नवादा में 'अर्जक संघ' की पहल पर टूटी सदियों पुरानी रूढ़िवादी परंपरा : महिलाओं ने मां की अर्थी को दिया कंधा, श्मशान घाट पहुंच दी मुखाग्नि

मानववादी संगठन 'अर्जक संघ' की पहल पर नवादा जिले के मिर्जापुर में सामाजिक बदलाव और महिला सशक्तिकरण की एक अनोखी मिसाल देखने को मिली है। सदियों पुरानी धार्मिक रूढ़ियों को तोड़ते हुए परिवार की महिलाओं ने न केवल मां की अर्थी को कंधा दिया बल्कि श्मशान घाट

नवादा में 'अर्जक संघ' की पहल पर टूटी सदियों पुरानी रूढ़िवादी
महिलाओं ने मां की अर्थी को दिया कंधा- फोटो : अमन सिन्हा

Nawada : बिहार के नवादा जिले से सामाजिक बदलाव और महिला सशक्तिकरण की एक बेहद अनोखी और ऐतिहासिक तस्वीर सामने आई है। यहाँ मिर्जापुर निवासी इंजीनियर ब्रह्मदेव प्रसाद की 70 वर्षीय पत्नी सुधारानी के निधन के बाद सदियों पुरानी धार्मिक रूढ़ियों को तोड़ते हुए महिलाओं ने न सिर्फ उनकी अर्थी को कंधा दिया, बल्कि श्मशान घाट तक शव यात्रा में शामिल होकर अंतिम संस्कार की रस्मों को भी पूरा किया। समाज में आमतौर पर महिलाओं के श्मशान घाट जाने और शव को छूने तक की पाबंदी वाली मान्यताओं के विपरीत हुई यह घटना पूरे इलाके में चर्चा का विषय बनी हुई है।


अर्जक संघ की अनूठी पहल, 'राम नाम सत्य है' की जगह गूंजे मानववादी नारे

इस ऐतिहासिक और प्रगतिशील पहल के पीछे मानववादी संगठन 'अर्जक संघ' की मुख्य भूमिका रही। संगठन के कार्यकर्ताओं और परिजनों के सहयोग से इस अंतिम यात्रा का स्वरूप पूरी तरह से पारंपरिक व्यवस्थाओं से अलग था। श्मशान यात्रा के दौरान रूढ़िवादी नारे 'राम नाम सत्य है' के स्थान पर वैज्ञानिक सोच को बढ़ावा देने वाले नारे गूंज रहे थे। पूरी शव यात्रा के दौरान उपस्थित लोग 'जीवन मरण सत्य है', 'सुधारानी अमर रहे' और 'मानववाद जिंदाबाद' जैसे प्रगतिशील नारे बुलंद कर रहे थे।


बेटी, बहुओं और पोतियों ने निभाया फर्ज, चिता को दी अग्नि

सुधारानी की अंतिम विदाई में उनके अपने परिवार की तीन पीढ़ियों की महिलाओं ने आगे बढ़कर जिम्मेदारी संभाली। अर्थी को कंधा देने और श्मशान घाट पर चिता को मुखाग्नि देने वालों में मृतका की बेटी इंजीनियर विदुषी भारती, बहुएं मधुबाला कुमारी व नेहा कुमारी और पोतियां टिमटिम, टूटू व टिया मुख्य रूप से शामिल थीं। इसके अलावा, सामाजिक बदलाव की इस मुहिम को गति देने के लिए अर्जक संघ से जुड़ीं सुरभि कुमारी और रंजू कुमारी सहित बड़ी संख्या में स्थानीय महिलाएं भी इस शव यात्रा का हिस्सा बनीं।


स्त्री-पुरुष समानता और वैज्ञानिक सोच स्थापित करने का लक्ष्य

इस पूरी शव यात्रा का नेतृत्व अर्जक संघ सांस्कृतिक समिति के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष उपेंद्र पथिक कर रहे थे। उन्होंने इस पहल के महत्व को रेखांकित करते हुए मीडिया को बताया कि इस ऐतिहासिक कदम का मुख्य उद्देश्य समाज में स्त्री और पुरुष के बीच पूर्ण समानता स्थापित करना है। उन्होंने जोर देकर कहा कि आज के आधुनिक युग में हमें अवैज्ञानिक, तार्किक रूप से कमजोर और रूढ़िवादी व्यवस्थाओं को पूरी तरह नकार देना चाहिए, ताकि एक न्यायसंगत और जागरूक मानववादी व्यवस्था की नींव रखी जा सके।


मनियोचक गांव का रहने वाला है परिवार, सामाजिक बदलाव की हो रही सराहना

उल्लेखनीय है कि मृतका सुधारानी के पति इंजीनियर ब्रह्मदेव प्रसाद मूल रूप से नवादा जिले के ही रोह प्रखंड अंतर्गत मनियोचक गांव के निवासी हैं, जो वर्तमान में मिर्जापुर में रह रहे हैं। ग्रामीण और पारंपरिक पृष्ठभूमि से जुड़े परिवार द्वारा उठाए गए इस साहसिक और सुधारवादी कदम की बुद्धिजीवियों और प्रगतिशील समाज द्वारा जमकर सराहना की जा रही है। लोगों का मानना है कि ऐसे प्रयासों से समाज में व्याप्त लैंगिक भेदभाव को खत्म करने में बड़ी मदद मिलेगी।


अमन सिन्हा की रिपोर्ट