसकी लाचारी का तमाशा बनाया जा सके।

हद तो तब हो गई जब भ्रष्टाचार ने इंसानियत की सारी हदें पार कर दीं। आरोप है कि यूनिवर्सिटी के अकाउंट डिपार्टमेंट में पदस्थापित चंदन कुमार नामक शख्स ने इस गरीब बेटी की मजबूरी का फायदा उठाते हुए डिग्री दिलाने के एवज में 4,000 की रिश्वत ऐंठ ली। पैसे भी ले लिए गए और आज भी उस बेटी को दर-दर की ठोकरें खिलाई जा रही हैं। यह सिर्फ एक छात्रा का उत्पीड़न नहीं है, बल्कि 'दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम, 2016' और इंसानियत की सरेआम धज्जियां उड़ाना है।

कब जागेगी इन बहरे और संवेदनहीन अधिकारियों की अंतरात्मा? क्या इस देश में डिग्रियां अब पैसों और रसूख से ही मिलेंगी? मुजफ्फरपुर यूनिवर्सिटी की यह घटना सिस्टम के माथे पर एक ऐसा बदनुमा दाग है, जिसे कभी धोया नहीं जा सकता। 

रिपोर्ट- मणिभूषण शर्मा