Bihar Road Accident: कोसी मोड़ के निकट में बाइक को तेज रफ्तार वाहन ने मारी टक्कर, तीन युवकों की हालत गंभीर

Bihar Road Accident: नवादा जिले के रोह थाना क्षेत्र में कोसी मोड़ के निकट एक बार फिर सड़क सुरक्षा का घिनौना खेल खेला गया है।...

Nawada Bike Crash at Kosi Mod 3 Youths Critically Injured!
रफ्तार का कहर- फोटो : reporter

Bihar Road Accident: नवादा जिले के रोह थाना क्षेत्र में कोसी मोड़ के निकट एक बार फिर सड़क सुरक्षा का घिनौना खेल खेला गया है। मंगलवार रात बाजार से घर लौट रहे तीन युवक एक ही बाइक पर सवार थे। अचानक अज्ञात तेज रफ्तार वाहन ने उनकी बाइक को इतनी भीषण टक्कर मारी कि पूरा इलाका दहल गया। 

रंजीत कुमार, अखिलेश कुमार और रोशन कुमार  बेनीपुर गांव के तीन  दोस्त  गंभीर रूप से घायल हो गए। यह हादसा महज एक दुर्घटना नहीं, बल्कि बिहार की बदहाल सड़कों और प्रशासन की ज्यादती का जीता-जागता सबूत है।स्थानीय सूत्रों के मुताबिक टक्कर इतनी विकराल थी कि घायलों को बचाने के लिए स्थानीय पत्रकारों को भी मैदान में उतरना पड़ा। रोह के स्थानीय अस्पताल में प्राथमिक उपचार के बाद डॉक्टरों ने उनकी हालत देखते हुए तुरंत नवादा सदर अस्पताल रेफर कर दिया। वहां भी स्थिति बिगड़ने पर तीनों को बेहतर इलाज के लिए पावापुरी के मेडिकल अस्पताल भेज दिया गया। फिलहाल तीनों युवक जिंदगी-मौत से लड़ रहे हैं। परिवार वाले अस्पताल के गलियारों में रो-रोकर बुरा हाल कर रहे हैं। मां-बहनों के आंसू थमने का नाम नहीं ले रहे। 

यह घटना नवादा-रोह की सड़कों पर लंबे समय से चल रही लापरवाही की पराकाष्ठा है। रात के अंधेरे में तेज रफ्तार वाहनों का आतंक, बिना लाइट के मोड़, खस्ताहाल सड़क – सब कुछ प्रशासन की आंखों के सामने हो रहा है। विपक्षी नेता इसे “सरकार की जन-विरोधी नीति” बता रहे हैं। कुछ कह रहे हैं कि कोसी मोड़ पर पिछले कई सालों से ऐसे हादसे हो रहे हैं, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। क्या यह महज संयोग था या सड़क निर्माण में भ्रष्टाचार की साजिश का नतीजा? पुलिस ने अज्ञात वाहन के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है, लेकिन अब तक कोई गिरफ्तारी नहीं हुई। स्थानीय लोगों का गुस्सा फूट पड़ा है। वे पूछ रहे हैं  कब तक युवाओं की जान सड़क पर कुर्बान होती रहेगी? बिहार सरकार की सड़क सुरक्षा मुहिम का क्या हुआ? नवादा जैसे जिले में रोज सैकड़ों युवा नौकरी-रोजगार की तलाश में निकलते हैं, लेकिन सड़कें उन्हें निगल रही हैं। 

परिजनों का कहना है कि अगर समय रहते बेहतर इलाज मिल जाता तो स्थिति संभल सकती थी। अब पूरा परिवार दुआओं में लगा हुआ है। क्या प्रशासन इस हादसे को महज एक रूटीन केस मानकर टाल देगा या फिर कोसी मोड़ को सुरक्षित बनाने के लिए ठोस कदम उठाएगा? बिहार की युवा शक्ति का खून अब और नहीं बहना चाहिए। 

रिपोर्ट- अमन कुमार