नवादा के इस इलाके में गरजा प्रशासन का बुलडोजर : 50 साल पुरानी दुकानें ध्वस्त, 8 दुकानदारों को मिला था नोटिस

जिले के रजौली प्रखंड क्षेत्र अंतर्गत अमावां मोड़ पर प्रशासन ने अतिक्रमण के खिलाफ एक बड़ी और सख्त कार्रवाई की है। प्रशासन ने लगभग 50 वर्षों से अवैध रूप से संचालित हो रही दर्जनों दुकानें पर बुलडोजर चला ढहा दिया...

नवादा के इस इलाके में गरजा प्रशासन का बुलडोजर : 50 साल पुरान
अवैध दुकानोंं पर चला प्रशासन का बुलडोजर- फोटो : अमन सिन्हा

Nawada : जिले के रजौली प्रखंड क्षेत्र अंतर्गत अमावां मोड़ पर प्रशासन ने अतिक्रमण के खिलाफ एक बड़ी और सख्त कार्रवाई की है। अंचलाधिकारी (CO) मो. गुफरान मजहरी के नेतृत्व में, मजिस्ट्रेट और भारी पुलिस बल की मौजूदगी में बुलडोजर चलाकर अवैध निर्माणों को ढहा दिया गया। यह कार्रवाई आहर के भिंड (जल स्रोत के बांध) पर की गई, जहां पिछले लगभग 50 वर्षों से दर्जनों दुकानें अवैध रूप से संचालित हो रही थीं।


रोजगार छिनने से दुकानदारों के सामने खड़ा हुआ आर्थिक संकट

प्रशासन की इस अचानक हुई बड़ी कार्रवाई के दौरान प्रभावित दुकानदारों ने अपनी गहरी चिंता और परेशानियां व्यक्त की। बड़हर गांव के निवासी और स्थानीय दुकानदार उमेश सिंह ने बताया कि वे साल 1980 से लगातार इसी मोड़ पर दुकान चलाकर अपनी आजीविका कमा रहे थे। उनके भाई भी यहीं दुकान चलाते थे, जिससे उनके पूरे परिवार का भरण-पोषण होता था। अब दुकानें पूरी तरह ध्वस्त हो जाने से उनके और परिजनों के सामने रोजी-रोटी का गंभीर आर्थिक संकट खड़ा हो गया है।


सरकारी जमीन को मुक्त कराने के लिए चल रहा था 'अतिक्रमण वाद'

अंचलाधिकारी मो. गुफरान मजहरी ने मामले की कानूनी पृष्ठभूमि स्पष्ट करते हुए बताया कि अमावां मोड़ के समीप आहर के भिंड पर कुछ दुकानदारों द्वारा दशकों से अवैध कब्जा किया गया था। चूकि यह सर्वसाधारण और सरकारी उपयोग की जमीन थी, इसलिए इसे खाली कराना बेहद जरूरी था। इस सरकारी जमीन को मुक्त कराने के लिए अंचल कार्यालय में वर्ष 2024-25 में बाकायदा अतिक्रमण वाद संख्या 02 दर्ज कर कानूनी प्रक्रिया चलाई जा रही थी।


छह महीने से मिल रहा था नोटिस, कराई गई थी माईकिंग

अंचलाधिकारी ने आगे जानकारी दी कि अमावां मोड़ पर अतिक्रमण कर दुकान चलाने वाले 8 मुख्य दुकानदारों को पिछले छह महीनों के दौरान कई बार आधिकारिक नोटिस जारी किए गए थे। इसके अलावा, प्रशासन द्वारा इलाके में बकायदा माईकिंग (लाउडस्पीकर) के जरिए भी मुनादी कराई गई थी और लोगों से खुद ही अतिक्रमण हटा लेने का बार-बार आग्रह किया गया था। इन तमाम चेतावनियों के बावजूद जब दुकानदारों ने जमीन खाली नहीं की, तब जाकर यह कदम उठाया गया।


चेतावनी की अनदेखी के बाद प्रशासन ने चलाया बुलडोजर

प्रशासनिक चेतावनियों और कानूनी समय सीमा की लगातार अनदेखी किए जाने के बाद, आखिरकार अंचल प्रशासन ने बलपूर्वक दुकानों को हटाने का निर्णय लिया। नियुक्त मजिस्ट्रेट और पुलिस बल की कड़ी निगरानी में बुलडोजर बुलाकर सभी अवैध दुकानों और ढांचों को पूरी तरह ध्वस्त कर दिया गया। प्रशासन का कहना है कि क्षेत्र में सार्वजनिक और सरकारी जमीनों पर किए गए किसी भी तरह के अवैध अतिक्रमण को आगे भी बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।


अमन सिन्हा की रिपोर्ट