वर्दी' पर गिरी गाज: कोर्ट के आदेश के बाद भी स्कॉर्पियो नीलाम करने पर तत्कालीन DSP और उत्पाद अधीक्षक समेत 4 पर FIR

पटना हाई कोर्ट के कड़े निर्देश के बाद EOU ने मुजफ्फरपुर के तत्कालीन उत्पाद अधीक्षक, डीएसपी और थानाध्यक्ष समेत चार अधिकारियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की है. आरोप है कि उन्होंने अदालत के स्पष्ट आदेश के बावजूद जब्त की गई एक स्कॉर्पियो गाड़ी को न केवल र

वर्दी' पर गिरी गाज: कोर्ट के आदेश के बाद भी स्कॉर्पियो नीलाम

Muzaffarpur  - पटना हाई कोर्ट के कड़े निर्देश के बाद आर्थिक अपराध इकाई (EOU) ने मुजफ्फरपुर के तत्कालीन उत्पाद अधीक्षक, डीएसपी और थानाध्यक्ष समेत चार अधिकारियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की है. इन अधिकारियों पर आरोप है कि उन्होंने अदालत के स्पष्ट आदेश के बावजूद जब्त की गई एक स्कॉर्पियो गाड़ी को न केवल रोके रखा, बल्कि उसे अवैध रूप से नीलाम भी कर दिया 

अदालत के आदेश को दिखाया ठेंगा 

यह मामला वर्ष 2020 का है, जब मुजफ्फरपुर के मुशहरी निवासी सुशील कुमार सिंह की स्कॉर्पियो गाड़ी को सकरा थाना पुलिस ने पांच बोतल विदेशी शराब के साथ जब्त किया था. पीड़ित ने अपनी गाड़ी को मुक्त कराने के लिए विशेष न्यायालय में याचिका दायर की, जिसे स्वीकार करते हुए अदालत ने सकरा थानाध्यक्ष को गाड़ी छोड़ने का आदेश दिया था. हालांकि, पुलिस और उत्पाद विभाग के अधिकारियों ने इस आदेश की सुध नहीं ली और लंबे समय तक गाड़ी को थाने में ही दबाए रखा.

मार्च 2023 में कर दी गई अवैध नीलामी 

हैरत की बात यह है कि जब पीड़ित लगातार अपनी गाड़ी के लिए चक्कर काट रहा था, तब थानाध्यक्ष ने काफी समय बाद अदालत को सूचित किया कि मार्च 2023 में गाड़ी को राज्यसात (Confiscate) करते हुए नीलाम कर दिया गया है. पीड़ित ने हाई कोर्ट के निर्देश पर उत्पाद विभाग में अपील और रिवीजन याचिकाएं भी दाखिल कीं, लेकिन विभाग ने उनकी दलीलों को अनसुना करते हुए दोनों याचिकाएं खारिज कर दीं.

हाई कोर्ट की फटकार और EOU की एंट्री 

न्याय न मिलने पर पीड़ित ने दोबारा हाई कोर्ट में सीडब्ल्यूजेसी (CWJC) दाखिल की. मामले की गंभीरता और अधिकारियों की मनमानी को देखते हुए जस्टिस ने नाराजगी जताई और आर्थिक अपराध इकाई को तत्काल प्राथमिकी दर्ज कर जांच के निर्देश दिए. हाई कोर्ट के इसी आदेश के अनुपालन में अब तत्कालीन उत्पाद अधीक्षक, तत्कालीन डीएसपी, तत्कालीन थानाध्यक्ष और एक दारोगा के विरुद्ध भ्रष्टाचार और आदेश की अवहेलना की धाराओं में मामला दर्ज किया गया है.

प्रशासनिक महकमे में मचा हड़कंप 

इस कार्रवाई ने जिले के पुलिस और उत्पाद महकमे में हड़कंप मचा दिया है. ईओयू की जांच में अब यह स्पष्ट होगा कि किन परिस्थितियों में कोर्ट के आदेश को नजरअंदाज किया गया और नीलामी की प्रक्रिया में किन नियमों की धज्जियां उड़ाई गईं. यह मामला उन अधिकारियों के लिए एक कड़ा संदेश है जो अदालती फैसलों के ऊपर प्रशासनिक हठधर्मिता को रखते हैं